कमोडिटी एक्सचेंजों के लिए 2011 का साल काफी अच्छा रहा है। अप्रैल 2003 में फिर से शुरू किए गए कमोडिटी या जिंस एक्सचेंजों का कारोबार हर महीने नई ऊंचाइयां छू रहा है। जिंस एक्सचेंजों के इस शानदार प्रदर्शन में सबसे ज्यादा योगदान सर्राफा कारोबार का रहा है। इस साल सोने के भाव 2010 के 20,700 प्रति 10 ग्राम से बढ़कर 29,000 रुपए को पार कर गए। जिंस बाजार नियामक वायदा बाजार आयोग (एफएमसी) के एक वरिष्ठ अधिकारीऔरऔर भी

देश में अगले साल अप्रैल से नवंबर तक छठी आर्थिक गणना कराई जाएगी। आखिरी बार आर्थिक गणना वर्ष 2005 में की गई थी। छठी आर्थिक गणना से सरकार को विभिन सामाजिक आर्थिक विकास योजनाओं को शुरू करने के प्रभावों का जायजा लेने में मदद मिलेगी। छठी आर्थिक गणना के लिए राज्‍यों और केन्‍द्रशासित प्रदशों के आर्थिक व सांख्यिकी महानिदेशालय के सचिवों और निदेशकों के अखिल भारतीय सम्‍मेलन की शुरुआत मंगलवार को राजधानी दिल्ली में हुई। इसका उद्घाटनऔरऔर भी

खाद्य सुरक्षा विधेयक बुधवार को संसद बहस के पेश किया जाएगा। इस विधेयक को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने रविवार को मंजूरी दे दी थी। इसके आने के लिए कॉरपोरेट क्षेत्र व उससे जुड़े अर्थशास्त्रियों ने फिर हल्ला उठा दिया कि सरकार पर इससे सब्सिडी का बोझ 21,000 करोड़ रुपए बढ़ जाएगा और खजाने का संतुलन गड़बड़ा जाएगा। ऐसा ही हल्ला कई साल पहले राष्ट्रीय रोजगार गारंटी कानून लाते वक्त भी उठा था। लेकिन हकीकत यह है कि खजानेऔरऔर भी

बाजार और गिर गया। सेंसेक्स 204.26 अंक गिरकर 15,175.08 पर तो निफ्टी 68.90 अंक गिरकर 4544.20 पर पहुंच गया। सैंकड़ों शेयर और नीचे उतर गए। एनडीटीवी 24.75 रुपए, पुंज लॉयड 37.05 रुपए, सुज़लॉन एनर्जी 17.50 रुपए, 3आई इनफोटेक 12.10 रुपए, केईसी इंटरनेशनल 31.80 रुपए, ज़ी न्यूज़ 8.65 रुपए, फर्स्टसोर्स सोल्यूशंस 6.35 रुपए, क्विटेंग्रा सोल्यूशंस 1.91 रुपए, सूर्यचक्रा पावर 3.43 रुपए, रिलायंस पावर 70.15 रुपए, राज ऑयल 9.35 रुपए, एनएचपीसी 18.40 रुपए, डीबी कॉर्प 180.35 रुपए, श्रीगणेश ज्वेलरीऔरऔर भी

बीएसई में कल कुल 2950 प्रपत्रों या स्क्रिप्स में ट्रेडिंग हुई। इनमें से चार ने अब तक का ऐतिहासिक उच्चतम स्तर हासिल कर लिया। ये हैं – तिलक फाइनेंस, कृष्णा वेंचर्स, इंडियन ब्राइट और सुलभ इंजीनियर्स। ये चारों ही टी ग्रुप की कंपनियां हैं जिनमें कोई सट्टेबाजी नहीं चलती और 100 फीसदी डिलीवरी लेना जरूरी है। दूसरी तरफ कल 175 कंपनियों के शेयर अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए। इससे एक इशारा तो यहऔरऔर भी

घर-परिवार से लेकर काम-धंधे तक स्वार्थों की दुनिया फैली है। इनमें कुछ गिने-चुने लोग ही होते हैं जो आपकी परवाह करते हैं। ऐसे हमदर्द दोस्त बड़े नसीब वालों को ही मिलते हैं। इसलिए इनकी कद्र जरूरी है।और भीऔर भी