भाई लोगों ने नतीजे घोषित होने से पहले महिंद्रा सत्मय की क्या धुनाई की है? बीएसई में यह शेयर खुला पहले से बढ़कर 87 रुपए पर। दोपहर साढ़े बारह बजे तक 88.40 रुपए तक पहुंच गया। शेयर कमोबेश इसी दायरे में चल रहा था कि अचानक पौने दो बजे के आसपास खिलाड़ी लोग इसे गिराकर 81.90 रुपए तक ले गए। फिर तो शाम को बाजार की समाप्ति तक यह दबा-दबा ही रहा और बंद हुआ शुक्रवार केऔरऔर भी

लोकसभा में सोमवार को एक तरफ विपक्ष भ्रष्टाचार के मुद्दे पर संयुक्त संसदीय समिति बनाने की मांग कर रहा था, वहीं दूसरी तरफ वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने उसके हंगामे की परवाह न करते हुए चालू वित्त वर्ष 2010-11 के आम बजट के अनुदान की अनुपूरक मांगें पेश कीं। वित्त मंत्री ने सदन को बताया कि सरकार को इस बार खर्चों के लिए बजट के ऊपर से 44,945.52 करोड़ रुपए चाहिए। इसमें से 25,132.55 करोड़ रुपए तोऔरऔर भी

देश की 1.44 लाख बस्तियों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध नहीं है। यह जानकारी खुद केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री सी पी जोशी ने दी है। उनके मुताबिक एक अप्रैल 2010 तक देश की 1.44 लाख बस्तियों के पेयजल में फ्लोरीन, लवण, लोहा, आर्सेनिक या नाइट्रेट की अत्यधिक मात्रा पायी गई है। इसमें 26,131 बस्तियों के पेयजल में अत्यधिक फ्लोरीन, 28,398 बस्तियों में अत्यधिक लवण, 79,955 बस्तियों में अत्यधिक लोहा, 6548 बस्तियों में अत्यधिक आर्सेनिक और 3032 बस्तियों मेंऔरऔर भी

हर किसी को पता था कि अमेरिका राष्ट्रपति बराक ओबामा दक्षिण कोरिया के साथ किसी मुक्त व्यापार समझौते पर दस्तखत नहीं करने जा रहे हैं। लेकिन एफआईआई ने एक तरफ से 200 करोड़ डॉलर के शेयर बेच डाले और कोरिया का बाजार 3 फीसदी लुढ़क गया। हो सकता है कि बाजार को अंदेशा रहा हो कि बीते सप्ताहांत सोल में जी-20 शिखर सम्मेलन की सफल समाप्ति के बाद कोरिया ब्याज दरों में चौथाई फीसदी की वृद्धि करऔरऔर भी

सत्यम कंप्यूटर सर्विसेज का नाम भारतीय कॉरपोरेट जगत के इतिहास में काले अक्षरों से लिखा जा चुका है। लेकिन यह नाम अब खुद धीरे-धीरे मिटता जा रहा है। अभी महिंद्रा सत्यम बना है। साल-छह महीने में पूरी की पूरी कंपनी टेक महिंद्रा में विलीन हो सकती है। लेकिन आज का दिन बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि महिंद्रा सत्यम राजू की प्रेतछाया से पूरी तरह मुक्त होने के बाद आज चालू वित्त वर्ष की पहली दो तिमाहियों (जून वऔरऔर भी

समय का अपना चक्र होता है। जो इसे पकड़ नहीं पाते, इसके हिसाब से चल नहीं पाते, वे जीवन की बहुत सारी खुशियों से महरूम रह जाते हैं। देर से सोकर उठनेवाले कभी भी सूर्योदय का आनंद नहीं उठा पाते।और भीऔर भी