शेयर बाजार के ज्यादातर ट्रेडरों के पास कोई हिसाब नहीं रहता कि उनकी पूंजी का कितना हिस्सा लागत के रूप में चला जाता है। हर स्टॉक के भावों के साथ हर दिन इम्पैक्ट कॉस्ट दी रहती है। लेकिन अक्सर कोई इसे देखता ही नहीं। आप जिस भाव पर बेचना या खरीदना चाहते हैं, उतने पर सौदा कर पाते हैं या नहीं, यह लागत इससे वास्ता रखती है। सिक्यूरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स, स्टैम्प ड्यूटी, जीएसटी और शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन्सऔरऔर भी

अगर आप नशे, सनसनी या उन्माद के लिए शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग करते हैं तो यह हरकत फौरन बंद कर दें। अन्यथा अपने साथ-साथ आप अपनों को भी ले डूबेंगे। ट्रेडिंग एक बिजनेस है। इनकम टैक्स वाले भी ट्रेडिंग से होनेवाली आय को बिजनेस आय मानकर टैक्स लगाते हैं। इसलिए जो नियमित ट्रेड करते हैं, उन्हें इस हकीकत को स्वीकार कर लेना चाहिए। बिजनेस की तरह ही धैर्य, शांति व अनुशासन से ट्रेडिंग करनी चाहिए। व्यापारी कीऔरऔर भी

शेयर बाज़ार की ट्रेडिंग में सारे के सारे कूदनेवाले आते हैं तो खुद कमाने के लिए। लेकिन हकीकत में दूसरों की कमाई कराके चले जाते हैं। उन्हें होश ही नहीं रहता कि वे जितने ज्यादा सौदे करेंगे, उस पर ब्रोकरों से लेकर स्टॉक एक्सचेंज और सरकार की पक्की कमाई होती रहती है। ज्यादातर ट्रेडर अक्सर कोई गिनती ही नहीं करते कि महीने में कम से कम कितना कमाएं कि सारा टैक्स, ब्रोकरेज़ व अन्य खर्चों के बादऔरऔर भी

अपना शेयर बाज़ार इस समय दो अतियों में खिंचा हुआ है। स्टॉक्स जो चढ़ चुके हैं और उतरने का नाम नहीं ले रहे। साथ ही स्टॉक्स जो गिरे हैं और उठने का नाम नहीं ले रहे। चढ़े हुए शेयर खरीद भी लें तो हो सकता है कि 10-12 साल में कंपनी के धंधे के बल पर अच्छा-खासा लाभ दे जाएं। लेकिन दो-तीन साल में उनसे कुछ खास नहीं मिलने जा रहा। वहीं, गिरे हुए शेयर हो सकताऔरऔर भी

यूं तो मंदी की लहर आने पर तेज़ी में चढ़े शेयर भी गिरते हैं। मार्च-अप्रैल 2020 में हम ऐसा देख चुके हैं। लेकिन बराबर चढ़ते शेयरों को शॉर्ट करना ट्रेडर के लिए आत्मघाती होता है। शॉर्ट-सेलिंग के लिए स्टॉक्स चुनने का सीधा-सा सूत्र है: रोज़ाना के भावों के चार्ट पर अगर स्टॉक के भाव 25 दिनों के एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज़ (ईएमए) से ऊपर चल रहे हों तो उसमें कभी शॉर्ट-सेलिंग न करें। शॉर्ट-सेलिंग उन्हीं स्टॉक्स में करेंऔरऔर भी