ठीक दस ट्रेडिंग दिनों के बाद नया साल 2022 शुरू हो जाएगा। पहले दो दिन शनिवार-रविवार का अवकाश। फिर सोमवार 3 जनवरी से शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग का चक्र शुरू। यकीनन बीत रहा साल 2021 बहुत सारे लोगों के लिए बहुत-बहुत कठिन रहा है। इसमें साधारण इंसान से लेकर दुनिया के सबसे अमीर लोगों में शुमार बिल गेट्स तक शामिल हैं। गेट्स का कहना है कि 2021 उनके लिए अविश्सनीय रूप से कठिन रहा है। साथ हीऔरऔर भी

जिन कंपनियों ने अभी तक मुनाफा कमाने का माद्दा न दिखाया हो, उनमें इस भरोसे निवेश करने का कोई मतलब नहीं कि वे भविष्य में जमकर मुनाफा कमा लेंगी। हेज़ फंड ही इस तरह का जोखिम उठा सकते हैं, मध्यवर्ग से आनेवाले साधारण निवेशक नहीं। उन्हें तो अपनी बचत को बढ़ाने के लिए बहुत संभल-संभल कर चलना होता है। इसलिए हमेशा बचत का लगभग आधा हिस्सा एफडी और पीपीएफ जैसे सुरक्षित माध्यमों में लगाते रहना चाहिए। म्यूचुअलऔरऔर भी

हर निवेशक या ट्रेडर रिटर्न का भूखा होता है। विदेशी निवेशक तो खासकर। अमेरिका से लेकर यूरोप व जापान तक के निवेशक विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (एफआईपी) के जरिए भारत से हर साल कम से कम 10-12% रिटर्न कमा रहे हैं जो उनके लिए अपने देश की तुलना में बहुत-बहुत ज्यादा है। वो भी मुद्रा उतार-चढ़ाव के रिस्क को मिटाकर क्योंकि रुपया डॉलर के मुकाबले बराबर 74-75 की रेंज में चल रहा है। विदेशी निवेशकों ने हमारे शेयरऔरऔर भी

सब कुछ जानते हुए भी डर तो लगता ही है। डरना और लालच करना इंसान का मूल स्वभाव है। शेयर बाज़ार में आनेवाले डर और लालच के दो ध्रुवों में खिंचे रहते हैं। एक तरफ लालच में फंसकर क्रिप्टो के जाल में फंस जाते हैं। दूसरी तरफ हिसाब लगाते हैं कि साल 2008 में रिलायंस पावर के आईपीओ के धमाके के बाद बाज़ार धराशाई हो गया था। इस बार तो ज़ोमैटो, नायिका और पेटीएम के आईपीओ केऔरऔर भी