आज से देश की अर्थव्यवस्था की दशा-दिशा तय करने में सबसे अहम संसद के बजट सत्र का आगाज़ हो रहा है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद संसद के संयुक्त सत्र में सरकार की उपलब्धियों और नीतियां का ब्यौरा पेश करेंगे। आज ही सरकार 2021-22 की आर्थिक समीक्षा पेश करेगी। बजट सत्र का पहला भाग 11 फरवरी तक चलेगा। उसके बाद एक महीने का अवकाश। सत्र का दूसरा भाग 14 मार्च से शुरू होकर 8 अप्रैल तक चलेगा। निश्चय हीऔरऔर भी

जैसे ‘हीरा सदा के लिए’ होता है, उसी तरह इन्फोसिस, रिलायंस इंडस्ट्रीज़, एचडीएफसी, टाटा एलेक्सी, लार्सन एंड टुब्रो, आईटीसी, हिंदुस्तान यूनिलीवर, डॉ. रेड्डीज़ लैबोरेटरीज़, मारुति सुज़ुकी और क्रिसिल जैसी कंपनियां हमेशा के लिए होती हैं। लेकिन शेयर बाज़ार में ऐसी कंपनियों की संख्या 40-50 से ज्यादा नहीं होतीं। बाकी हज़ारों कंपनियों से भरपूर मुनाफा कमाकर निकल ही लेना चाहिए। दिक्कत यह है कि बराबर बढ़ते भावों वाली कंपनियों के शेयर हम बेचकर निकल नहीं पाते क्योंकि हमेशाऔरऔर भी

गिरते बाज़ार और स्टॉक्स का पहला संकेत है भाव का ठीक इससे पहले की गिरावट से नीचे चले जाना। इसे दैनिक और साप्ताहिक भावों के चार्ट पर देखा जा सकता है। अगर दैनिक भावों के चार्ट पर मौजूदा भाव 20-25 दिन के मूविंग औसत से नीचे चला जाए तो मतलब कि वह आगे भी गिरनेवाला है। दूसरा संकेत आखिरी कैंडल का रंग और आकार देता है। लाल रंग और बड़ा आकार तो गंभीर खतरा। तीसरा इशारा बिडऔरऔर भी

गिरते शेयर बाज़ार में कमाने का काम डी-मार्ट के मालिक और ‘ओल्ड फॉक्स’ के नाम से मशहूर राधाकृष्ण दामाणी जैसे उस्तादों पर छोड़ देना चाहिए। इस दरमियान रिटेल ट्रेडरों के लिए सुरक्षित तरीका यह है कि वे बाज़ार में गिरावट की चाल, चरित्र व चेहरे को सीखने-समझने पर फोकस करें। बाज़ार पहले से ही संकेत दे देता है कि आगे गिरावट का बड़ा अंदेशा है। इसे समझने के बहुत सारे संकेतक हैं जिन्हें हम बाज़ार का मौका-मुआयनाऔरऔर भी