हर दिन राजनीति में नया बवाल। कतई साफ नहीं कि 2014 में देश में किसकी सरकार बनेगी। बहुतेरे निवेशक भविष्य की इस अनिश्चितता को लेकर परेशान हैं। पर सच यह है कि आखिरकार काम-धंधा और व्यापार ही राजनीति पर हावी पड़ते हैं। अगर भरोसा हो कि भारतीय अर्थव्यवस्था को अभी बहुत आगे जाना है तो निवेश के आकर्षक मौके मौजूद हैं। आज एक ऐसा ही मिड कैप स्टॉक पेश है जो आपका धन दोगुना कर सकता है…औरऔर भी

जिस चीज़ की मांग न हो, उसका आप कितना भी ढिढोरा पीट लें, वो चीज़ और उसे बनानेवाली कंपनी बाज़ार में कभी टिक नहीं सकती। लेकिन जिस चीज़ की जबरदस्त मांग हो और कोई कंपनी बहुत सलीके से उसे बराबर बना रही हो, उसको जमने से कोई रोक नहीं सकता। आज तथास्तु में लंबे निवेश के लिए पेश है ऐसी ही एक कंपनी। इस कंपनी का बिजनेस मॉडल बड़ा मजबूत है। लेकिन है यह एक लार्ज-कैप कंपनी…औरऔर भी

शेयर बाज़ार भले ही पिछले हफ्ते मंगल को छोड़कर हर दिन बढ़ा हो। पर सच यही है कि हमारी अर्थव्यवस्था की हालत अच्छी नहीं है। फिर, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बांड खरीद घटने या रुकने से भारत समेत दुनिया भर के बाज़ार गिर सकते हैं। ऐसी सूरत में हमें उन्हीं कंपनियों में निवेश करना चाहिए जो मूलभूत रूप से काफी मजबूत हैं और बदतर हालात में भी अच्छी कमाई करती हैं। तथास्तु में ऐसी ही एक कंपनी…औरऔर भी

ठीक आज की तारीख को साल भर पहले इसी कॉलम में हमने नैटको फार्मा में निवेश की सलाह दी थी। तब उसका शेयर 340 रुपए चल रहा था। इसके बाद 20 दिसंबर 2012 को वो 505 रुपए तक चला गया और अभी 430 रुपए चल रहा है। इतना नीचे आने के बाद भी 26.47 फीसदी का रिटर्न। यह है शेयर बाज़ार में अच्छी कंपनियों में निवेश का फायदा। इसे कहते हैं कंपनी के बढ़ने के साथ निवेशऔरऔर भी

कैस्ट्रॉल इंडिया का शेयर इस साल जनवरी से लेकर कल तक 26.76 फीसदी बढ़ चुका है। इसी दौरान सेंसेक्स 12.08 फीसदी बढ़ा है। लेकिन कैस्ट्रॉल शायद बाजार से आगे रहने का यह क्रम आगे जारी न रख सके। कारण, तीन दिन पहले सोमवार को घोषित मार्च तिमाही के उसके नतीजे अच्छे नहीं रहे हैं। इस दौरान जहां उसकी बिक्री 4.13 फीसदी बढ़कर 781.7 करोड़ रुपए पर पहुंची है, वहीं शुद्ध लाभ 10.03 फीसदी घटकर 122.9 करोड़ रुपएऔरऔर भी

संजय लालभाई का समूह कंपनियों के ऐसे नाम रखता है जैसे बेटों का नाम रख रहा हो। अनिल, अतुल, अमोल, अरविंद। जी हां, इस समूह की बहुत पुरानी कंपनी है अरविंद लिमिटेड। किसी नाम की मोहताज नहीं। डेनिम में दबदबा है। जहां ली, रैंगलर, ऐरो व टॉमी हिलफिगर जैसे अंतरराष्ट्रीय ब्रांड भारत में इसी कंपनी के जरिए चलते हैं, वहीं फ्लाइंग मशीन, न्यूपोर्ट, एक्ज़ालिबर और रफ एंड टफ इसके अपने ब्रांड हैं। आपको यह जानकर आश्चर्य होगाऔरऔर भी

1977 में दो कर्मचारियों से शुरू करनेवाली केरल की कंपनी वी-गार्ड इंडस्ट्रीज अब 1300 से ज्यादा कर्मचारियों की कंपनी बन चुकी है। पहले केवल वोल्टेज स्टैबलाइजर बनाती थी। अब पम्प, मोटर, इलेक्ट्रिक वॉटर हीटर, सोलर वॉटर हीटर, केबल, सीलिंग फैन व डिजिटल यूपीएस तक बनाती है। पहले अकेली इकाई कोयंबटूर में थी। अब इसकी चार उत्पादन इकाइयां हैं। दो कोयम्बटूर में, एक उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर जिले में और एक हिमाचल प्रदेश के सिरमौर ज़िले में। देशऔरऔर भी

नैटको फार्मा मध्यम आकार की दवा कंपनी है। एक्टिव फार्मा अवयव (एपीआई), फॉर्मूलेशन और कांट्रैक्ट मैन्यूफैक्चरिंग सेवाओं का बिजनेस करती है। देश में कैंसर संबंधी दवाएं बनाने की अग्रणी कंपनी है। 1981 में आंध्र प्रदेश से शुरुआत की। 2008 तक अमेरिका पहुंच गई। 2011 में उसने अमेरिकी कंपनी लिवोमेड के साथ मिलकर एक संयुक्त उद्यम बना डाला जो ब्राज़ील के लिए दवाएं बनाता व बेचता है। इसी महीने भारत सरकार के पेटेंट निकाय ने एक ऐतिहासिक फैसलेऔरऔर भी

वादों की हकीकत को पहचानता है बाजार। इसीलिए भारतीय रेल के कामकाज से जुड़े तमाम स्टॉक कल, रेल बजट में की गई ठीकठाक घोषणाओं के बावजूद लुढकते चले गए। इसका अपवाद था तो इकलौता बीईएमएल जिसका नाम पहले भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड हुआ करता था। वैसे भी, बीईएमएल का वास्ता रेल मंत्रालय से नहीं, रक्षा मंत्रालय से है। वह रेलवे को माल सप्लाई जरूर करती है। लेकिन ज्यादा नहीं। इसलिए बीईएमएल के शेयर अगर मामूली बढ़त लेकरऔरऔर भी

ज़िंदगी कभी एकसार नहीं हो सकती। उसमें उतार-चढ़ाव आते ही हैं। इसी तरह शेयर बाजार और अलग-अलग शेयरों के साथ उतार-चढ़ाव बड़ा स्वाभाविक है। यहां से कमाने के लिए बड़ा धैर्य रखना पड़ता है। खासकर तब, मामला लांग टर्म या लंबे समय का है। हमने इसी कॉलम में ग्रेफाइट इंडिया के बारे में सबसे पहले 4 मई 2010 को लिखा था। तब इसका दो रुपए अंकित मूल्य का शेयर 104 रुपए के आसपास चल रहा था औरऔरऔर भी