ट्रेडिंग एक हुनर है, जो जन्मजात नहीं, बल्कि सीखा जाता है। हरेक कामयाब ट्रेडर को निरपवाद रूप से सीखने के दौर से गुजरना पड़ता है। लेकिन अच्छी बात यह है कि इस धंधे में कोई एंट्री-बैरियर नहीं। आपकी पृष्ठभूमि क्या है, उम्र क्या है, अनुभव है कि नहीं, इससे फर्क नहीं पड़ता। कोई भी शख्स अध्ययन, मनन व अभ्यास से कामयाब ट्रेडर बन सकता है, बशर्ते सही सोच और पूरा समर्पण हो। चलिए, बढ़ें सोमवार की ओर…औरऔर भी

शेयर बाज़ार के निवेश के रिस्क को भगवान भी नहीं मिटा सकता। कंपनी का मालिक तक नहीं जानता कि कौन-सी आकस्मिकता उसके सालों से जमे धंधे को ले बीतेगी। इसलिए यहां से लक्ष्य पूरा होते ही धन निकाल कर ज़मीन, सोने या एफडी जैसे सुरक्षित माध्यम में लगा दें। दूसरे, ज्यादा घाटा भी न सहें। कोई शेयर 25% गिर गया तो बेचकर निकल लें क्योंकि उतना भरने के लिए उसे 33.33% बढ़ना पड़ेगा। अब आज का तथास्तु…औरऔर भी

हमारे शेयर बाज़ार में गिनती के दो-चार लाख लोग ही होंगे जो लगाकर लंबे समय के लिए भूल जाते हैं और कंपनी के साथ निवेश का खिलना देखते हैं। बाकी तो झट लगाया और कमाया की नीति अपनाते हैं। अभी यही रुख हावी है। मजबूत व सुरक्षित कंपनियों से निकाल कर रिस्की मिड कैप व स्मॉल कैप या कमज़ोर कंपनियों में लगाया और उठाया। मुनाफावसूली की और फिर सुरक्षित स्टॉक्स खरीद लिए। अब हफ्ते का अंतिम ट्रेड…औरऔर भी

आम धारणा है कि पंजाब और केरल से सबसे ज्यादा मजदूर विदेश में कमाने जाते हैं। खाड़ी के देश, खासकर अरब के देश इनके खास ठिकाने हैं। लेकिन हकीकत यह है कि उत्तर प्रदेश अरब देशों को मजदूर भेजने में सबसे आगे हो गया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 2012 में उत्तर प्रदेश से 1.91 लाख मजदूर अरब देशों में काम करने गए। इसके बाद केरल (98,000), आंध्र प्रदेश (92,000), बिहार (84,000), तमिलनाडु (78,000), राजस्थान (50,000) औरऔरऔर भी

हम शेयर बाज़ार को ललचाई नज़रों से देखते हैं। हमें लगता है, वहां खटाखट नोट बनाए जा सकते हैं। लेकिन सोचिए! ये नोट छापता कौन है? रिजर्व बैंक। ज्यादा नोट जब कम स्टॉक्स का पीछा करते हैं तो बाज़ार चढ़ जाता है। इसी तरह के चक्र में अमेरिका में जनवरी 2013 से अब तक S&P-500 सूचकांक 30% बढ़ा है। न कमाया, न बचाया। 4% ब्याज पर कर्ज उठाकर लगाया और शुद्ध 26% बनाया। अब गुरुवार का मर्म…औरऔर भी