बोफोर्स का भूत एक बार फिर कांग्रेस के पीछे पड़ गया लगता है। एक आयकर ट्राइब्यूनल ने कहा है कि होवित्जर तोप सौदे में दिवंगत विन चड्ढा और इटली के व्यापारी ओत्तावियो क्वात्रोच्चि को 41 करोड़ रुपए की रिश्वत दी गई थी और ऐसी आमदनी पर भारत में उन पर कर देनदारी बनती है। आयकर अपीली ट्राइब्यूनल ने 98 पृष्ठों के आदेश में कहा कि इस संबंध में निष्क्रियता से यह अनचाही धारणा बन सकती है किऔरऔर भी

मुद्रास्फीति की ऊंची दरों के चलते अब डीजल के दाम बढ़ाने का फैसला अगले वित्त वर्ष तक टाला जा सकता है। यह कहना है कि प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के चेयरमैन सी रंगराजन का। उन्होंने समाचार एजेंसी प्रेस ट्रस्ट को बताया कि, “शायद मार्च 2011 तक अगर मुद्रास्फीति की दर 6 फीसदी के आसपास आ जाती है तो उस वक्त संभवतः डीजल के मूल्यों को बढ़ाया जा सकता है।” पिछले हफ्ते इस मुद्दे पर वित्त मंत्रीऔरऔर भी

सिटी बैंक में 300 करोड़ रुपए की अनुमानित धोखाधड़ी का मुख्य अभियुक्त शिवराज पुरी लोगों व कंपनियों से जुटाई गई ज्यादातर रकम शेयर बाजार के डेरिवेटिव सौदों में लगाता था। गुड़गांव पहुंची सेबी की दो सदस्यीय टीम ने पुरी के निवेश के पैटर्न को जांचने के बाद यह पता लगाया है। इस बीच सोमवार को इस मामले में पुलिस ने हीरो समूह के एक वरिष्ठ अधिकारी संजय गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया। हीरो समूह की इकाई हीरोऔरऔर भी

2010 में बाजार से तेज रफ्तार से भागने वाले स्टॉक्स को भूल जाओ। वो साल पीछे छूट चुका है। अब तो साल 2011 में बाजार को पछाड़ने वाले नए दबंग स्टॉक्स बनेंगे। इस साल मंच संभालने वाले सेक्टर होंगे – इंफ्रास्ट्रक्चर, रीयल्टी, कंज्यूमर ड्यूरेबल, चाय और फर्टिलाइजर। निफ्टी 5700 तक नीचे जाने के बाद वापस 6200 के करीब पहुंच चुका है जहां से उसकी नई ऊंचाई ज्यादा दूर नहीं है। आखिर निफ्टी इतनी तेजी से नई ऊंचाईऔरऔर भी

नए साल का पहला कारोबारी सत्र। आपके लिए क्या पेश करूं? उलझन में हूं। सोचता हूं निवेश के माध्यमों में सबसे ज्यादा जोखिम शेयरों में है तो क्यों न साल की शुरुआत सुरक्षा के बजाय भरपूर जोखिम से की जाए। पहले ही दिन बहुत बच-बचकर क्यों चला जाए! तो ऐसा शेयर जो 36.53 के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा है। इतने पी/ई का कोई भी शेयर महंगा ही कहा जाएगा। लेकिन जब पूरा सेक्टर तेजी सेऔरऔर भी

चोर के लिए पीछे पड़ी भीड़ से बचने का सबसे अच्छा तरीका है कि वह खुद भी चोर-चोर का शोर मचाने लग जाए और भीड़ में खप जाए। इसलिए हमें नेताओं के शोर का मर्म समझना होगा।और भीऔर भी