रुपया, सोना और जमीन-जायदाद में जो भी लक्ष्मी बसती हैं, वे मूल्य के हिसाब से बदलती रहती हैं। दिवाली से दिवाली तक सोने के दाम 11.61% बढ़े, लेकिन पांच साल में मात्र 0.35% बढ़े हैं। जमीन-जायदाद में मांग न निकलने से मामला ठंडा है। सेंसेक्स साल भर में 8.68% और पांच साल में 60.37% बढ़ा है। लेकिन आज तथास्तु में हम जिस कंपनी की चर्चा करने जा रहे हैं, उसका शेयर पांच साल में 175.27% बढ़ा है…औरऔर भी

भोर होने को है। घर की छोटी-बड़ी औरतें हर कोने-अंतरे में जाकर सूप पीटकर एकस्वर में कहती हैं – ईशर आवएं, दलिद्दर जाएं। पता नहीं कि उनका ईशर कोई ईश्वर है या ऐश्वर्य। लेकिन दलिद्दर में दुख देनेवाली हर चीज़ का समावेश है। चाहे वो बीमारी हो, निर्धनता हो या कोई झगड़ा-फसाद व क्लेश हो। वे शोर नहीं करतीं। पूरी शांति से इस दारिद्रय को भगाने का अभियान चलातीं, पुरुष और बच्चों की भोर की नींद मेंऔरऔर भी

हर मुश्किल अपने साथ उसका समाधान भी लेकर आती है। वित्तीय जगत में हर तरफ शिकारी हैं तो आम ट्रेडर व निवेशक के पास आज उससे बचाव और अपनी धार बनाने का सारा सरंजाम भी है। जो सूचनाएं बड़े बैंकों, बीमा कंपनियों, एचएनआई या विदेशी व हेज फंडों के पास हैं, वे आज हमें भी उपलब्ध हैं। उनके तार जोड़कर जानकार बन जाएं तो हम भी सबसे अच्छे ट्रेडिंग आइडिया निकाल सकते हैं। अब दिवाली-पूर्व का अभ्यास…औरऔर भी

हमारे वित्तीय उद्योग के साथ बड़ी समस्या ये है कि यहां अंदर के बहुतेरे लोग निवेशकों की मदद नहीं, शिकार करने की ताक में लगे रहते हैं। ब्रोकर बहुत सारी सलाहें निकालते रहते हैं ताकि हम-आप जमकर सौदे करें और उनका कमीशन बढ़ता रहे। टीवी चैनल और वहां आनेवाले एनालिस्ट अपनी टीआरपी बढ़ाने के लिए कुछ भी करने को तैयार रहते हैं। बिजनेस अखबारों के लिए भी धंधा पहले है, पाठक बाद में। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी

ठीक पिछली उठान पर संस्थाओं की खरीद आ सकती है और पिछली गिरावट पर संस्थाएं बिकवाली कर सकती हैं। लेकिन ध्यान रहे कि वित्तीय बाज़ार में कुछ भी 100% पक्का नहीं। यहां प्रायिकता चलती है। हो सकता है और नहीं भी। इसलिए ट्रेडर को हमेशा रिस्क मैनेज करके चलना पड़ता है। दिक्कत है कि वित्तीय जगत में घाघ भरे पड़े हैं। इसमें ट्रेडिंग की अपनी धार हर किसी को खुद निकालनी पड़ती है। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी