केंद्र सरकार अपने आर्थिक खुफिया तंत्र को और भी चौकस बनाने में जुट गई है। इस सिलसिले में सेंट्रल इकनॉमिक इंटेलिजेंस ब्यूरो (सीईआईबी) की भूमिका, कामकाज व सांगठनिक ढांचे की समीक्षा के लिए बनाई गई समिति ने सोमवार को अपनी रिपोर्ट वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी को सौंप दी। इस समिति का गठन मार्च 2011 में केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के पूर्व सदस्य एस एस खान की अध्यक्षता में किया गया था। समिति ने करीब तीन महीनेऔरऔर भी

देश में आ रहे प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की दिशा बदलने लगी है। बीते वित्त वर्ष 2010-11 में देश में आया एफडीआई साल भर पहले से 25 फीसदी घट गया था। लेकिन चालू वित्त वर्ष 2011-12 के पहले दो महीनों में इसमें 77.25 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। सोमवार को सरकार की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल-मई 2011 में देश में आया एफडीआई 778.5 करोड़ डॉलर का रहा है, जबकि पिछले साल केऔरऔर भी

डायबिटीज के मरीजों की संख्या में तीव्र वृद्धि के बीच दुनिया भर की कंपनियां इसके इलाज और इसकी रोकथाम के लिए नई दवाओं के विकास पर जोर दे रही हैं। दो साल के भीतर नई विकसित की जा रही दवाओं की संख्या करीब ढाई गुना हो गई है। अमेरिका की अग्रणी दवा अनुसंधान और जैव प्रौद्योगिकी कंपनियों के संघ, फार्मास्यूटिकल रिसर्च एंड मैन्यूफैक्चरिंग एसोसिएशन (पीएचआरएमए) के मुताबिक 2010 में उसकी सदस्य कंपनियों द्वारा डायबिटीज या मधुमेह कीऔरऔर भी

पिछले दो साल में भवन निर्माण की लागत 18 फीसदी बढ़ गई है। यह कहना है रीयल एस्टेट क्षेत्र पर नजर रखने वाली ऑनलाइन डाटा व विश्लेषण फर्म प्रॉपइक्विटी का। इससे रीयल एस्टेट के कामकाज पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। प्रोपइक्विटी के एक अध्ययन मुताबिक 2009 से 2011 के बीच सीमेंट, स्टील, मजदूरी और ईंट जैसी चार प्रमुख चीजों के महंगा होने से निर्माण लागत में कुल 18 फीसदी वृद्धि हो गई है। इस तरह लागत बढ़ जानेऔरऔर भी

सुप्रीम कोर्ट का भरोसा इस बात से उठ गया है कि केंद्र सरकार विदेश बैंकों में जमा भारतीयों के काले धन का पता लगाकर उसे वापस लाएगी। इसलिए उसने खुद इस काम के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने का फैसला किया है। इस दल की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज न्यायमूर्ति बी पी जीवन रेड्डी करेंगे और सुप्रीम कोर्ट के ही पूर्व जज न्यायमूर्ति एम बी शाह इस दल में उपाध्यक्ष के बतौरऔरऔर भी

शेयर बाजार के बिगड़े माहौल के चलते 15 कंपनियों ने पूंजी बाजार नियामक सेबी की मंजूरी के बावजूद अपने आईपीओ पेश नहीं किए। इन्हें मिली मंजूरी की मीयाद पूरी हो गई और ये कंपनियां पूंजी बाजार में उतरने की हिम्मत नहीं जुटा सकीं। इस साल जनवरी से जून 2011 के बीच 15 आईपीओ से कुल 25,186 करोड़ रुपए जुटाने की योजना थी। लेकिन इनमें से कोई भी आईपीओ बाजार में नहीं आया। बता दें कि सेबी सेऔरऔर भी

भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर डॉ. दुव्वरि सुब्बाराव का तीन साल का कार्यकाल सितंबर में खत्म हो रहा है। इसलिए सरकारी हलकों में उनकी जगह नए गवर्नर को लाने की तैयारियां शुरू हो गई हैं। सूत्रों के मुताबिक इस दौड़ में तीन लोगों का नाम सबसे आगे हैं। ये हैं – शिकागो विश्वविद्यालय के प्रोफेसर व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के सलाहकार रघुराम राजन, आर्थिक मामलों के सचिव आर गोपालन और कार्नेल विश्वविद्यालय के प्रोफेसर व वित्त मंत्रालयऔरऔर भी

ब्रिटेन में मौजूदगी रखने वाली भारतीय कंपनियां और भारत में मौजूद ब्रिटिश कंपनियां एक सख्त ब्रिटिश कानून के दायरे में आ गई हैं। यह कानून घूसखोरी को रोकने के लिए बनाया गया है। ब्रिटेन का घूसखोरी अधिनियम-2010 शुक्रवार, 1 जुलाई से प्रभाव में आ गया। इस कानून के तहत घूसखोरी अथवा भ्रष्टाचार में लिप्त पाए लोगों को 10 साल तक की जेल हो सकती है और उनके खिलाफ असीमित जुर्माना लगाया जा सकता है। दोषी पाई गईऔरऔर भी

दुनिया के बाजारों में मांग बढ़ने से देश का निर्यात सालाना आधार पर मई महीने में 56.9 फीसदी बढ़कर 25.49 अरब डॉलर रहा। पिछले साल मई में यह 16.53 अरब डॉलर था। इसे अर्थव्यवस्था में मजबूती का संकेत का माना जा रहा है। निर्यात बढ़ने की रफ्तार यदि यही रही तो चालू वित्त वर्ष में 300 अरब डॉलर से अधिक का निर्यात कारोबार हो सकता है। चालू वित्त वर्ष 2011-12 के पहले दो महीने में अप्रैल-मई केऔरऔर भी

नाइजीरिया, घाना, मालदीव और बांग्लादेश जैसे देशों ने भारत की सामाजिक सुरक्षा योजनाओं विशेषकर राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के प्रति गहरी रूचि दिखाई है। श्रम और रोजगार मंत्री मल्लिकार्जुन खड़गे ने बताया कि ये देश अपने यहां ऐसी ही योजनाओं को लागू करने की सोच रहे हैं। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन और वॉशिंगटन में हुए जी-20 देशों के श्रम मंत्रियों के सम्मेलन जैसे वैश्विक मंचों पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना की तारीफ की जा चुकीऔरऔर भी