बरसात के मौसम में जैसे आपकी कार को खास देखभाल की जरूरत होती है, ठीक वैसे ही ज्यादा से ज्यादा फायदे के लिए कार इंश्योरेंस में भी आपको खास सावधानियां बरतनी पड़ती हैं। बारिश का मौसम अपने साथ ताजगी के साथ कई तरह की मुसीबतें भी लेकर आता है। रास्ते पर जलभराव व गड्ढों की वजह से ट्रैफिेक जाम और एक्सीडेंट से वाहन मालिकों को दो-चार होना पड़ता है। इसलिए इस मौसम में आपको कार के साथऔरऔर भी

बहुत मुमकिन है कि आपने गांवों में कुंओं पर चलनेवाली रहट नहीं देखी होगी। मेरे देश की धरती सोना उगले, उगले हीरे-मोती जैसे पुराने गानों में देख सकते हैं। एक चक्र में चलती है रहट। खाली कूप नीचे जाता है और पानी भरकर ऊपर आ जाता है। नीचे जाकर मूल्यवान बनने का ऐसा ही चक्र हमारे शेयर बाजार में भी चलता है। हां, यहां रहट एक जगह टिकी नहीं रहती, बल्कि वह भी कंपनी का मूल्य बढ़नेऔरऔर भी

दया, ममता व करुणा किसी और के कल्याण से ज्यादा अपनी संतुष्टि के भाव हैं। इसलिए दीन-हीन और कमजोर बनकर दुनिया नहीं जीती जा सकती। अपनी दुनिया औरों के भरोसे नहीं चल सकती।और भीऔर भी

रिजर्व बैंक ने इस साल की मौद्रिक नीति में कहा था कि दूसरी छमाही यानी सितंबर 2011 के बाद से मुद्रास्फीति में कमी आनी शुरू हो जाएगी। लेकिन अब वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी कह रहे हैं कि यह दिसंबर के अंत तक ऊंची ही बनी रहेगी। वित्त मंत्री ने चुनिंदा अखबारों के संवाददाताओं को भेजे गए बयान में कहा है कि मुद्रास्फीति के ज्यादा रहने से निजी निवेश पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। उनका कहना है,औरऔर भी

अमेरिकी अर्थव्यवस्था ठहराव की शिकार हो चुकी है, जबकि चीन व भारत की अर्थव्यवस्थाएं तेजी से बढ़ रही हैं और इन देशों का मध्यवर्ग भी तेजी से बढ़ रहा है। इसलिए अमेरिकी कंपनियां अपने देश की सरहदें फलांग कर चीन व भारत के मध्यम वर्ग को पकड़ना चाहती हैं। खुद अमेरिकी सरकार ने अपनी कंपनियों से इन देशों के बढ़ते मध्यम वर्ग का फायदा उठाने को कहा है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार मामलों के वाणिज्य उपमंत्री फ्रांसिस्को सांचेज नेऔरऔर भी

टीसीएस और इनफोसिस के बाद देश की तीसरी सबसे बड़ी आईटी कंपनी विप्रो ने चालू वित्त वर्ष 2011-12 की पहली यानी जून तिमाही में कंसोलिडेटेड आधार पर 1334.9 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ कमाया है जो जून 2010 की तिमाही के शुद्ध लाभ 1318.6 करोड़ रुपए से 1.24 फीसदी ज्यादा है। लेकिन इसी दौरान उसकी आय 18.35 फीसदी बढ़कर 7236.4 करोड़ रुपए से 8564 करोड़ रुपए पर पहुंच गई। अगर स्टैंड-एलोन नतीजों की बात करें तो जूनऔरऔर भी

बाजार खुलते ही निफ्टी 5645 तक चला गया। लेकिन बड़ी साफ वजहों से खुद को इस स्तर पर टिकाए नहीं रख सका और धड़ाधड़ 5555 तक गिर गया। बंद हुआ है 0.83 फीसदी की गिरावट के साथ 5567.05 पर। ट्रेडर भौचक और भ्रमित हैं। उनका वही पुराना सवाल है कि बाजार इस तरह आखिर गिरा क्यों? तो प्यारे! यह रोलओवर की पुरानी तकलीफ है। इस डेरिवेटिव सेटलमेंट की एक्सपायरी में सिर्फ सात दिन बचे हैं। इस बीचऔरऔर भी

ल्यूपिन लिमिटेड नाम से कुछ भी लगे। लेकिन है यह खांटी देसी कंपनी। केमिस्ट्री में एमएससी करनेवाले देशबंधु गुप्ता ने 1968 में इसकी स्थापना की। बताते हैं कि गुप्ता जी शुरुआत में अंतरराष्ट्रीय पेटेंट के जमाने में जाली दवाएं बनाकर बेचते थे। लेकिन 1970 में भारतीय पेटेंट एक्ट आ गया। फिर गुप्ता जी को वाल्मीकि के अंदाज में समझ में आ गया है कि गलत धंधा करने में फायदा नहीं और वे कुशल सारथी व उद्यमी कीऔरऔर भी

खुद कोई अपने संदर्भ में कैसे गलत हो सकता है? नाक कैसे बता सकती है कि वह टेढ़ी है? दूसरों का संदर्भ ही बताता है कि हम सही हैं या गलत। इसलिए, खुद को हमेशा दूसरों के नजरिए से देखना चाहिए।और भीऔर भी

कृषि मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2010-11 में देश में खाद्यान्नों का कुल उत्पादन 24.156 करोड़ टन रहा है। यह पिछले साल के उत्पादन 21.811 करोड़ टन से 10.75% अधिक है। खाद्यान्न उत्पादन का पिछला रिकॉर्ड 2008-09 में 23.447 करोड टन का था। इस बार 8.592 करोड़ टन गेहूं और 1.809 करोड़ टन दालों का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है। इसी तरह मोटे अनाज, मक्का, उड़द, मूंग, चना, तिलहन व सोयाबीन में इस बार सर्वाधिक उत्पादन हुआऔरऔर भी