हर साल, नया साल। नहीं पता कि अगले 365 दिनों में क्या होगा। अज्ञात में छलांग। समय की धार है, प्रवाह है जिसमें हर किसी को बहना है। लेकिन अज्ञान नहीं होना चाहिए। नहीं तो अज्ञात आपको चकरघिन्नी बना सकता है। वहीं, अगर ज्ञान और हौसला हो तो कामयाबी के दरवाजे खुलते चले जाते हैं। शेयर बाज़ार इसी अज्ञात में छलांग लगाने जैसा काम है। जो ज्ञान से, समझदारी से, अपनी सीमाओं को समझते हुए रिस्क उठातेऔरऔर भी