हम अगर शेयर बाज़ार में निवेश करते हैं तो कंपनियों के विकास में हिस्सेदारी करते हैं। आईपीओ के जरिए प्राइमरी बाज़ार में लगाया गया धन बिना किसी ब्याज व देनदारी के सीधे कंपनी को मिल जाता है। ऐसा न हो तो कंपनी के लिए पूंजी की लागत बढ़ जाएगी। सेकेंडरी बाज़ार/स्टॉक एक्सचेंज इस निवेश के रिस्क को संभालने का माध्यम हैं। वो हमें जब चाहें, निकल जाने का मौका देता है। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

विचित्र, किंतु सत्य है कि शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग से कमाई शिव का धनुष तोड़ने जैसा पराक्रम हो गया है। बड़े-बड़े महारथी बड़े दम-खम और दावे के साथ ट्रेडिंग में उतरते हैं। लेकिन शिव का धनुष तोड़ने की बात तो छोड़िए, उसे टस से मस तक नहीं कर पाते। मैं यह बात हवा में नहीं, बड़े-बड़े महारथियों से बातचीत के आधार पर कह रहा हूं। कुछ दिन पहले की बात है। इंजीनियरिंग छोड़कर होलटाइम ट्रेडिंग में लगेऔरऔर भी