बैंकिंग व फाइनेंस की दुनिया बड़ी विचित्र होती है। इसी साल 24 फरवरी को देश के सबसे बड़े बैंक, भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के चेयरमैन ओ पी भट्ट ने कहा था कि बैंक को अगले पांच सालों में लगभग 40,000 करोड़ रुपए जुटाने की जरूरत पड़ेगी। अब वही भट्ट साहब कह रहे हैं कि बैंक के पास 40,000 करोड़ रुपए का कैश इफरात पड़ा है जिसे बैंक कहीं लगा नहीं पा रहा है। कोई कह सकता हैऔरऔर भी

एमसीएक्स स्टॉक एक्सचेंज (एमसीएक्स-एसएक्स) ने भारत के दो पेशेवर संस्थानों इंस्टीट्यूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरीज ऑफ  इंडिया (आईसीएसआई) और इंस्टीट्यूट ऑफ कॉस्ट एंड वर्क्स एकाउंटेंट ऑफ इंडिया (आईसीडब्ल्यूएआई) के साथ मिलकर वित्तीय साक्षरता व कॉरपोरेट गवर्नेंस के प्रोत्साहन के लिए समझौता किया है। एमसीएक्स-एसएक्स ने कोलकाता में 7 मई को कंपनी मामलात मंत्रालय द्वारा आयोजित एक समारोह में इस करार पर हस्ताक्षर किए। एमसीएक्स-एसएक्स इस तरह का करार इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड एकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) के साथ पहलेऔरऔर भी

मानसून की हालत पर मौसम विभाग का बयान, यूबीएस बैंक द्वारा कमोडिटी को डाउनग्रेड किया जाना, कमजोर यूरो और इसके ऊपर से शुक्रवार से निजात पाने की मानसिकता। ऐसी ही तमाम बातें निवेशकों के दिमाग पर हावी रहीं। शहर में एक तरह का डर छाया हुआ है। दलाल पथ में भी भरोसा एकदम निचले पायदान पर पहुंच चुका है। ज्यादातर ट्रेडर और निवेशक पहले ही बाजार से बाहर जा चुके हैं। आज तो एचएनआई (हाई नेटवर्थ इंडीविजुल्स)औरऔर भी

पूंजी बाजार नियामक संस्था, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने म्यूचुअल फंडों को निवेशकों के बीच लोकप्रिय बनाने की ठान ली है। इसी कोशिश के तहत उसने तय किया है कि अब म्यूचुअल फंडों को निवेशकों से मिली शिकायतों का पूरा कच्चा-चिट्ठा अपनी व एम्फी (एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया) की वेबसाइट के साथ अपने सालाना रिपोर्ट में भी प्रकाशित करना होगा। सेबी ने एक नए सर्कुलर में यह व्यवस्था दी है। सेबी का कहनाऔरऔर भी

मेरा आपको सुझाव है कि कुछ समय निकालें और कंपनी व बाजार के बारे में उपलब्ध कराई जा रही रिसर्च का अध्ययन करें। जैसे, आज हम इस कॉलम के अंत में कावेरी टेलिकॉम की रिसर्च रिपोर्ट पेश कर रहे हैं। हम इस तरह की विशेष जानकारियां उपलब्ध कराते रहते हैं। इनके अध्ययन से भारत के साथ-साथ दुनिया के बाजारों के बर्ताव को लेकर आपके जो भ्रम हैं, उनमें से ज्यादातर दूर हो सकते हैं। अगर फिर भीऔरऔर भी

मैं लगातार इस बात पर कायम हूं कि भारत सचमुच विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) के लिए जबरदस्त आकर्षण का स्रोत बना हुआ है। यूरोप के ऋण संकट ने विदेशी पूंजी के प्रवाह को भारत की तरफ मोड़ा है। यह बात पिछले कुछ दिनों में वित्त मंत्रालय के आला अधिकारी भी स्वीकार कर चुके हैं। जिस तरह कल भारतीय रिजर्व बैंक ने इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए विदेशी वाणिज्यिक उधार (ईसीबी) की शर्तों में ढील दी और गवर्नर डी सुब्बारावऔरऔर भी

कल का दिन ऐसा था जब ट्रेडर बाजार बंद होने के आधा घंटा पहले तीन बजे तक शॉर्ट सेलिंग करते रहे। लेकिन आखिरी आधे घंटे में उन्हें शॉर्ट कवरिंग करनी पड़ी और एक तरह से निफ्टी को 5200 अंक के ऊपर पहुंचाने में उनका भी योगदान रहा। इसके बाद थोड़ा दम लेना जरूरी था, वह आ हो गया। लेकिन इसे असली कूल-ऑफ या दम लेना नहीं कह सकते क्योंकि नए शॉर्ट सौदे होते जा रहे हैं। ज्यादातरऔरऔर भी

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने साल 2003 से 2005 के दौरान हुए आईपीओ घोटाले में ब्रोकर फर्म व डीपी (डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट) मोतीलाल ओसवाल सिक्यूरिटीज को एक कंसेंट ऑर्डर के तहत बरी कर दिया है। यह कंसेंट ऑर्डर पारित तो 6 मई को हुआ था, लेकिन इसे सार्वजनिक सोमवार 10 मई को किया गया। मोतीलाल ओसवाल सिक्यूरिटीज के खिलाफ सेबी की कार्यवाही अप्रैल 2006 से ही चल रही थी। लेकिन जनवरी 2010 में ब्रोकर फर्म नेऔरऔर भी

स्टॉक एक्सचेंजों को अब अपने यहां सभी लिस्टेड कंपनियों की सालाना रिपोर्ट अपनी वेबसाइट पर उपलब्ध करानी होगी। और, इसकी शुरुआत बीते वर्ष 2009-10 की सालाना रिपोर्ट से करनी होगी। सेबी ने शुक्रवार, 7 मई को एक सर्कुलर जारी कर स्टॉक एक्सचेंजों के प्रशासन को यह हिदायत दी है। अभी तक कंपनियां लिस्टिंग समझौते के अनुच्छेद 51 के तहत अपनी सालाना रिपोर्ट इलेक्ट्रॉनिक डाटा फाइलिंग एंड रिट्रीवल (ईडीआईएफएआर) सिस्टम के जरिए सेबी द्वारा संचालित एक वेबसाइट (http://sebiedifar.nic.in/)औरऔर भी

अब मैं अपने मुंह से क्या कहूं? सारी दुनिया समझ गई है कि जब ग्रीस को ऋण संकट में मदद देनी की बात यूरोपीय संघ ने मंजूर कर ली थी, तब बाजार में इस तरह की गिरावट का कोई तुक नहीं था। मैंने आपको बता दिया था कि रविवार को ऐसा हो जाएगा। मैंने यह भी कहा था कि यूरोपीय संघ के पास इसके अलावा कोई चारा नहीं है। चाहे कुछ भी हो जाए, यूरो डूब नहींऔरऔर भी