रिजर्व बैंक के कदम से झनझनाए मुद्रा बाजार के तार, ब्याज पर लगी लगाम

शेयर बाजार को बाजार बंद होने से पहले यह पता था। मुद्रा बाजार को इस बात का पक्का अंदाजा था। बैंकों को भी मालूम था कि ऐसा होने जा रहा है। इसलिए रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को शेयर बाजार, मुद्रा बाजार और बैंकों में सन्नाटा छाने के बाद सीआरआर (नकद आरक्षित अनुपात) में कमी कर दी तो हर कोई बड़ा सुकून महसूस कर रहा है। तसल्ली थोड़ी और भी इसलिए बढ़ गई क्योंकि जहां अपेक्षा सीआरआर में 0.50 फीसदी कमी की थी, वहीं वास्तविक कटौती 0.75 फीसदी की हुई है। माना जा रहा है कि रिजर्व अगले हफ्ते 15 मार्च को ब्याज दर में 0.25 फीसदी कमी कर सकता है। अभी रेपो दर 8.50 फीसदी है जिसे 8.25 फीसदी किया जा सकता है।

रेपो वह ब्याज दर पर जिस पर बैंक अपनी तात्कालिक जरूरतों को पूरा करने के लिए रिजर्व बैंक से उधार लेते हैं। सीआरआर वह अनुपात है, बैंकों को अपनी कुल जमा का जितना हिस्सा रिजर्व बैंक के पास अनिवार्य रूप से बतौर नकद रखना पड़ता है और जिस पर उन्हें कोई ब्याज भी नहीं मिलता। यह बैंकिंग व्यवस्था को दुरुस्त बनाए रखने का एक उपाय है। नहीं तो बैंकों की इतनी रकम उनके मूल धंधे से उलट बिना कुछ कमाए निष्क्रिय पड़ी रहती है। सीआरआर अब 5.5 फीसदी घटाकर 4.75 फीसदी पर ले आया गया है। रिजर्व बैंक के मुताबिक इससे बैंकों को 48,000 करोड़ रुपए की अतिरिक्त नकदी मिल जाएगी।

इससे पहले रिजर्व बैंक ने इस साल 24 जनवरी को मौद्रिक नीति की तीसरी तिमाही की समीक्षा के वक्त भी सीआरआर में आधी फीसदी कमी करके 31,500 करोड़ रुपए की तरलता या लिक्विडिटी मुक्त की थी। अब 0.75 फीसदी की और कमी के बाद मुक्त तरलता 79,500 करोड़ रुपए पर पहुंच गई है। अब भी रिजर्व बैंक के पास सीआरआर के रूप में बैंकों के करीब 3.04 लाख करोड़ रुपए नकद पड़े हुए हैं।

बता दें कि बैंकों को पखवाड़े-पखवाड़े अपनी जमा व ऋण वगैरह का हिसाब रखना पड़ता है। पखवाड़े का अंतिम दिन शुक्रवार होता है। इसलिए रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को सीआरआर में कमी की घोषणा बहुत सोच-समझ कर की है। बैंकों का नया पखवाड़ा शनिवार, 10 मार्च से शुरू हो रहा है और नया सीआरआर 10 मार्च से ही लागू है। अगर रिजर्व बैंक यही कदम 15 मार्च को मौद्रिक नीति की मध्य-त्रैमासिक समीक्षा के दौरान उठाता तो बैंकों को इसका फायदा नहीं मिलता क्योंकि उन्हें पखवाड़े के अंतिम दिन 23 मार्च तक 5.5 फीसदी सीआरआर ही बनाकर रखना पड़ता।

रिजर्व बैंक के इस कदम का समय इसलिए भी महत्वपूर्व है क्योंकि कंपनियां अग्रिम टैक्स की अदायगी के लिए 15 मार्च को करीब 60,000 करोड़ रुपए निकालेंगी जो रकम बैंकिंग सिस्टम से निकलकर सरकारी खजाने में चली जाएगी। ऐसे में बैंकों के सामने तरलता का संकट और भी विकराल हो जाता। मालूम हो कि बैंक 24 जनवरी को सीआरआर में आधा फीसदी कमी के बावजूद जनवरी में हर दिन रिजर्व बैंक की चलनिधि समायोजन सुविधा (एलएएफ) के तहत औसतन 1.29 लाख करोड़ रुपए 8.5 फीसदी ब्याज (रेपो दर) पर उधार लेते रहे हैं। फरवरी में यह औसत 1.41 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गया।

पहली मार्च को तो बैंकों ने रिजर्व बैंक से अपनी तरलता जरूरत को पूरा करने के लिए 1.92 लाख करोड़ रुपए का रिकॉर्ड उधार लिया। लेकिन 7 मार्च तक यह रकम घटकर 1.27 लाख करोड़ रुपए पर आ गई। शुक्रवार को बैंकों ने रिजर्व बैंक से 79,965 करोड़ रुपए ही उधार लिये हैं। इससे पता चलता है कि उनको रिजर्व बैंक के फैसले का पता पहले से था। शेयर बाजार को भी यह पहले से पता था जिसका जिक्र हम बाजार बंद होने से पहले ही अपने चक्री कॉलम में कर चुके थे।

मुद्रा बाजार तक को इसका पक्का अंदाजा था। वहां शुक्रवार को हुए आखिरी कुछ सौदों में सर्टीफिकेट ऑफ डिपॉजिट (सीडी) पर ब्याज की दर 11.30 फीसदी से खटाक से 10.95 फीसदी तक नीचे आ गई। शुक्रवार को 90 दिनों के कमर्शियल पेपर (सीपी) पर ब्याज की दर 11.75 फीसदी पर पहुंच गई थी जो जनवरी 2009 के बाद सबसे ऊंची दर थी। लेकिन वो भी शाम तक नीचे आने लगी थीं। सीआरआर में कमी से बैंकों से कर्ज लेनेवाले आम उपभोक्ताओं पर तो फर्क नहीं प़ड़ेगा। लेकिन कॉरपोरेट क्षेत्र के लिए बांड बाजार से धन जुटाना अब सस्ता हो जाएगा। दस साल की परिपक्वता वाले सरकारी बांडों पर यील्ड की दर कल 8.29 फीसदी पर बंद हुई है। बैंक ऑफ बड़ौदा में ट्रेजरी विभाग के अधिकारी के मुताबिक सोमवार को यह दर घटकर 8.18 से 8.20 फीसदी तक आ जानी चाहिए।

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