जो निवेशक या ट्रेडर शेयर बाज़ार के मूल स्वभाव को समझते हैं, वे न तो उन्माद में उतराते हैं और न ही अवसाद में डूबते हैं। वे कभी न कयास में फंसते हैं और न भविष्यवाणियों से उलझते हैं। वे रिस्क और रिटर्न का अपना हिसाब दुरुस्त रखते हैं और हमेशा समभाव में रहते हुए मस्त रहते हैं। ट्रेडर जानता है कि यह ज़ीरो-सम गेम है। किसी के खाते का धन ही उसके खाते में आना है।औरऔर भी

अपने शेयर बाज़ार में 21 महीने से चल रही तेज़ी क्या कुछ दिनों के झटके के बाद वापस लौट आई है या नहीं? यह तेज़ी कहां तक जाएगी? कब इसमें बड़ा करेक्शन आ सकता है? कहीं बाज़ार 20% गिरकर तेज़ी से मंदी की गिरफ्त में न चला जाए! कयास लगाने और भविष्यवाणियां करनेवालों की कोई कमी नहीं। इनके पीछे भागेंगे तो कहीं चैन नहीं मिलेगा। वहीं, इनके भंवरजाल से मुक्त होकर देखें तो दो बातें पक्के तौरऔरऔर भी

शेयर बाज़ार में निवेश और ट्रेडिंग की राह निकालना किसी सैन्य युद्ध की योजना बनाने से कम नहीं। कितनी भी कुशल योजना बना लें, कुछ भी आपकी योजना के अनुरूप नहीं चलता। इसका मतलब यह नहीं कि बिना कोई योजना बनाए मैदान में कूद पड़ना चाहिए। योजना ज़रूर बनाएं, तैयारी भी पूरी करें। लेकिन हमेशा सतर्क रहें कि पल में सारे समीकरण बदल सकते हैं। इन बदलावों के माफिक ढलने की क्षमता रखें। बाज़ार अक्सर बड़ी तगड़ीऔरऔर भी

सारा ब्रह्माण्ड, दुनिया, ज़माना और हमारे इर्द-गिर्द अंदर-बाहर की हर चीज़ हल पल बराबर बदलती रहती है। पिछले दस सालों में तो ज़माना कुछ ज्यादा ही तेज़ी से बदला है। इसमें भी पिछले दो साल में तो कोरोना ने सारी दुनिया, हमारा समूचा जीवन ही बदल डाला। सबक यह है कि लम्बे समय का निवेश चुनते वक्त वैसे ही उद्योग की कंपनी चुनी जाए जिसमें समय के साथ चलने का दमखम हो। ऐसा न हो कि कैसेटऔरऔर भी

मल्टी-लेवल मार्केटिंग स्कीमों की तरह क्रिप्टो एक्सचेंजों के पीछे भी राजनेताओं की मिलीभगत बताई जाती है। उनकी ताकतवर लॉबी ने सरकार व नियामक संस्थाओं के हाथ बांध दिए हैं। लेकिन ज़मीनी स्थिति विकराल होती दिख रही है। ब्लॉकचेन एंड क्रिप्टो एसेट काउंसिल (बीएसीसी) ने हाल ही में एक विज्ञापन में दावा किया कि क्रिप्टो करेंसी में डेढ़ करोड़ से ज्यादा भारतीय करीब 6 लाख करोड़ रुपए लगा चुके हैं, जबकि वैश्विक स्तर पर सारी क्रिप्टो मुद्राओं काऔरऔर भी