ट्रेडिंग तो है स्थितिप्रज्ञ बनने की यात्रा
वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग हर किसी के लिए नहीं है। इसकी एक नहीं, अनेक वजहें हैं। जब इन सारी वजहों की काट पैदा कर लें, तभी जाकर ट्रेडिंग में उतरे। फिर भी मानकर चलें कि अपनी कांटछांट का सिलसिला बराबर जारी रहेगा। दरअसल, ट्रेडिंग एक आईना है जिसमें हमारी हर भावनात्मक कमज़ोरी झलक कर सामने आ जाती है। सच कहें तो वो हमारे स्थितिप्रज्ञ बनने की छोटी नहीं, बल्कि मैराथन दौड़ है। अब परखें सोम का व्योम…औरऔर भी
निवेश में देखें भाव का समय मूल्य
जब महंगाई लगातार बढ़ रही हो और मुद्रास्फीति घटने के बावजूद 5-6% की दर से चढ़ रही हो तब वस्तुओं के दाम से लेकर रिटर्न तक को हमें मुद्रास्फीति की दर घटाकर देखना चाहिए। यहीं, टाइम वैल्यू ऑफ मनी या धन के समय मूल्य की अवधारणा काम आती हैं। निवेश में समय और भाव महत्वपूर्ण है। लेकिन भाव को ऊपर-ऊपर नहीं, बल्कि उसके समय मूल्य के आधार पर देखा जाना चाहिए। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी
पीछे भागने से नोट कभी न आए हाथ
यह नियम मन में कहीं गहरे बैठा लीजिए कि वित्तीय बाज़ार में जिन ट्रेडरों का ध्यान केवल नोट कमाने पर रहता है, वे अक्सर नोट लुटाते और अपना लक्ष्य कभी हासिल नहीं कर पाते। वहीं ट्रेडिंग की राह की बारूदी सुरंगों का बराबर ध्यान रखनेवाले ट्रेडर अक्सर नोट बनाते और अपना लक्ष्य पा लेते हैं। वैसे, बाज़ार को दोनों ही तरह के ट्रेडर चाहिए क्योंकि एक गंवाएगा, तभी तो दूसरा कमाएगा। अब करते हैं शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी
ट्रेडिंग में नोट तक बिछीं बारूदी सुरंगें
जब हम वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग की तरफ लपकते हैं तो बस इतना दिखता है कि वहां धन ही धन है। न बॉस, न ऑफिस जाने का झंझट। कंप्यूटर, लैपटॉप या स्मार्टफोन चालू करो। बाज़ार देखो। सौदे करो और नोट बनाते जाओ। हम यह नहीं देख पाते कि नोट तक पहुंचने की राह में कितनी बारूदी सुरंगें बिछी हुई हैं जो हमारे बैंक खाते से लेकर आत्मविश्वास तक के परखच्चे उड़ा सकती हैं। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी






