शेयर बाजार में चल रही मायूसी ने पूंजी बाजार के दूसरे हिस्से प्राइमरी बाजार में भी सन्नाटा फैला दिया है। चालू वित्त वर्ष 2011-12 में पूंजी बाजार में उतरनेवाली 22 कंपनियों ने आईपीओ (शुरुआती पब्लिक ऑफर) लाने का इरादा ही छोड़ दिया है। इसके साथ ही बड़े निवेशकों को सीधे खींचनेवाले क्यूआईपी (क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट) बाजार में भी एकदम मुर्दनी छा गई है। ब्रोकरेज फर्म एसएमसी ग्लोबल सिक्यूरिटीज के ताजा अध्ययन के मुताबिक जिन 22 कंपनियों नेऔरऔर भी

अनिल अंबानी समूह से जुड़ा रिलायंस म्यूचुअल फंड बीते वित्त वर्ष 2010-11 में देश का सबसे ज्यादा मुनाफा कमानेवाला म्यूचुअल फंड बन गया है। अभी तक यह गौरव एचडीएफसी म्यूचुअल फंड को हासिल था। म्यूचुअल फंडों के शीर्ष संगठन एम्फी (एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया) के आंकड़ों के मुताबिक 2010-11 में रिलायंस म्यूचुअल फंड का शुद्ध लाभ 261 करोड़ रुपए रहा है, जबकि एचडीएफसी म्यूचुअल फंड का शुद्ध लाभ इससे कम 242 करोड़ रुपए दर्ज कियाऔरऔर भी

शेयर बाजार की हालत तो अभी ऐसी ही लगती है जैसे वहां कोई तेजड़िया बचा ही न हो। कल और आज सुबह तक पूरी दुनिया के बाजारों की हालत बुरी रही। लेकिन भारत में हालत दुरुस्त थी और निफ्टी में कल के निचले स्तर के आसपास 4820 समर्थन मिल रहा था। बहुत से इंट्रा-डे ट्रेडर बढ़त के अंदेशे में लांग हो गए क्योंकि उनके टेक्निकल संकेतक बाजार के 4930 तक जाने का इशारा कर रहे थे। यकीननऔरऔर भी

उधर अण्णा हज़ारे ने चेतावनी दी कि अगर संसद के शीत सत्र में जन लोकपाल विधेयक को पारित नहीं कराया गया तो वे कांग्रेस के चुनाव खिलाफ प्रचार करेंगे, इधर कानून मंत्री सलमान खुर्शीद ने कह दिया कि सरकार संसद के शीतसत्र में यह विधेयक जरूर लाएगी। लेकिन उन्होंने कहा कि अगले चुनाव में क्या होना चाहिए, इस बारे में किसी की राय पर वह कोई प्रतिक्रिया व्यक्त करने नहीं जा रहे हैं। कांग्रेस के खिलाफ चुनावऔरऔर भी

शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एससीआई), भारत सरकार की महारत्न कंपनी। साल भर पहले उसका शेयर दहाड़ रहा था। 6 अक्टूबर 2010 को 202.50 रुपए की अट्टालिका पर था। लेकिन बीते हफ्ते शुक्रवार 30 सितंबर से सरकारी खबरों के आधार पर उसे ऐसा धुना जा रहा है कि कल 3 अक्टूबर को वह 74.50 रुपए की घाटी में जा गिरा। पिछले एक महीने में इसे 91.60 रुपए से 18.66 फीसदी तोड़कर 74.50 रुपए तक ले आया गया है।औरऔर भी

जिस तरह कमल-दंड पानी की सतह के साथ बढ़ने के बाद छोटा नहीं हो सकता, उसी तरह ज्ञान पाने के बाद हम किसी अज्ञानी की तरह चहक नहीं सकते। शायद इसीलिए कहते हैं कि ज्ञान ही दुख का मूल कारण है।और भीऔर भी