देश की अर्थव्यवस्था में 14.36 फीसदी, लेकिन रोजगार में 60 फीसदी से ज्यादा योगदान देनेवाली कृषि की किस्मत मानसून पर निर्भर है। साल भर की कुल बरसात का 80 फीसदी हिस्सा जून से सितंबर तक मानसून के चार महीनों में बरसता है। मानसून खराब तो कृषि खराब। कृषि खराब तो मांग का टोंटा और खाद्य पदार्थों की कीमत में आग। फिर उसे थामने के लिए ब्याज दरें बढ़ाने का चक्र। मानसून से अनाज व नकदी फसलों केऔरऔर भी

चालू सीजन के दौरान सामान्य से कम मानसून के अनुमान पर आशंकाओं को खारिज करते हुए वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा है कि ये अनुमान केवल एक आभास भर हैं। मुखर्जी ने बुधवार को मानसून से जुड़े सवाल पर संवाददाताओं को बताया, ‘‘हमें कुछ समय और इंतजार करना चाहिए।’’ भारतीय मौसम विभाग ने कल कहा था कि मानसून दीर्घकालिक अवधि के औसत का 95 फीसदी रहने की संभावना है जो सामान्य से कम है। सामान्य सेऔरऔर भी

सरकार ने डीम्ड निर्यात नीति के दुरुपयोग को रोकने और इसमें जरुरी सुधार के लिए सभी संबद्ध पक्षों से सुझाव मांगे हैं। सरकार को इस नीति के दुरूपयोग की रिपोर्टें बराबर मिल रही हैं, विशेषकर ऊर्जा क्षेत्र में। डीम्ड निर्यात ऐसा कारोबार है जिसमें वस्तुओं को देश से बाहर नहीं भेजा जाता है, बल्कि इसका इस्तेमाल देश में ही होता है। इस प्रकार के सौदों के लिए भुगतान भी किसी भी मुद्रा में किया जा सकता है।औरऔर भी

केंद्र सरकार ने चालू वित्त वर्ष 2011-12 के पहले दो महीनों में दलहन की खेती करने वाले 60,000 वर्षा आधारित गांवों को प्रोत्‍साहित करने के लिए विभिन्‍न राज्‍यों को 109.9 करोड़ रुपए जारी कर दिए हैं। इसमें गुजरात, मध्य प्रदेश और तमिलनाडु को कोई रकम नहीं दी गई गै। यह कार्यक्रम राष्‍ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाई) का हिस्‍सा है, जिसके लिए 300 करोड़ रुपए निर्धारित किए गए हैं। आवंटित और जारी की गई रकम (करोड़ रुपए में)औरऔर भी

गांधीवादी सामाजिक कार्यकर्ता अण्णा हज़ारे के पक्ष ने अपने जन लोकपाल विधेयक में फोन टैप करने, अनुरोध पत्र जारी करने और भ्रष्टाचार कम करने के लिए कामकाज के तरीकों में बदलाव लाने की सिफारिशें करने संबंधी अधिकार लोकपाल को देने का जिक्र किया है जबकि सरकार के मसौदे में ऐसे किसी भी प्रावधान का जिक्र नहीं है। दोनों मसौदों पर विचार के लिए सरकार ने 3 जुलाई को सर्वदलीय बैठक बुलाई है। हज़ारे पक्ष ने लोकपाल विधेयकऔरऔर भी

केयर्न इंडिया ने बड़े सभ्य अंदाज में कहा है कि सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी ओएनजीसी ने संभवतः कृष्णा गोदावरी बेसिन के केजी डीडब्ल्यूएन-98:2 ब्लॉक में प्राकृतिक गैस भंडारों को बढा-चढाकर बताया है। दूसरे शब्दों में केयर्न इंडिया का आरोप है कि ओएनजीसी ने गैस भंडार के बारे में झूठ बोला था, हवाबाजी की थी। यह ब्लॉक रिलायंस इंडस्ट्रीज के केजी-डी6 ब्लॉक के पास ही है। केयर्न इंडिया ने केजी डीडब्ल्यूएन-98:2 ब्लॉक में चार खोज की थीं औरऔरऔर भी

बाजार पूरे लहरिया अंदाज में चला। सेंसेक्स हल्का-सा गिरा। निफ्टी हल्का-सा बढ़ा। यह फर्क है सेंसेक्स के 30 और निफ्टी के 50 का। इसलिए आवाजें उठ रही हैं कि कम से कम सेंसेक्स का आधार बढ़ा दिया जाए क्योंकि वो बाजार का सही प्रतिनिधित्व नहीं करता। सेंसेक्स में कम से कम 100 कंपनियां तो होनी चाहिए। खैर, फिलहाल बाजार में शोर है कि निफ्टी 4800 की तरफ जा रहा है। जब तक बिकवाली की लहर उतरती नहीं,औरऔर भी

एडीएफ फूड्स छोटी-सी कंपनी है। 20.38 करोड़ रुपए की पूंजी है जो दस रुपए अंकित मूल्य के शेयरों में बंटी है। बाजार पूंजीकरण कोई खास नहीं, 126 करोड़ रुपए है। इसलिए स्मॉल कैप में गिनी जाती है। लेकिन काम जबरदस्त करती है। भारतीय स्वाद की मास्टर है। अचार, चटनी व मसालों से लेकर फ्रोजन फूड तक बनाकर निर्यात करती है। अशोका, कैमल, एयरोप्लेन, खानखामा, ट्रूली इंडियन और सोल इसके ब्रांड हैं। 95 फीसदी कमाई मध्य-पूर्व, अमेरिका, यूरोपऔरऔर भी

कोई काम अनंत समय तक नहीं टाला जा सकता। शुरुआत कभी तो करनी ही होगी क्योंकि आदर्श हालात कभी नहीं बनते, शुभ घड़ी कभी नहीं आती। जब भी शुरू कर दें, घड़ी टिक-टिकाने लगेगी।और भीऔर भी