कोई भी कह सकता है कि लगातार नौ सत्रों तक घाटा खाने के बाद सेंसेक्स का उठना लाजिमी था और इतनी ऊंचाई से गिरने के बाद तो मरी हुई बिल्ली भी थोड़ा उछलती है। लेकिन मैं ऐसा नहीं मानता। जब कुछ भी सामान्य नहीं रहा तो बेचारे निवेशक गफलत में पड़ गए कि सब कुछ बाहर से आ रही बुरी खबरों का नतीजा है। तभी अचानक उन्हें अहसास होता है कि ऐसा नहीं था तो झटका लगनाऔरऔर भी

बाजार के बारे में इसके अलावा खास कुछ देखने-समझने को नहीं है कि इस समय हर किसी पर डर का घटाटोप छाया हुआ है। लोगबाग सेंसेक्स के 14,000 तक गिर जाने की बात कहने लगे हैं। एक अतिरेकवादी ने तो मुझे ई-मेल भेजा है कि सेंसेक्स 7500 तक चला जाएगा और मेरे पास बस मुस्कराने के अलावा इस पर कुछ कहने को नहीं था। रोलओवर के दौरान ऐसा होता है। अतिवादी सक्रिय हो जाते है। अफवाहें अपनेऔरऔर भी

सच कहूं तो लोगों से आशा ही छोड़ दी है कि हमारी सरकार शेयर बाजार के लिए कुछ कर सकती है। इसलिए ज्यादातर निवेशक भारतीय पूंजी बाजार से निकल चुके हैं और पूरा मैदान विदेशी निवेशकों के लिए खाली छोड़ दिया है। बदला सिस्टम खत्म करने के बाद 2001 में ही संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) ने डेरिवेटिव सौदों में फिजिकल सेटलमेंट की जरूरत जताई थी। लेकिन दस साल बीत चुके हैं। सेबी फैसला भी कर चुकी है।औरऔर भी

निफ्टी 0.59 फीसदी और गिरकर 4905.80 पर पहुंच गया। बाजार में हल्ला यही है कि अब सब कुछ बरबाद होने जा रहा है। अरे! सब कुछ तो पहले ही बरबाद हो चुका है। अब बाजार से और कितनी बरबादी की उम्मीद की जा सकती है। आज की तारीख में सरकार की तरफ से रिटेल व छोटो निवेशकों को खींचने या उन्हें मदद करने की कोई नीति नहीं है। सारी की सारी नीतियां एफआईआई समर्थक हैं। असल में,औरऔर भी

बाजार अनपेक्षित रूप से धराशाई हो गया क्योंकि ब्रोकरों ने एचएनआई और ऑपरेटरों की प्रॉपराइटरी पोजिशन निपटाने का फैसला कर लिया। इसके चलते आखिरी एकाध घंटे में मिड कैप स्टॉक्स में भारी बिकवाली हुई। दो बजे के बाद गहरी गिरावट का दौर शुरू हुआ तो निफ्टी 1.90 फीसदी घटकर 4934.75 पर बंद हुआ। प्रॉपराइटरी खातों को बंद करने के लिए तमाम स्टॉक्स में हुए सौदों को जबरन काटा गया। आखिरी आधे घंटे में टाइटन इंडस्ट्रीज के 6औरऔर भी

बाजार में आज जमकर अफवाह चली कि भारत के वॉरेन बफेट माने जानेवाले प्रमुख निवेशक राकेश झुनझुनवाला (आरजे) चांदी की ट्रेडिंग में बुरी तरह फंस गए हैं और इसमें हुए नुकसान की भरपाई के लिए तमाम कंपनियों में अपना निवेश निकाल रहे हैं। मेरी समझ से यह मंदडियों द्वारा फैलाई गई अफवाह है। हालांकि यह सच है कि आरजे ने डेल्टा कॉर्प और वीआईपी इंडस्ट्रीज जैसे कुछ स्टॉक्स में अपनी होल्डिंग घटाई है क्योंकि अभी इनका मूल्यांकनऔरऔर भी

कल बाजार का कुल कारोबार एकबारगी 35 फीसदी घट गया तो हर कोई अचकचा गया। एक ही सत्र की झलक देखकर बाजार के सभी खिलाड़ी शॉर्ट सेलिंग पर उतारू हो गए। खुद मैं भी इतना कम वोल्यूम देखकर गच्चा खा गया और मैंने लिख दिया कि निफ्टी नीचे में 5010 तक जा सकता है। आज बाजार गिरा भी जमकर। निफ्टी 1.55 फीसदी गिरकर 5068.50 पर बंद हुआ। हालांकि दिन में इससे भी नीचे 5052.85 तक चला गयाऔरऔर भी

ऑपरेटरों द्वारा संचालित स्टॉक्स की धुनाई का एक और दौर बाजार में साफ-साफ देखा जा सकता है। केएसके एनर्जी वेंचर्स और गति लिमिटेड इसी का शिकार बन गए लगते हैं। केएसके को 8.22 फीसदी तोड़कर 64.20 रुपए की नई तलहटी पर पहुंचा दिया गया, वहीं 20 फीसदी तोड़कर गति की भरपूर दुर्गति कर डाली गई। ऐसे में चुनिंदा स्टॉक्स तक सीमित रहना ही भला। देखें कि डिश टीवी और वीआईपी इंडस्ट्रीज में क्या हो रहा है? हमनेऔरऔर भी

दूसरी तिमाही के कॉरपोरेट नतीजों का अंतिम दिन। करीब 515 कंपनियों के नतीजे सोमवार को आने हैं। इनमें एबीजी शिपयार्ड, अडानी एंटरप्राइसेज, अमर रेमेडीज, अरेवा टी एंड डी, अवेंतिस फार्मा, बलरामपुर चीनी, बीएचईएल, भूषण स्टील, सिप्ला, कॉक्स एंड किंग्स, डेक्कन क्रोनिकल, धामपुर शुगर, जयप्रकाश एसोसिएट्स, जेके टायर, जेएसडब्ल्यू स्टील, महिंद्रा एंड महिंद्रा, मोनसैंटो इंडिया, नाहर स्पिनिंग, ऑयल इंडिया, पटेल इंजीनियरिंग, राजेश एक्सपोर्ट्स, रुचि सोया, सबेरो ऑर्गेनिक्स, संघवी मूवर्स, टाटा पावर, टाटा मोटर्स, यूनिटेक, विविमेड लैब्स व जुआईऔरऔर भी

जो अपरिहार्य था, जिसे होना ही था, आखिरकार वही हो रहा है। भारतीय बैंकिंग सेक्टर को मूडीज ने एसबीआई के नतीजों के बाद डाउनग्रेड किया तो उसके एक दिन बाद ही स्टैंडर्ड एंड पुअर्स (एस एंड पी) ने उसे अपग्रेड कर दिया। इससे कहीं न कहीं यह स्पष्ट संदेश मिलता है कि डाउनग्रेड और अपग्रेड करना ऐसे सिंडीकेट की चाल है जिसका मकसद भारतीय बाजार को अपने इशारों पर नचाना है। जो निवेशक भगवान मानकर ऐसा करनेवालों काऔरऔर भी