जिसका डर था, वही हुआ। अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी मूडीज इनवेस्टर सर्विस ने बुधवार को भारतीय बैंकिंग प्रणाली पर अपना नजरिया स्थिर से नकारात्मक कर दिया। ऐसा तब है, जब ज्यादातर भारतीय बैंक अभी लागू बासेल-2 मानकों को ही नहीं, दो साल बाद 2013 से लागू होनेवाले बासेल-3 मानकों को भी पूरा करते हैं। मूडीज ने जारी बयान में कहा है कि आर्थिक विकास दर के घटने और सरकारी उधारी के बढ़ने से बैंकों के पास निजी क्षेत्रऔरऔर भी

इटली के प्रधानमंत्री सिल्वियो बर्लुस्कोनी ने इस्तीफा देने का फैसला कर दिया है। लेकिन इसके बाद इटली में लंबी राजनीतिक अनिश्चितता देखने को मिल सकती है। बर्लुस्कोनी की पार्टी चुनाव कराना चाहती है, वहीं विपक्ष राष्ट्रीय एकता की सरकार चाहता है। निचले सदन में हुए मतदान के दौरान बहुमत पाने में नाकाम रहे बर्लुस्कोनी ने कहा कि वह संसद में बजट सुधार पास होने के बाद अपना पद छोड़ देंगे। यूरोपीय साझीदारों ने इटली से इन सुधारोंऔरऔर भी

पेट्रोल की कीमतें बढ़ने और कर्ज महंगा होने का असर कारों की बिक्री पर साफ दिखने लगा है। अक्टूबर में घरेलू बाजार में कारों की बिक्री 23.77 फीसदी घटकर 1,38,521 इकाइयों की रही, जो अक्टूबर 2010 में 1,81,704 कारों की थी। इसमें देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी की हड़ताल ने भी आग में घी डालने का काम किया। यह बीते दस सालों में कारों की बिक्री में आई सबसे तेज गिरावट है। सोसाइटीऔरऔर भी

पिछले कुछ दिनों से भारतीय शेयर बाजार में तेजी का क्रम जमने लगा तो मंदी के खिलाड़ियों ने अपनी पकड़ बनाने के लिए रिसर्च रिपोर्टों का सहारा लेना शुरू कर दिया है। भारत में सक्रिय जर्मन बैंक, डॉयचे बैंक ने एक ताजा रिपोर्ट जारी कर कहा है कि अगर अगले वित्त वर्ष 2012-13 में भारत के जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) या अर्थव्यवस्था की विकास दर 7 फीसदी पर आ गई तो बीएसई सेंसेक्स गिरकर 14,500 अंक परऔरऔर भी

उत्तर प्रदेश सरकार ने गन्ने का राज्य समर्थित मूल्य (एसएपी) 40 रूपए प्रति क्विंटल बढ़ा दिया है। मुख्यमंत्री मायावती की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की बैठक में यह फैसला किया गया। अब सामान्य किस्म के गन्ने की बढ़ी कीमत 240 रुपए, अच्छे किस्म के गन्ने के लिए 250 रुपए और अन्य किस्म के गन्ने की कीमत 235 रुपए प्रति क्विंटल हो जाएगी। इस फैसले की घोषणा करते हुए खुद मुख्यमंत्री मायावती ने लखनऊ में बताया कि निजी चीनीऔरऔर भी

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) में डेरिवेटिव ट्रेडिंग धीरे-धीरे जोर पकड़ती जा रही है। दो महीने पहले तक महज लाखों में रहनेवाला कारोबार अब 1000 करोड़ रुपए का आंकड़ा पार कर गया है। बीएसई से मिली आधिकारिक सूचना के अनुसार मंगलवार, 8 नवंबर को एक्सचेंज में हुआ डेरिवेटिव कारोबार 1054.45 करोड़ रुपए रहा है। यह वोल्यूम 107 ब्रोकरों के जरिए हुए 39,055 सौदों से हासिल हुआ है। डेरिवेटिव सेगमेंट में आई जान एक्सचेंज द्वारा 28 सितंबर से शुरूऔरऔर भी

खाद्य मुद्रास्फीति के ऊंचे स्तर को धंधे के नए अवसर में तब्दील किया जा सकता है। यह कहना है दुनिया की जानीमानी सलाहकार फर्म केपीएमजी की ताजा रिपोर्ट का। राजधानी दिल्ली में मंगलवार को आयोजित नौवें ज्ञान शताब्दी सम्मेलन (नॉलेज मिलेमियम समिट) में पेश इस रिपोर्ट में बताया गया है कि कैसे कुछ कंपनियों ने खाद्य वस्तुओं को प्रभावित करनेवाली मांग-आपूर्ति की चुनौती को नवोन्मेष के जरिए बिजनेस का मौका बना लिया है। इनके बिजनेस म़ॉडल सेऔरऔर भी

ग्रामीण विकास की सभी योजनाओं पर किए गए व्यय का ऑडिट कैग द्वारा कराया जाएगा। केन्द्रीय ग्रामीण विकास और पेयजल आपूर्ति व स्वच्छता मंत्री जयराम रमेश ने कहा है कि कैग के साथ व्यापक चर्चा के बाद यह सहमति बनी है। इन दोनों मंत्रालयों की सभी योजनाओं के तहत किए गए सारे खर्च का ऑडिट कैग (नियंत्रक व महालेखा परीक्षक) द्वारा की जा सकेगी। उन्होंने कहा कि इस तरह का ऑडिट केन्द्र सरकार द्वारा ग्रामीण विकास कार्यक्रमोंऔरऔर भी

भारत व अमेरिका समेत दुनिया की 20 प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के समूह जी-20 के नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) को और धन दिए जाने पर विचार किया ताकि वह खासतौर पर दिवालियापन के संकट का सामना कर रहे यूरोपीय देशों के लिए अधिक ऋण सहायता दे सके। ब्रिटेन ने वित्त मंत्री जार्ज आस्बोर्न ने गुरुवार यहां इन नेताओं की बैठक के बाद कहा कि चीन जैसे देशों ने इन प्रस्तावों में रुचि दिखाई। पर उन्होंने यह नहीं बतायाऔरऔर भी

वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने शुक्रवार को कहा कि पेट्रोल की कीमतों में हाल की वृद्धि का मुद्रास्फीति पर कुछ असर पड़ेगा। सकल मुद्रास्फीति दहाई अंक के करीब पहंच चुकी है। उन्होंने राजधानी दिल्ली में संवाददाताओं से कहा कि निश्चित रूप से मुद्रास्फीति पर इसका विपरीत प्रभाव पड़ेगा। लेकिन तेल कीमतें ऊपर जा रही है और पेट्रोल नियंत्रण-मुक्त है। यह पूछे जाने पर कि कीमत वृद्धि को लेकर सरकार की सहयोगी दलों को अंधेरे में क्यों रखाऔरऔर भी