वित्त वर्ष 2010-11 में अप्रैल से जून की तिमाही का एडवांस टैक्स भरने की आखिरी तारीख सरकार के लिए अच्छा संकेत लेकर आई है। आयकर विभाग के सूत्रों के मुताबिक इस बार ज्यादातर कंपनियों ने पहले से कई गुना अधिक टैक्स जमा कराया है। देश में निजी क्षेत्र की सबसे बड़ी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज ने इस साल पहली तिमाही में 653 करोड़ रुपए का एडवांस टैक्स जमा कराया है, जबकि पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही मेंऔरऔर भी

आईओएल नेटकॉम देश में आईपीटीवी (इंटरनेट प्रोटोकॉल टेलीविजन) और वीओडी (वीडियो ऑन डिमांड) सेवा शुरू करनेवाली पहली कंपनी है। आईपीटीवी सेवा वह एमटीएनएल के लिए मुंबई और कोलकाता में उपलब्ध कराती है। वह ब्रॉडबैंड से लेकर म्यूजिक ऑन डिमांड, ई-लर्निंग, ई-कॉमर्स वगैरह में भी अपने पैर फैला रही है। लेकिन इसी सारे विस्तार के बीच उस पर रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) की नजर पड़ गई है। बाजार में जबरदस्त चर्चा उठी हुई है कि मुकेश अंबानी टेलिकॉम क्षेत्रऔरऔर भी

शेयर बाजार बढ़त पर है। निफ्टी 4800 से 5200 अंक पर आ गया है और अब सारा कुछ उसी तरह हो गया है जैसी मैंने उम्मीद जताई थी। मैं स्वभाव से अपनी स्थिति बदलने में काफी धीमा रुख रखता हूं और इसलिए चाहता हूं कि बाजार का गुबार थोड़ा और ठंडा पड़ जाए। मैंने संस्थागत निवेशकों की अपनी डेस्क को अब सलाह दे दी है कि वे हर बढ़त पर मुनाफा वसूली करें और वे ऐसा करऔरऔर भी

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीईए) ने मंगलवार को अपनी बैठक में दो प्रमुख सरकारी खनन कंपनियों कोल इंडिया और हिंदुस्तान कॉपर के विनिवेश को हरी झंडी दे दी। लेकिन तय हुआ है कि कोल इंडिया में कोई नए शेयर नहीं जारी किए जाएंगे और सरकार की 10 फीसदी हिस्सेदारी ही बेची जाएगी, जबकि हिंदुस्तान कॉपर में 10 फीसदी सरकारी इक्विटी बेचे जाने के साथ-साथ 10 फीसदी नए शेयर जारी किएऔरऔर भी

जीएमआर इंफ्रास्ट्रक्चर का एक रुपए का शेयर अभी बीएसई में 55.35 रुपए और एनएसई में 55.40 रुपए चल रहा है। वित्त वर्ष 2009-10 के नतीजों के मुताबिक उसकी प्रति शेयर कमाई (ईपीएस) महज 4 पैसे है। इस आधार पर उसका पी/ई अनुपात 691.88 निकलता है। फिर भी इसमें तूफान के आसार हैं। एनएसई में कल इसके 30.52 लाख शेयरों में सौदे हुए हैं, जबकि बीएसई में औसत से थोड़ा-सा ज्यादा 4.44 लाख शेयरों में। जानकार बताते हैंऔरऔर भी

मन में कोई ख्याल तभी आता है जब बाहर के संसार में उसकी जरूरत बन रही होती है। ख्याल को हकीकत बनाने में सिर्फ हमारा नहीं, बाहरी संसार का भी हित है तो वह सहयोग भी करता है। भले ही हमें न दिखे।और भीऔर भी