बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) ने हिमाचल फ्यूचरिस्टिक कम्युनिकेशंस (एचएफसीएल) को बीएसई-500 और बीएसई स्मॉल-कैप सूचकांक से निकाल बाहर किया है। लेकिन खुद को ज्यादा तेजतर्रार व प्रोफेशनल बतानेवाले नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ने इस कंपनी को अब भी एस एंड पी सीएनएक्स-500 जैसे सम्मानित सूचकांक में शामिल कर रखा है, जबकि करीब दो हफ्ते पहले उसे उसकी इस ‘लापरवाही’ की सूचना मीडिया की तरफ से दी जा चुकी है। हालांकि एनएसई ने तब इस बाबत पूछे गए सवालऔरऔर भी

राजा की गिरफ्तारी क्या हुई, अचानक भारत के प्रति एफआईआई का प्यार उमड़ आया है। इस साल अब तक वे लगभग हर दिन बेचते रहे हैं। लेकिन आज उन्होंने 538.71 करोड़ रुपए की शुद्ध खरीद की है। होता है। कभी-कभी ऐसा होता है कि इंसान को अचानक हकीकत देखकर अपना रुख पलट देना पड़ता है। एफआईआई ने भी ऐसा ही किया है। वे अब कहने लगे हैं कि भारतीय बाजार में मूल्यांकन काफी आकर्षक है, इसलिए खरीदऔरऔर भी

प्याज के साथ-साथ अब फाइबर, खनिज, पेट्रोल, एलपीजी और डीजल भी महंगाई में पलीता लगाने लग गए हैं। सरकार के ताजा आंकड़ों के अनुसार 22 जनवरी 2011 को समाप्त सप्ताह में प्याज की थोक कीमतें साल भर पहले की तुलना में जहां 130.41 फीसदी बढ़ी हैं, वहीं फाइबर 47.13 फीसदी, खनिज 16.70 फीसदी, पेट्रोल 30.75 फीसदी, एलपीजी 14.99 फीसदी और डीजल के दाम 14.71 फीसदी बढ़ गए हैं। कुल मिलाकर 22 जनवरी को खत्म हफ्ते में खाद्यऔरऔर भी

18 फरवरी, शुक्रवार को यूटीआई एसेट मैनेजमेंट कंपनी के चेयरमैन व प्रबंध निदेशक यू के सिन्हा पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी के नए चेयरमैन बनने जा रहे हैं। लेकिन लगता है कि उनके स्वागत की तैयारियों में सेबी ने अभी से ही म्यूचुअल उद्योग के प्रति अपना नजरिया बदलना शुरू कर दिया है। कम से कम वह यह दिखाने की कोशिश में है कि उसने हमेशा म्यूचुअल फंड उद्योग का भला सोचा है और अब भी उसकेऔरऔर भी

बाजार जब तलहटी पर पहुंचा हो तब अच्छे स्टॉक्स के चयन के लिए ज्यादा मगजमारी या रिसर्च की जरूरत नहीं होती। नजर डालें कि कौन-कौन से शेयर अपने न्यूनतम स्तर पर पहुंचे हैं। देखें कि वह कंपनी कितनी जानी पहचानी है, थोड़ा-सा उसका धंधा-पानी देख लें और दांव लगा दें। कल अनिल अंबानी समूह की दो प्रमुख कंपनियां रिलायंस कैपिटल और रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर 52 हफ्ते के न्यूनतर स्तर पर पहुंच गईं। इनमें से रिलायंस कैपिटल में निवेशऔरऔर भी

ट्यूब पर कठोर टायर न लगाया जाए तो गाड़ी चल नहीं सकती। कछुए की कठोर खोल न हो, शाही के लंबे काँटे न हों तो कोई भी उन्हें खा जाए। इसी तरह समाज में बहुत सीधा होना भी अच्छा नहीं।और भीऔर भी