वित्त मंत्री ने इस साल 26 फरवरी को अपने बजट भाषण में नए बैंकों को लाइसेंस देने की बात कही थी, तभी से बाजार में कयास लगाए जाने लगे थे कि किस-किस कंपनी को बैंकिंग लाइसेंस मिल सकता है। इसके बाद रिजर्व बैंक ने 20 अप्रैल को सालाना मौद्रिक नीति में कहा कि वह जुलाई के अंत तक इस बारे में दिशानिर्देश जारी कर देगा। लेकिन जुलाई के बीत जाने के दस दिन बाद रिजर्व बैंक नेऔरऔर भी

देश भर में छोटे ऑपरेटरों की संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है। वे कुकुरमुत्तों की तरह उग रहे हैं। मुंबई में ही कम से कम 100 नए ऑपरेटर आ गए हैं। इसी के साथ वोल्यूम का धंधा चल निकला है। वैल्यूमार्ट जैसे मामूली शेयर जो कभी एक रुपए पर चल रहे थे, अब 11.50 रुपए के ऊपरी सर्किट तक चले गए हैं। फिर भी 25 लाख शेयरों तक के खरीदार सामने आ जाते हैं। कहानियां गढ़ीऔरऔर भी

जैसी कि उम्मीद थी, जोश से भरे स्टॉक अब थकते नजर आ रहे हैं। ट्रेडरों और निवेशकों की दिलचस्पी भी इनमें घट गई है। दूसरी तरफ अभी तक किनारे पड़े शेयरों, खासकर मिड कैप व स्मॉल कैप स्टॉक्स में अच्छी-खासी दिलचस्पी दिखने लगी है। यह दिलचस्पी भी सच्चे दीर्घकालिक निवेशकों की तरफ से आ रही है, न कि रिटेल निवेशकों की तरफ से। रिटेल निवेशक तो आखिरकार रिटेल ही हैं। वे तो बस रोना-धोना ही जानते हैं।औरऔर भी

हम इस बात की आशंका पहले ही जता चुके हैं। बाजार पर मंडराता जोखिम घट नहीं रहा। बहुत मुमकिन है कि जिन अग्रणी कंपनियों में बढ़त के दम पर सेंसेक्स बढ़ता जा रहा है, वे गिरावट/करेक्शन की शिकार हो जाएं और जो स्टॉक अभी तक बाजार की रफ्तार से पीछे चल रहे थे, वे अचानक सबसे आगे आ जाएं। इसके पीछे का तर्क बड़ा सीधा-सरल और आसान है। पीछे चल रहे बहुत से शेयरों का भाव उनकेऔरऔर भी

मुंबई के मलाड में रहनेवाले मेरे मित्र अहिंद्र वर्मा पिछले दिनों अपने ऑफिस के काम से सिंगापुर दौरे पर गए हुए थे तो उनके घर में सेंधमारी हो गई। अज्ञात सेंधमार उनके घर से काफी जेवरात, बेशकीमती कलाकृतियां, सजावटी सामान, कपड़े व घड़ियां लेकर चंपत हो गए। इस सेंधमारी में बड़ी तरतीब से सजाया हुआ घर भी तकरीबन तहस-नहस हो गया। इस मामले में वर्मा को लगभग सात लाख रुपए का नुकसान हुआ। वे बताते हैं किऔरऔर भी

मैंने कल ही आवेगी शेयरों से बचने की सलाह दी थी। आईएफसीआई आज इसका पहला शिकार हो गया। सरकार ने कहा है कि वो इससे लिए बांडों को इक्विटी में बदल देगी। इसका मतलब यह हुआ कि सरकार को आईएफसीआई के 52 करोड़ अतिरिक्त शेयर मिल जाएंगे। 520 करोड़ रुपए का यह निवेश इसकी 737.84 करोड़ रुपए की मौजूदा इक्विटी का लगभग 70 फीसदी है। जाहिर है कि इक्विटी बढ़ जाने के बाद कंपनी का मूल्यांकन अभीऔरऔर भी

बीएसई सेंसेक्स इधर-उधर होता रहा, फिर भी उसमें ज्यादा गिरावट नहीं आई। एनएसई निफ्टी 5477 अंक को पार नही कर सका तो बाजार में करेक्शन आ गया और जो भी थोड़ी-बहुत बढ़त हुई थी, मिट गई। लेकिन इसके कोई खास फर्क नहीं पड़ता। हकीकत यह है कि एचएनआई (हाई नेटवर्थ इंडीविजुअल) यानी अमीर निवेशक अब बाजार में लौट रहे हैं और कैश सेगमेंट का सतहीपन मिट रहा है, गहराई आ रही है। सभी छोटे-मोटे ऑपरेटर सक्रिय होऔरऔर भी

क्या आपने अपने जेवरातों का बीमा करवाया है? यदि आपका जवाब न में है तो आप देर मत कीजिए। आपके कीमती जेवरात हों या आपका पर्स उनको बीमा सुरक्षा देना बहुत जरूरी है। आज के समय में चोरी व लूट के साथ पॉकेटमारी की घटनाएं इस कदर बढ़ गई हैं कि हमेशा चिंता बनी रहती है कि अपनी मूल्यवान वस्तुओं को कैसे सुरक्षित रखा जाए? इसका सबसे सरल तरीका है कि जेवरातों का बीमा करवा लीजिए। यहऔरऔर भी

निवेश की दुनिया की जानीमानी फर्म नोमुरा सिक्यूरिटीज के प्रतिनिधि ने आज ब्लूमबर्ग को दिए गए एक इंटरव्यू में कहा कि वे भारतीय बाजार के प्रति अब न इधर की, न उधर की, बस बीच की राय रखते हैं। सही बात है कि सेंसेक्स का 18,000 पर पहुंचना एफआईआई तक के बीच बाजार के महंगा होने की थोड़ी झुरझुरी पैदा कर सकता है। लेकिन मेरा यकीन मानिए। एफआईआई ने केवल जुलाई महीने में बाजार में 16,000 करोड़औरऔर भी

देश के अग्रणी स्पॉट एक्सचेंज एनएसईएल पर ई-गोल्ड और ई-सिल्वर के सौदों से स्टोरेज सरचार्ज वापस ले लिया गया है। एक्सचेंज के एक सर्कुलर के अनुसार एक अगस्त से ई-गोल्ड व ई-सिल्वर में सौदा करनेवाले कारोबारियों व निवेशकों को कोई सरचार्ज नहीं देना पड़ेगा। एक्सचेंज ने डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट्स को भी आदेश दिया है कि वे डीमैट वाले ई-गोल्ड और ई-सिल्वर के सौदों पर कोई सरचार्ज न वसूलें। एक्सचेंज की इस पहल से कारोबारियों और निवेशकों का सालानाऔरऔर भी