सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को नई पूंजी उपलब्ध कराने पर तस्वीर जून अंत साफ हो जायेगी। बैंकों को अपने बिजनेस के बढ़ने के साथ-साथ पूंजी पर्याप्तता अनुपात (सीएआर) के मानक को पूरा करने के लिए बराबर पूंजी बढ़ाते रहने की जरूरत होती है और प्रमुख शेयरधारक होने के नाते में उनमें पूंजी निवेश बढ़ाना सरकार की मजबूरी है। वित्तीय सेवाओं के सचिव डी के मित्तल ने सोमवार को दिल्ली में एक समारोह के दौरान कहा, ‘‘मई अंत अथवाऔरऔर भी

2जी लाइसेंसों के निरस्त होने के मद्देनजर भारतीय दूरसंचार उद्योग में रोजगार में जबरदस्त कमी आने की आशंका है। 2जी लाइसेंस निरस्त किए जाने से प्रभावित कंपनियों ने कर्मचारियों की छंटनी भी शुरू कर दी है। मानव संसाधन क्षेत्र में सक्रिय फर्म टीमलीज सर्विसेज की महाप्रबंधक (सेवाएं) मधुबाला वैद्यनाथन ने एक समाचार एजेंसी से बातचीत में कहा, ‘‘जिन कंपनियों के 2जी लाइसेंस रद्द किए गए हैं, उनमें से ज्यादातर अपने कर्मचारियों की संख्या घटा रही हैं। यहऔरऔर भी

भारत में मुद्रास्फीति की दर घटकर 7 फीसदी पर आती है। वहीं चीन में मुद्रास्फीति बढ़ने के बावजूद मार्च में 3.6 फीसदी रही है। वह भी भारत में जहां थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति चलन में है, वहीं चीन में मुद्रास्फीति का पैमाना उपभोक्ता मूल्य सूचकांक है। चीन में मार्च माह में मुद्रास्फीति के इस तरह बढ़कर 3.6 होने जाने से कीमतों पर काबू पाने की सरकार की क्षमता को लेकर चिंता जताई जा रही है।औरऔर भी

महीने भर पहले जब ओएनजीसी में सरकार के पांच फीसदी हिस्से को खरीदने का ठींकरा देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी एलआईसी के माथे पर फोड़ा गया था, तब बड़ा हल्ला मचा था कि इससे तो एलआईसी का हश्र भी किसी दिन यूटीआई जैसा हो जाएगा। लेकिन ताजा साक्ष्य इस बात की गवाही देते हैं कि एलआईसी ने भले ही ओएनजीसी के ऑफर फॉर सेल को सरकार के दबाव में बचाया हो। पर, वह खुद भी निवेशऔरऔर भी

आइशर मोटर्स का दस रुपए अंकित मूल्य का शेयर 4 मई 2011 को बीएसई में 1119 रुपए की तलहटी पर था। ठीक 11 महीने बाद पिछले हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन, 4 अप्रैल 2012 को 2210 रुपए की चोटी पर जा पहुंचा। इसी दौरान एनएसई में यह 1114 रुपए से 2214 रुपए तक पहुंचा है।. न्यूनतम से उच्चतम के बीच करीब-करीब दोगुना फासला! 11 महीने में 98 फीसदी का रिटर्न!! यह है शेयर बाजार में निवेश कीऔरऔर भी

हम अक्सर अतीत के प्रति मोह, वर्तमान के प्रति खीझ और भविष्य के प्रति डर से भरे रहते हैं। कल, आज और कल को साधना जरूरी है। लेकिन उसके लिए हमें निर्मोही, निरपेक्ष और निडर बनना होगा।और भीऔर भी

पैसा तो हर कोई कमाता है। यह कोई अनोखी या असामान्य बात नहीं है। लेकिन जिस लोगों ने भी हमें  इस मंज़िल पर पहुंचाने में मदद की है, हमें हमेशा उनका कृतज्ञ होना चाहिए। इससे हम छोटे नहीं होते, बल्कि बड़े बन जाते हैं।और भीऔर भी

खेमे पकड़ लेना सबसे आसान है। लेकिन खेमों से बाहर निकलकर सत्य का अनुसंधान बहुत कठिन है। खेमों में आस्था चलती है। आप बहुत कुछ मानकर चलते हैं। लेकिन यहां सब कुछ कसौटी पर कसा जाता है।और भीऔर भी

अर्थव्यवस्था और सरकार दोनों का मूल मकसद अवाम की सेवा करना है। लेकिन भ्रष्ट होते ही वे उल्टा काम करने लगती है और लोगों को निचोड़कर उनका धन व सत्ता कुछ हाथों में केंद्रित करने लग जाती हैं।और भीऔर भी

इस दुनिया में हम ही हम नहीं, दूसरे भी हैं तमाम। इसलिए यहां समझौते करके ही चलना पड़ता है। अपने अहम को गलाकर दूसरे को स्वीकार कर चलना पड़ता है। और, इसकी शुरुआत होती है परिवार से।और भीऔर भी