म्यूचुअल फंडों के पास 35.32 लाख करोड़ रुपए के फंड हैं। उनकी चपल चाल से होता यह है कि आधे सितंबर तक भले ही शेयर बाज़ार दबा-दबा चले। लेकिन आखिरी हिस्से में उनकी खरीद से बढ़ जाता है। यह सालों-साल का पैटर्न है। खासकर सितंबर का आखिरी हफ्ता तो हमेशा तेज़ी या बढ़त का रहता है। इस दौरान विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) भी बेचने से कहीं ज्यादा खरीदते हैं। तो, आम ट्रेडरों के लिए सबक यह हैऔरऔर भी

म्यूचुअल फंड दम भरना चाहते हैं कि उन्होंने पिछली तिमाही व पहली छमाही में निवेश के इतने सही फैसले लिए कि उनकी तमाम स्कीमों का शुद्ध आस्ति मूल्य (एनएवी) बढ़ गया है। इसके लिए सितंबर के दूसरे में उन कंपनियों के शेयर खरीदते जाते हैं जो पहले से बढ़ रहे होते हैं। उनकी इस खरीद से सेंसेक्स और निफ्टी या दूसरे शब्दों में कहें तो बाजार बढ़ जाता है। पलटकर इसका सीधा असर म्यूचुअल फंडों की यूनिटोंऔरऔर भी

सितंबर का महीना चालू है। इसी के साथ चालू वित्त वर्ष 2021-22 की दूसरी तिमाही और पहली छमाही समाप्त होगी। शेयर बाज़ार में निवेश व ट्रेडिंग की दुनिया में इसका अपना अलग महत्व है, म्यूचुअल फंडों के लिए खासतौर पर। आप जानते ही होंगे कि दुनिया भर में ही नहीं, भारत में भी आम निवेशकों का अधिकांश धन म्यूचुअल फंडों के ज़रिए ही शेयर बाज़ार में लगता है। रिटेल निवेशकों की धमक इन्हीं फंडों के माध्यम सेऔरऔर भी

सोचो कि बाज़ार (निफ्टी/सेंसेक्स) गिर जाएगा तो वो बढ़ जाता है और सोचो कि बढ़ेगा तो गिर जाता है। यह हमारा या आपका ही नहीं, बड़े-बड़े दिग्गजों का भी हाल है। कारण यह कि आप लाखों-करोड़ों लोगों के मन में क्या भाव व भावनाएं चल रही हैं, उनका अंदाज़ा तो लगा सकते हैं, पर सटीक हिसाब नहीं लगा सकते। इसीलिए छोटी अवधि में शेयर बाज़ार की चाल की सटीक भविष्यवाणी करना असंभव है। फिर भी लाखों ट्रेडरऔरऔर भी

शेयर बाज़ार के मूल स्वभाव के बारे में हमेशा याद रखें कि आज व अभी का भाव भविष्य में कंपनी के साथ जो होगा, उसका जो नफा-नुकसान हो सकता है, उसे जज़्ब या डिस्काउंट किए रहता है। लिस्टेड कपनी के शेयर के भाव में अभी तक सारी उपलब्ध और अनुमानित जानकारियों व सूचनाओं का समावेश होता है। बड़े-बड़े दिग्गजों, उन्नत सॉफ्टवेयर की गणनाओं और कंपनी व उद्योग के पारखी लोगों की सम्मिलित अपेक्षाओं को दर्शाता है उसकेऔरऔर भी