रमेश की व्यथा-कथा जारी है। कितने अफसोस की बात है कि उसने मेडिक्लेम करा रखा था जिसमें कैशलेस हास्पिटलाइजेशन की सुविधा थी। फिर भी बीमारी का खर्च उसने अपनी जेब से भरा। इसके बाद भी टीपीए (थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर) उसके क्लेम दिलाने में आनाकानी करता रहा। टीपीए बीमा कंपनी और बीमित के बीच का दलाल होता है जनाब। और, दलालों की हरकत और फितरत तो आप जानते ही होंगे। तो, अब कहानी आगे की… रमेश ने हफ्तेऔरऔर भी

रमेश ने मेडिक्लेम ले लिया और खुद व अपने परिवार को सुरक्षित महसूस करने लगा। टीपीए क्या होता है, कौन-सा टीपीए होना चाहिए? यह सब न उनको उनके बीमा एजेंट ने बताया, न उन्होंने जानने की कोशिश की। उन्हें लगा कि व्यक्तिगत मेडिक्लेम से अच्छा है फेमिली फ़्लोटर मेडिक्लेम पॉलिसी लेना, सो ले लिया। रमेश का सोचना बिल्कुल सही है कि फेमिली फ़्लोटर मेडिक्लेम पॉलिसी अच्छी है क्योंकि उस बीमा राशि का उपयोग परिवार का कोई भीऔरऔर भी

धंधेबाज कुछ भी कहें, लेकिन जानकार आपको यही बताएगा कि असली बीमा टर्म इंश्योरेंस ही है। टर्म इंश्योरेंस वास्तव में बेसिक इंश्योरेंस है। बीमा के अन्य रूप, मसलन यूलिप, मनी बैक, ग्रुप इंश्योरेस, मेडिकल इंश्योरेंस, वाहन बीमा, पेंशन प्लान तो काफी बाद में आए। इन सबका उद्गम टर्म इंश्योरेंस है। बीमा व निवेश हैं अलग: आपको हमेशा यह ध्यान रखना है कि बीमा व निवेश या बचत दोनों बिल्कुल अलग-अलग चीजें हैं। इन दोनों को एक चश्मेऔरऔर भी

यूं तो हाइपरटेंशन अपने आप में कोई बीमारी नहीं है, लेकिन पॉलिसीधारक इसके इलाज पर जो भी खर्च करता है, उसका क्लेम वह बीमा कंपनी से ले सकता है। यह फैसला है दिल्ली राज्य उपभोक्ता आयोग का। जस्टिस बी ए जैदी की अध्यक्षता वाले आयोग ने कहा है, “हाइपरटेंशन बीमारी नहीं, बल्कि मानव जीवन की सामान्य गड़बड़ी है जिसे दवाओं से नियंत्रित किया जा सकता है। यह ऐसा कोई मर्ज नहीं है जिसके इलाज के लिए अस्पतालऔरऔर भी

देश में व्यावसायिक दुश्मनी के मामलों में इजाफा, कंपनियों को ग्रामीण व अशांत इलाकों में होनेवाली समस्याएं, अपहरण की बढ़ती वारदातों और भारतीय मालवाहक जहाजों को विदेशी समुद्री लुटेरों से पल-पल मंडराते खतरे के मद्देनजर आज के जमाने में अपहरण व फिरौती बीमा की जरूरत बढ़ने लगी है। और इस जरूरत को पूरा करती है किडनैपिंग एंड रैन्सम इंश्योरेंस पॉलिसी या छोटे में के एंड आर इंश्योरेंस पॉलिसी। बड़े काम की पॉलिसी: आज का कॉरपोरेट इंडिया इसऔरऔर भी

दो शब्दों के जादुई शब्द बीमा से दरअसल आपको अप्रत्याशित हालात में अपनी व परिवार की सुरक्षा करने में सहायता मिलती है। जीवन की राह में सुरक्षित चलने के लिए बीमा जरूरी भी है। यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान-यूलिप, टर्म इंश्योरेंस, होम इंश्योरेंस, पेंशन प्लान, सिंगल प्रीमियम प्लान, हेल्थ इंश्योरेंस व वाहन बीमा जैसे रूपों व योजनाओं में बीमा की विभिन्न पॉलिसियां आज बाजार में मौजूद हैं। ज्यादातर मामलों में देखा गया है कि इनकी खरीदारी लोग एजेंटऔरऔर भी

बीमा नियामक संस्था, आईआरडीए (इरडा) और पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी के बीच यूलिप (यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस पॉलिसी) को लेकर मची जंग के पटाक्षेप के बाद अब बीमा कंपनियों के लिए संभवत: यूलिप का आकर्षण कम हो सकता है। लिहाजा अब वे यूनिवर्सल लाइफ पॉलिसी (यूएलपी) लाने की संभावनाएं तलाश कर रही हैं। एक उत्पाद में दो फायदे: यूएलपी दरअसल एक उत्पाद में दो प्रकार की पॉलिसियों के फायदे देती है। यह यूलिप व परंपरागत प्लान कीऔरऔर भी

मुंबई के मलाड में रहनेवाले मेरे मित्र अहिंद्र वर्मा पिछले दिनों अपने ऑफिस के काम से सिंगापुर दौरे पर गए हुए थे तो उनके घर में सेंधमारी हो गई। अज्ञात सेंधमार उनके घर से काफी जेवरात, बेशकीमती कलाकृतियां, सजावटी सामान, कपड़े व घड़ियां लेकर चंपत हो गए। इस सेंधमारी में बड़ी तरतीब से सजाया हुआ घर भी तकरीबन तहस-नहस हो गया। इस मामले में वर्मा को लगभग सात लाख रुपए का नुकसान हुआ। वे बताते हैं किऔरऔर भी

क्या आपने अपने जेवरातों का बीमा करवाया है? यदि आपका जवाब न में है तो आप देर मत कीजिए। आपके कीमती जेवरात हों या आपका पर्स उनको बीमा सुरक्षा देना बहुत जरूरी है। आज के समय में चोरी व लूट के साथ पॉकेटमारी की घटनाएं इस कदर बढ़ गई हैं कि हमेशा चिंता बनी रहती है कि अपनी मूल्यवान वस्तुओं को कैसे सुरक्षित रखा जाए? इसका सबसे सरल तरीका है कि जेवरातों का बीमा करवा लीजिए। यहऔरऔर भी

मुंबई की एक बीपीओ कंपनी में कार्यरत 52 वर्षीय अंकुश सावंत के पास हालांकि अपने नियोक्ता की ग्रुप मेडीक्लेम पॉलिसी है। पिछले दिनों उन्हें लगा कि हेल्थकेयर के बढ़ती खर्च की वजह से आज के जमाने में परिवार के हर सदस्य के पास पर्याप्त हेल्थ इंश्योरेंस कवर भी होना चाहिए। लेकिन बीमा एजेंट ने जब उन्हें प्रीमियम बताया तो उनके पैरों तले से जमीन खिसक गई। सावंत कहते हैं कि अगर यह हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी मैं 30औरऔर भी