भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) के अनुसार 31 मार्च 2011 तक देश के 98.5% गांवों तक सार्वजनिक टेलीफोन पहुंच चुके थे। देश में कुल गांवों की संख्या 5.94 लाख है। इनमें से 5.85 लाख गांवों में सार्वजनिक फोन उपलब्ध हैं। हर सौ की आबादी में हिमाचल के गांवों में 70.23, पंजाब में 56.92, केरल में 53.25, हरियाणा में 51.23, तमिलनाडु में 48.92 और मध्य प्रदेश में 22.92 लोगों पर फोन है। सबसे कम फोन घनत्व बिहार मेंऔरऔर भी

भारत जापान से मंगाए डीजल इंजिन और गियर बॉक्स पर आयात शुल्क की दरों में भारी कटौती करेगा। ऐसा दोनों देशों के बीच हुए नए समझौते के तहत किया जाएगा। भारत और जापान के बीच व्यापक आर्थिक भागीदारी का नया समझौता (सीईपीए) सोमवार, 1 अगस्त 2011 से ही लागू हुआ है। समझौते के अनुसार जापान से आयातित डीजल इंजिन पर शुल्क को अगले छह साल में मौजूदा 12.5 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी कर दिया जाएगा, वहींऔरऔर भी

जो लोग विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की पूंजी के दम पर शेयर बाजार में तेजी की आस लगाए हुए हैं, उनके लिए बुरी खबर है। अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष 2011-12 में देश में एफआईआई निवेश घटकर मात्र 14 अरब डॉलर रह जाएगा। यह पिछले वित्त वर्ष 2010-11 में आए 30 अरब डॉलर के एफआईआई निवेश का आधा भी नहीं है। यह अनुमान और किसी का नहीं, खुद प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (पीएमईएसी) का है।औरऔर भी

तीन साल पुराने लेहमान ब्रदर्स के प्रेत ने हमारे निवेशकों व ट्रेडरों के मन को अभी तक अवांछित नकारात्मकता से भर रखा है। अमेरिका के ऋण संकट को यहां इतनी संजीदगी से देखा जा रहा था जैसे भारत व एशिया के निवेशकों ने ही अमेरिका को सारा उधार दे रखा हो और कोई भी संभावित डिफॉल्ट उनका धन स्वाहा कर देगा। यह निराशावाद की इंतिहा है और मेरी राय में अगर कोई निवेशक जोखिम नहीं उठा सकताऔरऔर भी

अमेरिका का ऋण संकट फिलहाल टल गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और अमेरिका की दोनों प्रमुख पार्टियों – डेमोक्रेट्स व रिपब्लिकन पार्टी के नेताओं के बीच सरकार की मौजूदा 14.3 लाख करोड़ डॉलर की ऋण सीमा को बढ़ाने पर सहमति हो गई है जिससे वह जरूरी भुगतान कर सकती है। यह भी तय हुआ है कि अमेरिकी सरकार अगले दस सालों में अपने खर्च में 2.4 लाख करोड़ डॉलर की कटौती करेगी। अब इस सहमति कोऔरऔर भी

अजंता फार्मा देश की दवा कंपनियों में धंधे के लिहाज 63वें नंबर पर है। छोटी कंपनी है। कुल बाजार पूंजीकरण 410 करोड़ रुपए का है। लेकिन काम जबरदस्त कर रही है। बीते हफ्ते गुरुवार, 28 जुलाई को उसने जून 2011 की तिमाही के नतीजे घोषित किए हैं। इनके मुताबिक इन तीन महीनों में उसकी बिक्री पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 29.52 फीसदी बढ़कर 98.29 करोड़ रुपए से 127.31 करोड़ रुपए और शुद्ध लाभ 79.51औरऔर भी

कमजोर, कायर, काहिल, नाकारा, हवाबाज़ कहलाना किसको अच्छा लगता है। गालियों जैसी चोट करते हैं ये शब्द। लेकिन अगर कोई कह रहा है तो कुछ तो होगा। थोड़ा ठहरकर सोचने में क्या हर्ज है?और भीऔर भी