हर नए ट्रेडर को भावनाओं को साधने के दौर से गुजरना ही पड़ता है क्योंकि इसके बिना ट्रेडिंग में कामयाबी मिल ही नहीं सकती। लेकिन भावनाओं पर नियंत्रण पाने में सालोंसाल लग जाते हैं। फिर भी मन की परम अवस्था हमेशा के लिए स्थाई नहीं रहती। वहां बराबर ‘काम प्रगति पर है’ जैसी स्थिति बनी रहती है। याद रखें कि ट्रेडर पैदाइशी नहीं होते, बल्कि वे यहीं पर सीखकर बनते हैं। अब करते हैं शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

दिमाग को जैसा पढ़ा दो, वो तोता-रटंत कर लेता है। लेकिन मन को सिखाने में बड़ी मशक्कत व वक्त लगता है। बचपन व परिवेश से मिली वृत्तियां सहजबोध या कॉमन-सेंस बनकर वहां जमी रहती हैं जो हमारे विचारों से लेकर भावनाओं तक को नियंत्रित करती हैं। फिर उन्हीं के हिसाब से शरीर की तमाम ग्रंथियां हार्मोन्स का स्राव करती हैं और हम कभी उनके विषम दुष्चक्र से निकल ही नहीं पाते। अब पकड़ते हैं गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

सफल ट्रेडरों पर गौर करें तो उनमें से कोई भी आपको ट्रेडिंग के नुकसान पर किल्लाता हुआ नहीं मिलेगा। ऐसा नहीं कि वे दुनिया से अपनी भावनाएं छिपा ले जाते हैं, बल्कि ट्रेडिंग में घाटे पर उनकी कोई भावनात्मक प्रतिक्रिया ही नहीं होती। भावनाओं पर नियंत्रण तो बड़े-बड़े योगी तक नहीं कर पाते। फिर आखिर वे कैसे यह कमाल कर लेते हैं। जवाब है – दिनों या महीनों नहीं, सालोंसाल के अभ्यास से। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

अगर आपको भी घाटे के दलदल में धंसने के दुःस्वप्न आते हैं तो शांत होकर सोचिए कि ट्रेडिंग का बिजनेस आपके लिए है या नहीं। इंसान को ऐसा कोई बिजनेस नहीं करना चाहिए जिसमें तकलीफ उसकी उपलब्धि से ज्यादा हो। तकलीफ इतनी है कि आप चैन से सो भी नहीं पा रहे तो ऐसा बिजनेस भाड़ में जाए। वैसे भी तनाव आपको सफल नहीं होने देगा। तब आपको ट्रेडिंग फौरन छोड़ देनी चाहिए। अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी

बच्चों को सोते वक्त भूतों व राक्षसों के डरावने सपने आते हैं। अगर आपको भी ट्रेडिंग में भयंकर घाटा लगने के दुःस्वप्न आते हैं तो इसका मतलब कि आप अभी तक ट्रेडिंग में एकदम कच्चे और बच्चे हो। याद रखें कि आपको वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग में घाटे की नहीं, स्टॉप-लॉस को स्वीकार करने की आदत डालनी है। कोई भी बिजनेस बिना लागत के नहीं चलता। स्टॉप-लॉस ट्रेडिंग की लागत है। अब पकड़ते हैं सोम का व्योम…औरऔर भी