सरकारी बैंकों की पूंजी पर स्पष्टता जून तक

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को नई पूंजी उपलब्ध कराने पर तस्वीर जून अंत साफ हो जायेगी। बैंकों को अपने बिजनेस के बढ़ने के साथ-साथ पूंजी पर्याप्तता अनुपात (सीएआर) के मानक को पूरा करने के लिए बराबर पूंजी बढ़ाते रहने की जरूरत होती है और प्रमुख शेयरधारक होने के नाते में उनमें पूंजी निवेश बढ़ाना सरकार की मजबूरी है।

वित्तीय सेवाओं के सचिव डी के मित्तल ने सोमवार को दिल्ली में एक समारोह के दौरान कहा, ‘‘मई अंत अथवा जून अंत तक हमारे सामने इस मामले में स्पष्ट तस्वीर उभरकर सामने आ जाएगी कि किस बैंक को पूंजी चाहिए और कितनी पूंजी दी जानी है।’’

मित्तल ने प्रमुख उद्योग संगठन, सीआईआई के एक कार्यक्रम में मीडिया से अलग से बातचीत करते हुए कहा, ‘‘हमने कहा है कि सार्वजनिक क्षेत्र के सभी बैंकों में शेयर पूंजी यानी टियर-एक पूंजी नौ फीसदी होनी चाहिए और भारतीय स्टेट बैंक की ऐसी पूंजी 11 फीसदी तक होनी चाहिए। यही हमारी रणनीति है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘बैंकों को पूंजी उपलब्ध कराने का जो प्रावधान रखा गया है, वह संसद में बजट पारित होने के बाद ही उपलब्ध होगा।’’ सरकार ने इस साल के बजट में बैंकों की वित्तीय स्थिति को मजबूत बनाने के लिये 15,888 करोड़ रुपए मुहैया कराने का प्रस्ताव किया है। इससे पहले सरकार ने पिछले वित्त वर्ष 2011-12में 12,000 करोड़ रुपए की पूंजी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को उपलब्ध कराई।

इससे बैंकों को मार्च 2012 तक टियर-एक पूंजी यानी शेयर पूंजी कुल देनदारियों का आठ फीसदी तक रखने में मदद मिली। इसके साथ ही बैंकों में सरकार की इक्विटी हिस्सेदारी को बढ़ाकर 58 फीसदी पर लाने में भी सफलता मिली। बैंकों को सरकारी पूंजी उपलब्ध कराने के मामले में स्टेट बैंक को 7900 करोड़ रुपये दिए गए। इसके एवज में बैंक ने सरकार को 3.65 करोड़ इक्विटी शेयर 2191.69 रुपए प्रति शेयर के मूल्य पर जारी किए।

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