शराब, ड्रग्स या ट्रेडिंग की लत लग जाए तो बरबाद होने में वक्त नहीं लगता। खुशी की तलाश में निकले लोग अक्सर खुद को ही गंवा बैठते हैं। दरअसल, ट्रेडिंग का बुनियादी सूत्र है कि जिस भाव पर डिमांड सप्लाई से ज्यादा होती है, वहां से भाव चढ़ते हैं। इसकी उल्टी सूरत में गिरते हैं। हमें इन स्तरों का पता लगाकर खरीदना/बेचना होता है। इसलिए यहां एडिक्ट नहीं, एकदम मुक्त दिमाग चाहिए। अब हफ्ते की आखिरी ट्रेडिंग…औरऔर भी

सफल ट्रेडर अपने प्रति निर्मम और बाज़ार के प्रति बेहद चौकन्ना रहता है। पक्का रिकॉर्ड रखिए। हर गलती से सीखिए और भविष्य में बेहतर कीजिए। यह नहीं कि धन गंवाने के बाद मुंह छिपाते फिरें। बहुत से लोग घाटा खाने के बाद परिचितों से ही नहीं, बाज़ार तक से कतराते हैं। लेकिन इस तरह छिपने-छिपाने से कुछ नहीं सुलझता। सफलता के लिए घाटे की पीड़ा को पिरोकर अनुशासन में बंधना पड़ता है। आगे है गुरुवार का चक्कर…औरऔर भी

आप ऐसे ट्रेडर तो नहीं जो खुद का नुकसान करने पर आमादा है? ट्रेडिंग से हुए फायदे-नुकसान का ग्राफ बनाएं। अगर कुल मिलाकर ग्राफ का रुख ऊपर है तो आप सही जा रहे हैं। अन्यथा, तय मानिए कि आप बाज़ार की चाल नहीं पकड़ पा रहे और अपना ही नुकसान करने की फितरत के शिकार हैं। गहराई से सोचिए और अपने नज़रिए की पड़ताल कीजिए। इस बीच सौदों का साइज़ फौरन घटा दीजिए। अब रुख बाज़ार का…औरऔर भी

खराब किस्मत का रोना रोनेवाले अक्सर नाहक मुसीबत मोल लेने और जीत के जबड़े से हार खींच लाने में माहिर होते हैं। ज़रा सोचिए तो सही कि सफलता का बढ़िया ट्रैक-रिकॉर्ड रखनेवाले दिमागदार लोग भी ट्रेड में लगातार पिटते क्यों हैं? क्या यह अज्ञान है, खोटी किस्मत है या अपने ही पैर में कुल्हाड़ी मारने की फितरत? नशेड़ियों की तरह ऐसे लोग खुद को ही खोखला करते चले जाते हैं। खैर, अब रुख करते हैं बाज़ार का…औरऔर भी

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वेदांत कहता है कि पाप जैसी कोई चीज़ नहीं। हां, गलती ज़रूर होती है और, हमारी सबसे बड़ी गलती है खुद को कमज़ोर, पापी और दीनहीन, दयनीय समझना। यह समझना कि हम इतने गए-गुजरे हैं कि हमसे कुछ हो ही नहीं सकता।और भीऔर भी

केवल सरकार के बांड सुरक्षित हैं। बाकी हर निवेश में यह रिस्क है कि जितना वादा है, कहा गया है या शुरू में सोचा है, उतना रिटर्न आखिरकार नहीं मिलेगा। अब यह निवेशक पर है कि वो आंख मूंदकर फैसला करे या सारे जोखिम का हिसाब-किताब पहले से लगाकर। इस मायने में ट्रेडर अलग हैं। वे सारा कुछ नापतौल कर न्यूनतम रिस्क लेते हैं। वे बड़ा जोखिम कतई नहीं उठाते। इस हफ्ते तो भयंकर उठापटक होनी है।…औरऔर भी