यह हफ्ता भारत ही नहीं, दुनिया भर के वित्तीय बाज़ारों के लिए ऐतिहासिक होने जा रहा है। भारत में बुध-गुरु की रात और अमेरिका में बुधवार का दिन वो खबर लेकर आएगा जिस पर सारी दुनिया की निगाहें टिकी हुई है। 70-75% प्रायिकता इस बात की है कि उस दिन फेडरल रिजर्व लगभग एक दशक से ठहरी ब्याज दरों को बढ़ा देगा और यह दर 0.25% से बढ़ाकर 0.50% की जा सकती है। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

ठीक पांच साल पहले हमने इसी जगह नवीन फ्लूवोरीन को छांटकर पेश किया था। तब उसका शेयर 260 के आसपास था और यह कॉलम पेड नहीं, खुला था। हमने साफ-साफ कहा था कि वो तलहटी में पड़ा है। वही शेयर 18 नवंबर को 2010 तक जाने के बाद फिलहाल 1715 पर है। पांच साल में 569.6% रिटर्न। यही है सही भाव और सही वक्त पर पुख्ता कंपनियों में निवेश का कमाल। तथास्तु में एक और संभावनामय कंपनी…औरऔर भी

बिना लागत के कोई बिजनेस नहीं होता। ऐसे में ट्रेडिंग भी अगर बिजनेस है तो उसकी लागत क्या है? आपकी मेहनत, ब्रोकर की ब्रोकरेज, टैक्स और आपकी ट्रेडिंग पूंजी पर आमतौर पर मिल सकनेवाला ब्याज़। काश! अगर वित्तीय बाज़ार में ट्रेडिंग की इतनी ही लागत होती तो वो बहुत मुनाफे का धंधा होता। लेकिन हकीकत में इसमें जो स्टॉप लॉस लगता है, वो इस धंधे की असली लागत है। इससे बचना संभव नहीं। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी

कभी भी किसी के कहने में न आएं। ब्रोकरों व टेलिविज़न चैनलों पर आनेवाले एनालिस्टों पर कतई भरोसा न करें। वे सब अपना-अपना स्वार्थ पूरा करने में लगे हैं। हो सकता है कि यदाकदा उनकी किसी बात से आपका फायदा हो जाए। लेकिन यह अपवाद है, नियम नहीं। आपका भला करना उनके बिजनेस मॉडल का हिस्सा नहीं है। न्यूज़ हो तो किनारे हो लें। भावों का चार्ट ही आपका इकलौता भरोसेमंद सहारा है। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी