शेयर बचाएं बचत को मुद्रास्फीति की मार से
महंगाई कैसे घुमाकर टैक्स लेने का काम करती है, यह पेट्रोल, डीजल व रसोई गैस के लगातार बढ़ते दामों ने साबित कर दिया है। इधर लाखों लोगों का काम-धंधा बंद। जिनका बचा, उनकी आमदनी नहीं बढ़ी। ऊपर से महंगाई ने खर्च बढ़ाया तो बचत घटती गई। देश में घरेलू बचत दर पांच साल में 25.2% से 8.2% पर आ चुकी है। बैंक एफडी पर 5.4% ब्याज, जबकि मुद्रास्फीति की दर 6.3% है। मतलब, एफडी मे रखा धनऔरऔर भी
खबर का झुनझुना बजने से पहले किया खेल!
राकेश झुनझुनवाला ने जिस कंपनी, एप्टेक में इनसाइडर ट्रेडिंग की, उसमें उनके परिवार का 48% मालिकाना है। झुनझुनवाला का परिवार व सहयोगी मई 2016 से ही बाज़ार से एप्टेक के शेयर बटार रहे थे। सितंबर 2016 के शुरू में उनके भाई ने कंपनी के 2.5 लाख और बहन से 5 लाख शेयर खरीदे। ये सौदे 100 करोड़ रुपए से ज्यादा के थे। तब कंपनी के शेयरों पर 10% का अपर सर्किट लग गया। इसके कुछ दिन बादऔरऔर भी
ले-देकर धुल गया इनसाइडर ट्रेडिंग का दाग!
सेबी को चुकाए 37 करोड़ रुपए में राकेश झुनझुनवाला ने 18.5 करोड़, उनकी पत्नी रेखा ने 3.2 करोड़, भाई राजेश ने 1.22 करोड़, बहन सुधा गुप्ता ने 50 लाख, सास सुशीलादेवी ने 80 लाख, सहयोगी उत्पल सेठ ने 69 लाख, रमेश दामाणी ने 6.2 करोड़ और मधु जयकुमार ने 1.7 करोड़ रुपए दिए हैं। सोचिए! राकेश झुनझुनवाला का कितना बड़ा जाल-बट्टा था। बीवी, भाई, बहन, सास व सहयोगी तक लिप्त। इस साल 18 जनवरी को राकेश झुनझुनवालाऔरऔर भी
सेबी का कन्सेंट क्लॉज, नोट देकर बनें बेदाग
सेबी ने एप्टेक में हुई इनसाइडर ट्रेडिंग के मामले में राकेश झुनझुनवाला, उनकी पत्नी और आठ अन्य को दोषी पाया। इन आठ में राजेश कुमार झुनझुनवाला, सुशीलादेवी गुप्ता, सुधा गुप्ता, उत्पल सेठ, ऊष्मा सेठ सुले, रमेश दामाणी, मधु जयकुमार और चुग योगिंदर पाल शामिल हैं। सेबी के ‘कन्सेंट क्लॉज’ के तहत ये सभी कुल 37 करोड़ रुपए चुकाकर दोषमुक्त हो गए। ‘कन्सेंट क्लॉज’ में आरोपी न तो अपना दोष स्वीकार करता है और न इनकार। अमेरिका होताऔरऔर भी







