देश में शेयर ट्रेडिंग के लिए जरूरी डीमैट खातों की संख्या अभी भले ही 1.69 करोड़ तक सीमित हो, लेकिन इनका दायरा देश के 80 फीसदी पिनकोड पतों तक फैल चुका है। यह दावा है देश की प्रमुख डिपॉजिटरी संस्था एनएसडीएल (नेशनल सिक्यूरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड) का। एनएसडीएल में डीमैट खातों की संख्या अभी 1.02 करोड़ है, जबकि दूसरी डिपॉजिटरी संस्था सीडीएसएल (सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज इंडिया लिमिटेड) में इस समय कुल 67.06 लाख डीमैट खाते हैं। इनमें बंदऔरऔर भी

ट्रेडरों से लेकर निवेशक तक सभी यूरो, हंगरी, ग्रीस और पिग्स (पुर्तगाल, आयरलैंड, ग्रीस व स्पेन का संक्षिप्त नाम) का हल्ला मचा रहे थे। लेकिन बाजार ने उन्हें ठेंगा दिखा दिया, गलत साबित कर दिया। लेहमान के समय यही लोग कार्ड घोटाले की बात कर रहे थे। उसके बाद इन पर मुद्रास्फीति और ब्याज दरों का भूत सवार हो गया। लेकिन क्या आज सचमुच कोई मुद्रास्फीति और ब्याज दरों की बात कर रहा है? बाजार को डरानेऔरऔर भी

केंद्रीय कैबिनेट ने कोल इंडिया और हिंदुस्तान कॉपर के विनिवेश का फैसला टाल लिया है। इसकी मुख्य वजह राजनीतिक सहमति न बन पाना बताया जा रहा है। खासकर, रेल मंत्री ममता बनर्जी कोल इंडिया के विनिवेश का विरोध कर रही हैं। गुरुवार को कैबिनेट की बैठक के बाद खान मंत्री बी के हांडिक ने मीडिया को यह जानकारी दी। लेकिन उन्होंने विनिवेश का फैसला टालने की कोई वजह अपनी तरफ से नहीं बताई। बता दें कि जहांऔरऔर भी

कल हमने सूत्रों के हवाले से आपको बताया कि श्राडेर डंकन की विदेशी प्रवर्तक अमेरिकी कंपनी श्राडेर ब्रिजपोर्ट इंटरनेशनल कंपनी के भारतीय प्रवर्तक व चेयरमैन जे पी गोयनका की पूरी 24.50 फीसदी इक्विटी हिस्सेदारी खरीदने जा रही है। वह इसके लिए प्रति शेयर मूल्य 324 रुपए देने को तैयार है। असल में इक्विटी हिस्सेदारी बढ़ाने के पीछे अमेरिका की कंपनी गेट्स का नाम आ रहा है। आज बीएसई में यह शेयर शुरुआती कारोबार में 149.85 रुपए परऔरऔर भी

हमारे कपड़ा निर्यात का 60 फीसदी हिस्सा अमेरिका और यूरोप के बाजारों में होता है। इसलिए यूरोप व अमेरिका में कुछ भी गड़बड़ होती है तो देश का कपड़ा निर्यात बुरी तरह प्रभावित होता है। यूरोप के संकट के संदर्भ में केंद्रीय कपड़ा मंत्री दयानिधि मारन का कहना है कि हमारा एक पैर अब भी कब्र में है। वित्त वर्ष 2009-10 में देश का कपड़ा निर्यात 19 अरब डॉलर का रहा है। चालू वित्त वर्ष में कुलऔरऔर भी

मन शरीर के रसायनों से लेकर हार्मोंस और समाज की नैतिकताओं से लेकर पाखंडों तक का बोझ ढोता है। आगे बढ़ने के लिए सारे झाड़-झंखाड़ को काटता तराशता रहता है। इसलिए मन पर बराबर सान चढ़ाते रहना चाहिए।और भीऔर भी

यूं तो बाजार में हर दिन सैकड़ों शेयर बढ़ते हैं। जैसे, बुधवार को एनएसई में ट्रेड हुए 1179 शेयरों में से 724 के भाव बढ़े हैं, जबकि बीएसई में ट्रेड हुए 2897 शेयरों में से 1481 शेयरों ने बढ़त हासिल की है। कोई भी सांख्यिकी या गणित का सामान्य विद्यार्थी बता सकता है कि इनमें से बढ़ने की संभावना वाले दो-चार शेयरों पर सही तीर लग जाने की प्रायिकता कितनी ज्यादा है। जैसे, हम कह सकते हैंऔरऔर भी