साल भर में करीब 25,500 करोड़ रुपए का धंधा। करीब डेढ़ लाख लोगों को सीधा रोजगार। अभी सितंबर तिमाही में करीब 7500 करोड़ रुपए की आय पर 1822 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ। मौजूदा बाजार पूंजीकरण 1.65 लाख करोड़ रुपए। इनफोसिस है तो देश की दूसरी सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर निर्यातक कंपनी। उसका नंबर टाटा समूह की कंपनी टीसीएस के बाद आता है जिसकी सालाना आय करीब 30,000 करोड़ और मौजूदा बाजार पूंजीकरण 2.34 लाख करोड़ रुपए है।औरऔर भी

शेयर बाजार हमेशा कल की सोचकर चलता है। किसी भी स्टॉक के आज के भावों में कल की संभावना निहित होती है। लेकिन कल तो बड़ा अनिश्चित है। उसके बारे में कुछ भी कहना सही निकले, यह कतई जरूरी नहीं। ऐसे में हम जैसे आम निवेशकों के लिए सही यही लगता है कि कल की छोड़कर वर्तमान में जीना सीखें। कंपनी का कल क्या होगा, यह बाद में देखा जाएगा। निवेश करते वक्त यह देख लेना जरूरीऔरऔर भी

साल 2012 में बाजार का पहला दिन। हर ब्रोकरेज हाउस व बिजनेस अखबार नए साल के टॉप पिक्स लेकर फिर हाजिर हैं। चुनने के लिए बहुत सारे विकल्प सामने हैं। ऐसे में आपको और क्यों उलझाया जाए! हालांकि अगर साल 2011 के टॉप पिक्स का हश्र आपके सामने होगा तो शायद आपने इस हो-हल्ले को कोई कान ही नहीं दिया होगा। इन पर ध्यान देना भी नहीं चाहिए क्योंकि ढोल, झांझ, मजीरा व करताल लेकर यह मंडलीऔरऔर भी

हर कोई दो का चार करने में जुटा है, बिना यह जाने कि असल में दो का चार होता कैसे है। यह धरती क्या, पूरा ब्रह्माण्ड कमोबेश नियत है, स्थाई है। यहां कुछ जोड़ा-घटाया नहीं जा सकता। कोई चीज एक महाशंख टन है तो आदि से अंत तक उतनी ही रहेगी। बस, उसका रूप बदलता है। द्रव्य दूसरे द्रव्य में ही नहीं, ऊर्जा तक में बदल जाता है। लेकिन ऊर्जा और द्रव्य का योगफल एक ही रहताऔरऔर भी

हर कोई अक्सर अपने कर्मं की सार्थकता के बारे में सोचता है। मैं भी कभी-कभी सोचता हूं कि जो काम कर रहा हूं, उसकी सार्थकता क्या है। नोट बनाने का लालच तो सब में है। लेकिन इस देश में बचानेवाले कितने हैं और इन बचानेवालों में भी अपने धन को जोखिम में डालने की जुर्रत कितने लोग कर सकते हैं? फिर आखिर मैं किसकी सेवा में लगा हूं? इन लोगों की हालत तो वही है कि गंजेड़ीऔरऔर भी

जैन इरिगेशन सिस्टम्स ड्रिप व स्प्रिंकल सिंचाई उपकरणों के अलावा पीवीसी, पोलि इथिलीन व पॉलि प्रोपिलीन पाइप सिस्टम, प्लास्टिक शीट, डिहाइड्रेटेड प्याज व सब्जियां, टिश्यू कल्चर, बायो फर्टिलाइजर, सोलर वॉटर हीटिंग सिस्टम और सोलर फोटो वोल्टिक उपकरण भी बनाती है। वह फसलों के चयन से लेकर बंजर व असिंचित भूमि के समुचित उपयोग से जुड़ी सलाहकार सेवाएं भी देती है। राजस्थान से निकलकर महाराष्ट्र के जलगांव में बसे जैन परिवार ने व्यापार से शुरू कर ईंट-दर-ईंट इसऔरऔर भी

ऑप्टो सर्किट्स भांति-भांति के मेडिकल उपकरण बनाती है। ईसीजी से लेकर दिल के स्टेंट तक। 1992 में बनी बेंगालुरू की कंपनी है। लेकिन अमेरिका, यूरोप, जापान, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, रूस व चीन समेत दुनिया के 150 से ज्यादा देशों में अपने उत्पाद बेचती है। अमेरिका की औषधि नियामक संस्था, यूएसएफडीए की सूची में है। कंपनी के पास फिलहाल 168 पेटेंट हैं, जबकि 53 पेटेंट विचाराधीन हैं। पिछले तीन सालों में उसकी बिक्री 50.18 फीसदी और लाभ 39.43 फीसदीऔरऔर भी

बीएसई में कल कुल 2950 प्रपत्रों या स्क्रिप्स में ट्रेडिंग हुई। इनमें से चार ने अब तक का ऐतिहासिक उच्चतम स्तर हासिल कर लिया। ये हैं – तिलक फाइनेंस, कृष्णा वेंचर्स, इंडियन ब्राइट और सुलभ इंजीनियर्स। ये चारों ही टी ग्रुप की कंपनियां हैं जिनमें कोई सट्टेबाजी नहीं चलती और 100 फीसदी डिलीवरी लेना जरूरी है। दूसरी तरफ कल 175 कंपनियों के शेयर अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए। इससे एक इशारा तो यहऔरऔर भी

बामर लॉरी तेल व प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अधीन काम करनेवाली सरकारी कंपनी है। हालांकि सरकार का निवेश इसमें प्रत्यक्ष नहीं, बल्कि परोक्ष रूप से है और उसे इसकी प्रवर्तक नहीं माना जाता। 1972 से भारत सरकार इसकी मालिक बनी है। अंग्रेजों के जमाने की कंपनी है। 1 फरवरी 1867 को शुरुआत कोलकाता में पार्टनरशिप फर्म के रूप में हुई। शुरुआती सालों में वो चाय लेकर शिपिंग, बीमा से लेकर बैंकिंग और ट्रेडिंग से लेकर मैन्यूफैक्चिरंग तकऔरऔर भी

वयस्क मताधिकार में हर 18 साल के नागरिक को वोट देने का हक है। उसी तरह कंपनियों के शेयरधारकों को कंपनियों के फैसलों में वोट देने का हक होता है। फर्क इतना है कि यहां शेयरों की खास श्रेणियों में मताधिकार की स्थिति बदलती रहती है। प्रेफरेंशियल शेयर का नाम आप लोगों ने सुना ही होगा। एक अन्य तरह के शेयर होते हैं डीवीआर (डिफरेंशियल वोटिंग राइट्स) शेयर। आम शेयरों में तो हर शेयर पर एक वोटऔरऔर भी