शेयरों के डेरिवेटिव सौदों में फिजिकल सेटलमेंट की व्यवस्था अपनाने पर महीने भर के भीतर अंतिम फैसला हो जाएगा। यह कहना है पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी के चेयरमैन सीबी भावे। वे गुरुवार को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) में सर्टिफिकेशन एक्जामिनेशन फॉर फाइनेंशियल एडवाइजर्स (सीएफए) के लांचिंग समारोह के दौरान मीडिया से बात कर रहे थे। उनका कहना था, “स्टॉक एक्सचेंजों के साथ तमाम मसलों पर विमर्श हो चुका है और महीने भर के भीतर अंतिम फैसलाऔरऔर भी

साल 2009 के अंत तक देश में सक्रिय गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) की संख्या 33 लाख थी। कुल आबादी 120 करोड़ मानें तो हर 365 भारतीय पर एक एनजीओ। इसमें केवल पंजीकृत एनजीओ शामिल हैं। सीधा-सा मतलब है कि देश में अवाम से जुड़ने का एक बड़ा तंत्र सरकार के समानांतर बन चुका है। सबसे ज्यादा 4.8 लाख एनजीओ महाराष्ट्र में हैं। इसके बाद आंध्र प्रदेश में 4.6 लाख, उत्तर प्रदेश में 4.3 लाख, केरल में 3.3 लाख,औरऔर भी

पिछले तीन महीनों में वीसा स्टील का शेयर 45 रुपए से करीब 15% घटकर 38 रुपए के आसपास आ गया है। 7 अप्रैल 2010 को यह ऊपर में 45.80 और नीचे में 43.70 तक जाने के बाद 44.15 रुपए पर बंद हुआ था। कल 7 जुलाई 2010 को इसका बंद भाव बीएसई में 38.55 और एनएसई में 38.40 रुपए रहा है। सवाल उठता है कि क्या ढलान पर लुढकते इस शेयर से पैसा बनाया सकता है? जानकारऔरऔर भी

अपने को जानने-समझने के लिए दूसरे को जानना समझना जरूरी है। दूसरे के प्रति आप कितने संवेदनशील हैं, इसी से आपकी संवेदनशीलता का पता चलता है। वरना, अपने प्रति तो हर कोई संवेदनशील होता है।और भीऔर भी

दो साल पुराने वैश्विक वित्तीय संकट के बाद बैंकिंग व फाइनेंस क्षेत्र के निवेश को सबसे ज्यादा जोखिम भरा माना जाने लगा है। लेकिन हमारे म्यूचुअल फंडों ने अपना सबसे ज्यादा निवेश इसी क्षेत्र की कंपनियों के शेयरों में कर रखा है। पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी को एम्फी (एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया) के मिली जानकारी के मुताबिक मई अंत तक  म्यूचुअल फंडों ने अपनी कुल आस्तियों का 14.14 फीसदी हिस्सा बैंकों और 5.01 फीसदीऔरऔर भी

जब आप दुखी होकर बताते हैं कि बजाज हिंदुस्तान का शेयर ठीक से नहीं चला और नतीजतन नुकसान उठाना पड़ा, तब हमें आपकी ट्रेडिंग के तरीके को लेकर अफसोस होता है। एक बात हमेशा ध्यान रखे कि ए ग्रुप की ट्रेडिंग कोई विज्ञान नहीं है और उद्योग के महारथी तक इसमें घाटा उठाते हैं। इसलिए इसमें हमेशा स्टॉप लॉस लगाकर चलना चाहिए। लेकिन हमें इससे भी ज्यादा अफसोस तब होता है जब आप श्राडेर डंकन जैसे स्टॉकऔरऔर भी

गंजे को कंघी का क्या जरूरत और बच्चों को जीवन बीमा की क्या जरूरत? लेकिन जीवन बीमा कंपनियां अभी तक यूलिप के जरिए ऐसा ही करती रही हैं। खरीदनेवाला शुरू में एजेंट के झांसे में रहता है कि कैसे कुछ साल तक दिया गया 25-30 हजार रुपए का सालाना प्रीमियम बच्चे के बड़े होने पर एक-डेढ़ करोड़ में बदल जाएगा। बाद में होश आता है कि अरे, यह तो हमारे बच्चे का जीवन नहीं, मृत्यु बीमा बेचकरऔरऔर भी

देश की आधी से ज्यादा आबादी के दूरसंचार सेवाओं से जुड़ जाने के बावजूद इंटरनेट की पहुंच अभी तक बहुत सीमित है। ब्रॉडबैंड कनेक्शन की संख्या महज 92.4 लाख है। लेकिन ऑनलाइन सेवाओं का चलन बढ़ रहा है। 10 फीसदी टैक्स-रिटर्न ऑनलाइन भरे जा रहे हैं। रेलवे से लेकर प्लेन तक के 40 फीसदी टिकट ऑनलाइन बुक किए जा रहे हैं। महानगरों में लोग सालोंसाल अपनी बैंक शाखा का मुंह तक नहीं देखते। शेयरों के बाद अबऔरऔर भी

एनएमडीसी (नेशनल मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन) का बड़ा सीधा-सा हिसाब-किताब है। देश की सबसे बड़ी खनन कंपनी है। 90 फीसदी पूंजी सरकार की लगी है। एलआईसी ने 5 फीसदी लगा रखा है। विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने केवल 0.15 फीसदी लगा रखा है। बाकी अन्य निवेश संस्थाओं और जनता-जनार्दन के पास है। लेकिन इस जनता-जनार्दन के पास इसके केवल 1.18 फीसदी शेयर हैं। यानी, पब्लिक की कंपनी में पब्लिक ही नदारद है! आपको याद होगा कि इस सालऔरऔर भी

दिमाग भी क्या स्वामिभक्त और जिद्दी किस्म का जीव है! जिस ढर्रे पर चला दो, चलता ही रहता है। जिस काम में लगा दो, बिना पूरा किए मानता ही नहीं। आप सो जाते हो, लेकिन इस बेचैन आत्मा को चैन नहीं पड़ता।और भीऔर भी