वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी बुधवार 21 सितंबर की सुबह अमेरिका की पांच दिन की यात्रा पर निकल रहे हैं। इस दौरान विदेशी निवेशकों व उद्योगपतियों से बातचीत के अलावा वे विश्व बैंक व अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) की सालाना बैठकों में हिस्सा लेंगे। इस दौरान वहां ब्रिक्स देशों (ब्राजील, भारत, चीन, रूस, दक्षिण अफ्रीका) के वित्त मंत्रियों की एक बैठक भी होगी। साथ ही जी-24 की अध्यक्षता भारत को सौंपी जाएगी। वित्त मंत्री शनिवार 25 सितंबर को अमेरिकाऔरऔर भी

हमारे राष्ट्रीय सांख्यिकीय संगठन (एनएसओ) के तार दुनिया के तमाम संगठनों से जुड़े हुए हैं। इनमें विश्‍व बैंक, अंतरराष्‍ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ), अंतरराष्‍ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ), एशिया विकास बैंक (एडीबी), विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन (डब्‍ल्‍यूएचओ), ओईसीडी के साथ ही संयुक्त राष्ट्र से जुड़े यूनेस्‍को व यूएनीडपी जैसे कई संगठन शामिल हैं। सांख्‍यिकीय और कार्यक्रम कार्यान्‍वयन मंत्रालय की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक एनएसओ मूलतः उसका सांख्यिकीय खंड है। वैसे तो इन अंतरराष्‍ट्रीय संगठनों में काम करनेऔरऔर भी

जिस देश के तीन-चौथाई से ज्यादा लोग दिन में 50 रुपए से कम में गुजारा करते हों, वहां की केंद्र सरकार के मंत्रिमंडल में अगर तीन-चौथाई से ज्यादा मंत्री करोड़पति हों तो एक बात तो साफ है कि यह सरकार सही मायनों में बहुमत का प्रतिनिधित्व नहीं करती। सवाल यह भी है कि केंद्र की कांग्रेस लेकर, उत्तर प्रदेश की बीएसपी, तमिलनाडु की एआईडीएके और गुजरात की बीजेपी में आंतरिक लोकतंत्र नहीं है तो ये पार्टियां देशऔरऔर भी

वित्त मंत्रालय से लेकर पूरी सरकार को चिंता सताए जा रही है कि कहीं ब्याज दरें बढ़ने से देश की आर्थिक व औद्योगिक विकास दर और धीमी न पड़ जाए। इसलिए वे चाहते थे कि ब्याज दरें अब न बढ़ाई जाएं। लेकिन ऊपर-ऊपर मंत्री से लेकर सलाहकार तक रिजर्व बैंक द्वारा ब्याज दर बढ़ाने का समर्थन कर रहे हैं। वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने रिजर्व बैंक द्वारा शुक्रवार को रेपो व रिवर्स रेपो दरों में 0.25 फीसदीऔरऔर भी

लगातार दो महीने तक जोरदार तेजी दिखाने के बाद जुलाई में देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) 38 फीसदी घटकर 1.09 अरब डॉलर रह गया है। वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। पिछले साल जुलाई देश में 1.78 अरब डॉलर का विदेशी निवेश आया था। बता दें कि जून माह में देश में एफडीआई का प्रवाह सालाना आधार पर 310 फीसदी बढ़कर 11 साल में किसी भी महीने के रिकॉर्ड स्तर 5.65 अरब डॉलरऔरऔर भी

सरकार चालू वित्त वर्ष 2011-12 के लिए सभी उद्योगों की ड्यूटी ड्रॉबैक दरों (एआईआर) की अधिसूचना जल्दी ही जारी कर देगी। इन दरों की सूची तैयार करने का जिम्मा सरकार ने इस साल जनवरी में ही योजना आयोग के सदस्य सौमित्र चौधरी की अध्‍यक्षता में बनी एक समिति को सौंप दिया था। समिति ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है जिसकी सिफारिशों पर गौर किया जा रहा है। इस साल 30 सितंबर तक डीईपीबी (शुल्‍क हकनामाऔरऔर भी

कृषि मंत्रालय के अनुसार इस बार धान और तिलहन के बोवाई रकबे में काफी वृद्धि हुई है। इससे लगता है कि चावल व खाद्य तेलों की सप्लाई ज्यादा रहेगी जिससे इनके दाम नीचे आ सकते हैं। कृषि मंत्रालय ने बताया है कि राज्‍यों से प्राप्‍त आंकड़ों के अनुसार 16 सितंबर ‍तक 376.77 लाख हेक्‍टेयर क्षेत्र में धान की बोवाई हुई है। यह पिछले साल के मुकाबले 33.55 लाख हेक्‍टेयर अधि‍क है। पश्‍चि‍म बंगाल, बि‍हार, झारखंड, उत्‍तर प्रदेश,औरऔर भी

दाल व गेहूं की कीमतों में क्रमशः 2.45 फीसदी व 2.03 फीसदी की कमी आने से तीन सितंबर को समाप्त सप्ताह में खाद्य मुद्रास्फीति घटकर 9.47 फीसदी  पर आ गई। हालांकि इस दौरान अन्य खाद्य वस्तुएं महंगी हुईं। इससे पहले 27 अगस्त को समाप्त सप्ताह में थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित खाद्य मुद्रास्फीति 9.55 फीसदी  थी, जबकि साल भर पहले 2010 की समान अवधि में यह 15.16 फीसदी  थी। वाणिज्य मंत्रालय द्वारा गुरुवार को जारी आंकड़ों केऔरऔर भी

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने गुरुवार को 12वीं पंचवर्षीय योजना (2012-17) के दृष्टिकोण पत्र को मंजूरी दे दी। इसमें अगले साल मार्च से शुरू हो रहे पांच वित्तीय वर्षों के दौरान सालाना 9 फीसदी की आर्थिक वृद्धि हासिल करने का प्रस्ताव रखा गया है। अभी चल रही 11वीं पंचवर्षीय योजना में सालाना औसत आर्थिक वृद्धि 8.2 फीसदी रहने का अनुमान है। बैठक के बाद केंद्रीय सूचना व प्रसारण मंत्री अम्बिका सोनी ने संवाददाताओं से कहा, “मंत्रिमंडल ने दृष्टिकोण पत्रऔरऔर भी

केंद्र सरकार दूसरे प्रशासनिक सुधार आयोग की सिफारिशों के अनुरूप देश में व्यापक चुनाव सुधार के लिए विधेयक लाएगी। केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत व पेंशन मामलों और प्रधानमंत्री कार्यालय में मंत्री वी नारायणसामी ने गुरुवार को यह जानकारी दी। नारायणसामी ने पटना में संवाददाताओं से बातचीत के दौरान कहा कि चुनावों में धनबल और बाहुबल के प्रभाव को कम करने और अपराधियों को चुनाव प्रक्रिया से दूर करने के लिए केंद्र सरकार जल्द एक विधेयक लाने कीऔरऔर भी