गांधीवादी नेता अण्णा हज़ारे ने घोषणा की है कि अगर सरकार ने भ्रष्टाचार से निपटने के मुद्दे पर जनता का साथ नहीं दिया तो वे 16 अगस्त से जंतर मंतर पर ‘देश की आजादी’ की दूसरी लड़ाई शुरू करेंगे। योगगुरू बाबा रामदेव और उनके समर्थकों पर रामलीला मैदान पर हुई पुलिस कार्रवाई के खिलाफ बुधवार को अपने सहयोगियों के साथ राजघाट पर अनशन शुरू करने के बाद दोपहर करीब सवा बारह बजे अपने संबोधन में हज़ारे नेऔरऔर भी

पंजाब सरकार ने राज्य में समग्र ‘सेवा का अधिकार अधिनियम’ अपना लिया है। यह कानून नागरिकों को समय पर सेवा मुहैया कराना सुनिश्चित करेगा और किसी भी देरी के लिए 500 से 5000 रुपए तक का जुर्माना हो सकता है। जल्दी ही इस कानून को अधिसूचित कर दिया जाएगा और अगले जुलाई माह से यह लागू हो जाएगा। इसी के साथ पंजाब निर्धारित अवधि (1 से 60 दिन) में 67 सेवाएं उपलब्ध करानेवाला देश का पहला राज्यऔरऔर भी

केंद्रीय मंत्री दयानिधि मारन ने इन आरोपों को खारिज किया है कि उन्होंने दूरसंचार मंत्री के पद पर रहते हुए एयरसेल के पूर्व प्रमुख सी शिवशंकरन को अपना बिजनेस बेचने के लिए दबाव डाला था। मारन ने जोर देकर कहा कि वे उचित अधिकारियों के सामने खुद को निर्दोष साबित कर देंगे। मारन ने मंगलवार को चेन्नई में संवाददाताओं से कहा, ‘‘आप में ज्यादातर यह कहानी बनाने का प्रयास कर रहे हैं कि मैंने एक व्यक्ति कोऔरऔर भी

सोनिया गांधी की अध्यक्षता वाली कांग्रेस-नीत यूपीए सरकार गांधीवादी विरोध के तौरतरीकों को पचा नहीं पा रही है। यही वजह है कि उसने गांधीवादी कार्यकर्ता अण्णा हज़ारे को जंतर मंतर पर कल (बुधवार) को एक दिन विरोध प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी। हज़ारे अब टकराव को टालने के लिए महात्मा गांधी की समाधि, राजघाट पर पर अनशन करेंगे। यह घोषणा हज़ारे के सहयोगी अरविंद केजरीवाल, प्रशांत भूषण और किरण बेदी ने की। साथ ही उन्होंने जोर देकरऔरऔर भी

बाबा रामदेव प्रकरण पर कांग्रेस और यूपीए सरकार में फजीहत झेल रहे मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्ब्ल अब धर्मगुरुओं को पटाने में जुट गए हैं। सोमवार को उन्होंने पुरी के शंकराचार्य अधोक्षानंद को दिल्ली बुलाकर मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद अधोक्षानंद ने बाबा रामदेव के खिलाफ सरकार की कार्रवाई का समर्थन किया। उन्होंने इस संकट का पूरा दोष योगगुरू पर लगाते हुए कहा कि उन्हें अब भगवा चोला त्याग देना चाहिए। पुरी के शंकराचार्य नेऔरऔर भी

जो बाबा रामदेव शनिवार शाम तक केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल के खुलासे के बाद भीगी बिल्ली बने नजर आ रहे थे, वे आधी रात की पुलिस कार्रवाई के बाद अब दहाड़ते शेर बन गए हैं। कांग्रेस और उसके पल्लू में प्रासंगिकता खोजते लालू यादव के अलावा सभी राजनीतिक दल बाबा व उनके समर्थकों पर हुई कार्रवाई को लोकतंत्र पर सांघातिक हमला बता चुके है। अब सुप्रीम कोर्ट ने भी केंद्र सरकार को घेरे में ले लिया है।औरऔर भी

बाबा रामदेव का सत्याग्रह अकाल मृत्यु का शिकार हो गया। योगगुरु हरिद्वार में अपने पातंजलि योगपीठ आश्रम वापस पहुंच चुके हैं। दिल्ली राज्य के नई दिल्ली जिले में धारा 144 लगा दी गई है क्योंकि पुलिस को इंडिया गेट, बोट क्लब या जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शन किए जाने की आशंका थी, जो नई दिल्ली जिले के इलाके आते हैं। कुछ दिनों में यह आशंका खत्म होते ही धारा 144 भी हटा ली जाएगी। हुआ यह किऔरऔर भी

योगगुरु बाबा रामदेव ने दस सालों में जनता-जनार्दन में जो भी प्रतिष्ठा कमाई थी, उनकी एक चूक से वह एकदम मिट्टी में मिल गई। बाबा ने शुक्रवार को ही सरकार के साथ डील कर ली थी कि रामलीला मैदान में शनिवार सुबह को शुरू हुआ अनशन दोपहर तक खत्म कर देंगे, लेकिन 6 जून तक ‘तप’ जारी रहेगा। खुद बाबा रामदेव ने स्वीकार किया कि उनकी तरफ से संगठन के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण ने सरकार को इसऔरऔर भी

दिल्ली के रामलीला मैदान में जहां एक ओर बाबा रामदेव नायक की भूमिका में हैं, वहीं दूसरी ओर भ्रष्टाचार को खलनायक के रूप में पेश किया गया है। राष्ट्रीय राजधानी में भीषण गर्मी के बावजूद बाबा रामदेव के प्रतिबद्ध समर्थकों ने समाज पर भ्रष्टाचार के असर को प्रदर्शित करने के लिए विभिन्न माध्यमों को अपनाया है। आंदोलन स्थल पर युवा समर्थक ‘कैन्वस’ और टीशर्ट पर पेंटिंग कर भ्रष्टाचार के खिलाफ नारे लिख रहे हैं। मैदान के प्रवेशऔरऔर भी

बॉम्बे हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल कर मांग की गई है कि चुनाव आयोग को मतदान के दौरान इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) में ‘नकारात्मक मतदान’ यानी गोपनीयता के साथ किसी भी उम्मीदवार को वोट नहीं देने के प्रावधान को शामिल करने का निर्देश दिया जाए। ठाणे निवासी महेश बेडेकर ने पीआईएल दाखिल कर अदालत से अनुरोध किया है कि चुनावों के दौरान ‘नकारात्मक मतदान’ की गोपनीयता सुनिश्चित की जानी चाहिए क्योंकि मौजूदा नियमों में ऐसा नहींऔरऔर भी