दुनिया के जानेमाने अरबपति निवेशक जॉर्ज सोरोस भारत के सबसे पुराने स्टॉक एक्सचेंज बीएसई में इक्विटी हिस्सेदारी खरीदने की कोशिश में लगे हैं। अंतरराष्ट्रीय समाचार पत्र फाइनेंशियल टाइम्स की एक ताजा खबर के मुताबिक सोरोस बीएसई में दुबई होल्डिंग्स की 4 फीसदी इक्विटी खरीदेंगे। इसके लिए वे 4 करोड़ डॉलर देने को तैयार हैं। इस आधार पर बीएसई का मूल्यांकन 100 करोड़ डॉलर का निकलता है। सेबी के नियमों के मुताबिक कोई एक विदेशी निवेशक देश केऔरऔर भी

रिजर्व बैंक से उधार लेना 0.25 फीसदी महंगा होने के एक दिन बाद ही बैंकों में लोगों से ज्यादा डिपॉजिट खींचने की होड़ शुरू हो गई है। पहल की है निजी क्षेत्र के दो बैंकों ने। एचडीएफसी बैंक ने 30 जुलाई से अलग-अलग अवधि की एफडी (फिक्स्ड डिपॉजिट) पर ब्याज की दर 0.25 फीसदी से लेकर 0.75 फीसदी तक बढ़ा दी हैं। वहीं दक्षिण भारत में सक्रिय अपेक्षाकृत छोटे, पर तेजी से उभरते लक्ष्मी विलास बैंक नेऔरऔर भी

बाजार में गिरावट आई तो इसकी मुख्य वजह यह है कि डेरिवेटिव सौदों के रोलओवर ज्यादा नहीं हो रहे हैं। कारोबारियों को चिंता है कि निफ्टी 5450 के स्तर को कायम नहीं रख पा रहा है। लेकिन यह तात्कालिक असर है। हम बाजार में इस तरह की पस्ती व घबराहट एक दिन और देख सकते हैं। गिरावट से ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं है। लेकिन अगर आप और ज्यादा करेक्शन/गिरावट के अंदेशे में शॉर्ट सौदे करऔरऔर भी

रिजर्व बैंक अभी तक हर तीन महीने पर मौद्रिक नीति की समीक्षा पेश करता रहा है। लेकिन अब वह हर डेढ़ महीने/छह हफ्ते पर ऐसा करेगा। हां, बैंकरों के साथ बैठक और प्रेस कांफ्रेंस पहले की तरह साल भर में अप्रैल, जुलाई, अक्टूबर और जनवरी में चार बार ही होगी। 2005 तक रिजर्व बैंक साल में केवल दो बार अप्रैल व अक्टूबर में मौद्रिक नीति पेश करता था। अमेरिका का केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व भी हर छहऔरऔर भी

पहले इसका नाम जिंदल स्टेनलेस स्टील था। 2008 में इसके जेएसएल बनाया गया और फिर मई 2010 में इसे जेएसएल स्टनेलेस लिमिटेड (बीएसई कोड – 532508, एनएसई कोड – जेएसएल) कर दिया गया है। इक्रा ऑनलाइन की एक रिसर्च रिपोर्ट बताती है कि यह देश में स्टेनलेस स्टील बनानेवाली सबसे बड़ी कंपनी है। घरेलू स्टेनलेस स्टील बाजार में उसकी हिस्सेदारी लगभग 40 फीसदी है। उसकी छह भारतीय और 11 विदेशी सब्सिडियरियां हैं। कंपनी के दो रुपए अंकितऔरऔर भी

हर कोई अपनी-अपनी दुनिया में मस्त है। हम भी हैं। इसमें क्या बुराई! लेकिन यह तो पता होना चाहिए कि दुनिया की किन चीजों ने हमारी दुनिया को अपनी जद में ले रखा है। टिटिहरी या शुतुरमुर्ग जैसा भ्रम क्यों?और भीऔर भी