शेयर बाज़ार में आशाओं और उम्मीदों का दौर खत्म। अब हर तरफ अनिश्चितता और चिंता छा गई है। यूक्रेन पर रूस के हमले का पांचवां दिन। फाइनेंस की दुनिया के केंद्र अमेरिका में मुद्रास्फीति चार दशकों के शिखर पर। जहां से भारत जैसे देशों में जमकर सस्ता धन आता है, वहां का केंद्रीय बैंक मौद्रिक नीति को कठोर बनाकर धन को महंगा करने जा रहा है। मार्च में ही ब्याज दरें बढ़ाने की योजना है। आर्थिक विकासऔरऔर भी

युद्ध जारी है। रूस यूक्रेन में अपनी समर्थक सरकार बनाए बिना पीछे नहीं हटनेवाला। नाटो ने भी टैंक भेजने शुरू कर दिए हैं। अब शेयर बाज़ार का क्या होगा? पहले दिन जमकर गिरा। अगले दिन उठ गया। अब क्या होगा? गिरेगा या उठेगा! लेकिन हां या ना, सही या गलत और कंप्यूटर की भाषा में कहें तो शून्य व एक की बाइनरी अलावा भी दुनिया में बहुत होता है। सोचने की आसानी से लिए यकीनन यह तरीकाऔरऔर भी

रूस ने 31 साल पहले तक अपने ही सोवियत संघ का हिस्सा रहे यूक्रेन पर भीषण हमला कर दिया है। यूक्रेन की सेनाएं भी लड़-मर रही हैं। यूरोप रूस के खिलाफ आर्थिक प्रतिबंध लगाने की तैयारी में है। अमेरिका ने नाटो के दम पर चेतावनी दी है कि रूस को जबाव देना पड़ेगा। लेकिन रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने ललकारा है कि अगर कोई भी रूस भिड़ने की जुर्रत करेगा तो उसे इतिहास का भंयकरतम परिणाम भुगतान पड़ेगा।औरऔर भी

आशावाद के बाद बाज़ार में अभी अनिश्चितता का आलम है। जहां बेहतरी की कहानियां शेयर बाज़ार में लालच की भावना को हवा देती रहीं, वहीं अनिश्चितता भय को बढ़ाती जा रही है। बाज़ार से लालच की भावना भाग चुकी हैं। कभी यूक्रेन पर रूस के हमले और जवाब में अमेरिकी कार्रवाई के खतरे तो कभी अमेरिका में ब्याज दर बढ़ाए जाने की आशंका के नाम पर बाज़ार में बिकवाली बढ़ जाती है। इसमें भारत ही नहीं, दुनियाऔरऔर भी

शेयर बाज़ार में हर दिन ट्रेडरों के बीच जो गुत्थम-गुत्था चलती है, उसमें जान डालने के लिए माहौल बनाना पड़ता है। ऐसा माहौल जो लोगों की लालच व भय की भावना को भरपूर हवा दे। साल 2020 और 2021 में हर तरफ कहानियां फैलाई गईं कि अर्थव्यवस्था सुधर रही है। कोई कहता कि V के आकार में अर्थव्यवस्था उठ रही है, कोई कहता W के आकार में तो कोई कहता कि K के आकार में। हमारी अर्थव्यवस्थाऔरऔर भी