दुनिया की एक प्रतिष्ठित पत्रिका फॉरेन पॉलिसी ने अपनी ताजा सालाना रैंकिंग में भारत के पड़ोसी देशों – पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका को दुनिया के ‘सबसे नाकाम देशों’ की सूची में शामिल किया है। सूची में शामिल 60 देशों में पाकिस्तान को 12वें, म्यांमार को 18वें, बांग्लादेश को 25वें, नेपाल को 27वें, श्रीलंका को 29वें और भूटान को 50वें स्थान पर रखा गया है। इस सूची में अफ्रीकी देशों की बहुतायत है। सूची में सबसे ऊपरऔरऔर भी

लोकपाल विधेयक मसौदा समिति की आखिरी बैठक होने के बाद भी सरकार और हज़ारे पक्ष के बीच अहम मुद्दों पर मतभेद बने रहे और साझा मसौदा तैयार नहीं किया जा सका। हज़ारे पक्ष ने जहां सरकार के मसौदे पर ‘गहरी निराशा’ जाहिर की, वहीं केंद्र ने कहा कि वह दोनों पक्षों के मसौदे पर राजनीतिक दलों से राय लेकर उसे कैबिनेट के समक्ष रखेगा। सरकार के मसौदे में प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे में रखे जाने काऔरऔर भी

गंभीर मतभेदों और तीखी बयानबाजी के दौर के बाद सरकार और गांधीवादी अण्णा हज़ारे पक्ष के बीच सोमवार को दिल्ली में हुई लोकपाल विधेयक मसौदा समिति की बैठक ‘सौहार्दपूर्ण’ रही। हालांकि, सरकार ने जहां बातचीत में बड़ी प्रगति होने का दावा किया, वहीं हज़ारे पक्ष ने कहा कि मतभेद वाले मुद्दों पर अभी तक आम सहमति नहीं बन पाई है। बैठक का ‘सौहार्दपूर्ण’ माहौल में होना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछली बैठक में गंभीर मतभेद उभरने केऔरऔर भी

लगता है कि सरकार अण्णा हजारे व सिविल सोसायटी के प्रतिनिधियों के साथ किसी टकराव से बचना चाहती है। पहले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि उन्हें लोकपाल के दायरे में आने में कोई आपत्ति नहीं है और अब इस मुद्दे पर सबसे मुखर, केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्ब्ल कह रहे हैं कि प्रधानमंत्री को पद पर रहते नहीं, लेकिन पद छोड़ने के बाद लोकपाल के दायरे में लाया जा सकता है। सिब्बल ने समाचार चैनलऔरऔर भी

देश की सबसे प्रतिष्ठित और दूसरी सबसे बडी सॉफ्टवेयर निर्यातक कंपनी इनफोसिस के रोजमर्रा के कामकाज से मुक्त होने के बाद एन आर नारायणमूर्ति नई सामाजिक भूमिका अपनाते दिख रहे हैं। कुछ दिन पहले ही उन्होंने अण्णा हज़ारे व अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं से समान राय रखते हुए कहा था कि प्रधानमंत्री व न्यायपालिका को लोकपाल के अंतर्गत ले आना चाहिए, जबकि सरकार पूरी तरह इसके खिलाफ है। आज, शुक्रवार को उन्होंने बेलाग अंदाज में कह दिया किऔरऔर भी

लोकपाल मसौदा विधेयक के दो संस्करण कैबिनेट को भेजने के सरकार के निर्णय पर ‘आश्चर्य’ जताते हुए गांधीवादी सामाजिक कार्यकर्ता अण्णा हज़ारे ने कहा है कि सख्त लोकपाल कानून बनाने की केन्द्र की कोई मंशा नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर कमजोर कानून बना तो वह 16 अगस्त से फिर अनशन करेंगे। गुरुवार को हज़ारे ने कहा कि सरकार ने बीते अप्रैल में लोकपाल मसौदा समिति का गठन कर वादा किया था कि यह समिति ‘आम सहमति’औरऔर भी

केन्द्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने कहा है कि संसदीय समितियों की सिफारिशों को ‘अनिश्चित काल’ तक के लिए देश के नागरिकों की पहुंच से दूर नहीं रखा जा सकता, भले ही उन्हें सदन में पेश नहीं किया गया हो। मुख्य सूचना आयुक्त सत्यानंद मिश्रा ने राज्यसभा सचिवालय को सूचना के अधिकार पर अमल को लेकर संसदीय स्थायी समिति की सिफारिशों का खुलासा करने का निर्देश देते हुए यह फैसला सुनाया है। इन सिफारिशों को तीन साल बीतनेऔरऔर भी

छह से 14 साल के बच्चों को निःशुल्क व अनिवार्य शिक्षा के अधिकार (आरटीई) को लागू हुए एक साल से अधिक समय बीत चुका है। लेकिन अब तक देश के 28 राज्यों व सात संघशासित क्षेत्रों में केवल 18 ने ही इस कानून को अधिसूचित किया है। दिल्ली, महाराष्ट्र, केरल, उत्तर प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में इसे अभी भी कानून नहीं बनाया जा सका है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय से प्राप्त ताजा जानकारीऔरऔर भी

रामदेव का अनशन तो नौ दिन में निपट गया। लेकिन उत्तराखंड में लंबे अनशनों की लंबी पंरपरा है। सबसे लंबे अनशन का रिकॉर्ड 84 दिनों का है। 1940 के दशक में टिहरी में लोकतंत्र के लिए संघर्ष करने वाले गांधीवादी दिवंगत श्रीदेव सुमन ने अपनी कैद के दौरान 84 दिनों तक अनशन रखा था। अनशन के 84वें दिन उनका निधन हो गया था। चिपको आंदोलन के नेता सुंदर लाल बहुगुणा ने 74 दिनों का अनशन रखा था।औरऔर भी

संसदीय समिति ने सिफारिश की है कि भ्रष्टाचार या सत्ता के दुरुपयोग संबंधी शिकायतें हासिल करने का तंत्र स्थापित करने के प्रावधान वाले विधेयक के दायरे में मंत्रिपरिषद के सदस्यों और उच्च न्यायपालिका को लाया जाना चाहिए। गुरुवार को राज्यसभा के सभापति को सौंपी अपनी रिपोर्ट में कानून और न्याय तथा कार्मिक मामलों की स्थाई संसदीय समिति ने सशस्त्र बलों और सुरक्षा तथा खुफिया एजेंसियों को भी ‘जनहित में खुलासा और खुलासा करने वालों के संरक्षण विधेयकऔरऔर भी