यूं तो हाइपरटेंशन अपने आप में कोई बीमारी नहीं है, लेकिन पॉलिसीधारक इसके इलाज पर जो भी खर्च करता है, उसका क्लेम वह बीमा कंपनी से ले सकता है। यह फैसला है दिल्ली राज्य उपभोक्ता आयोग का। जस्टिस बी ए जैदी की अध्यक्षता वाले आयोग ने कहा है, “हाइपरटेंशन बीमारी नहीं, बल्कि मानव जीवन की सामान्य गड़बड़ी है जिसे दवाओं से नियंत्रित किया जा सकता है। यह ऐसा कोई मर्ज नहीं है जिसके इलाज के लिए अस्पतालऔरऔर भी

बैंकिंग उद्योग में ऐसा पहली बार हुआ है। आईडीबीआई बैंक ने चेक बाउंसिग के अलावा सेंविग्स और करंट एकाउंट से जुड़े सारे के सारे शुल्क खत्म कर दिए हैं। यह फैसला 1 सितंबर, बुधवार से लागू हो गया है। इसका मतलब यह होगा कि बैंक का कोई भी खाताधारी उससे डिमांड ड्राफ्ट बनवाएगा तो उसे एक पैसा भी शुल्क नहीं देना पड़ेगा। वह इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर भी मुफ्त में करवा सकता है। उस पर अपने खाते मेंऔरऔर भी

दो शब्दों के जादुई शब्द बीमा से दरअसल आपको अप्रत्याशित हालात में अपनी व परिवार की सुरक्षा करने में सहायता मिलती है। जीवन की राह में सुरक्षित चलने के लिए बीमा जरूरी भी है। यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान-यूलिप, टर्म इंश्योरेंस, होम इंश्योरेंस, पेंशन प्लान, सिंगल प्रीमियम प्लान, हेल्थ इंश्योरेंस व वाहन बीमा जैसे रूपों व योजनाओं में बीमा की विभिन्न पॉलिसियां आज बाजार में मौजूद हैं। ज्यादातर मामलों में देखा गया है कि इनकी खरीदारी लोग एजेंटऔरऔर भी

सारी लिस्टेड मीडिया कंपनियों को बताना होगा कि कॉरपोरेट क्षेत्र के साथ उन्होंने किस तरह की ‘प्राइवेट ट्रीटी’ कर रखी है। पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी ने प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया की सहमति ने यह नियम बना दिया है। सेबी का कहना है कि बहुत सारे मीडिया समूहों ने कंपनियों के साथ गठबंधन कर रखे हैं। खासकर ऐसे रिश्ते उन कंपनियों के साथ हैं जो पहले से लिस्टेड हैं या पब्लिक ऑफर लानेवाली हैं। ये कंपनियां कवरेजऔरऔर भी

इस साल जून तक के छह महीनों में देश में सोने की मांग 365 टन रही है जो पिछले साल की पहली छमाही की मांग 188.4 टन से 94 फीसदी अधिक है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की तरफ से बुधवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक चालू साल 2010 की पहली छमाही में भारत में सोने के निवेश में 264 फीसदी की जबरदस्त वृद्धि हुई है। साल 2009 में जून तक सोने में किया गया निवेश 25.4 टन था,औरऔर भी

दूसरे सरकारी नेताओं को तो छोड़िए, हमारे वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी तक दबी जुबान से कहते रहे हैं कि खाने-पीने की चीजों के महंगा हो जाने की एक वजह लोगों की बढ़ी हुई क्रयशक्ति है। खासकर महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गांरटी जैसी योजनाओं के चलते गरीब लोगों की तरफ से खाद्यान्नों की मांग बढ़ गई। वे पहले से ज्यादा खाने लगे हैं जिसका असर खाद्य मुद्रास्फीति के बढ़ने के रूप में सामने आया है। लेकिन रिजर्व बैंकऔरऔर भी

laxmi and begum

आपने भी देखा होगा। मैंने भी देखा है। सड़क के किनारे, गली के नुक्कड़ पर, बस अड्डों के पास, ट्रेन के डिब्बों में कभी-कभी एक आदमी नीचे बैठा ताश के छह पत्तों को उल्टी तरफ से दो-दो की जोडियों में खटाखट तीन सेट में रखता जाता है। आसपास कम से कम तीन लोग खड़े रहते हैं जो उसे घेरकर दांव लगाते हैं। दांव यह होता है कि जिसके बताए पत्ते के पलटने पर बेगम निकलेगी, उसके सौऔरऔर भी

हमारे शेयर बाजार में पब्लिक या आम निवेशकों की भागीदारी लगातार घटती जा रही है। दूसरी तरफ विदेशी निवेशक लगातार इस स्थिति में बने हुए हैं कि उनके अकेले की ताकत पब्लिक समेत तमाम भारतीय निवेशकों के लगभग बराबर बैठती है। रेलिगेयर कैपिटल मार्केट्स की एक रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय कंपनियों की शेयरधारिता में आम निवेशकों का हिस्सा जून 2008 में 9.24 फीसदी था, लेकिन जून 2010 तक यह घटकर 8.16 फीसदी रह गया। इस दौरानऔरऔर भी

मानसून के समाप्त होने और त्यौहारी मौसम शुरू होने के साथ सीमेंट, रीयल्टी और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र की कंपनियों के शेयरों में आनेवाले दिनों में तेजी आने की उम्मीद है। सीएनआई रिसर्च के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक किशोर पी ओस्तवाल ने एक समाचार एजेंसी से बातचीत में कहा, ‘‘मानसून के समाप्त होने और त्यौहारी मौसम शुरू होने के साथ सीमेंट, रीयल्टी और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र की कंपनियों के शेयरों के प्रति निवेशकों की रूचि बढ़ेगी क्योंकि इन शेयरों सेऔरऔर भी

पूंजी बाजार नियामक संस्था, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने पब्लिक इश्यू (आईपीओ व एफपीओ) में रिटेल निवेशकों की निवेश सीमा को एक लाख रुपए से बढ़ाकर दो लाख रुपए करने की पेशकश की है। मजे की बात है कि इसके लिए उसने मुद्रास्फीति के बढ़ने का तर्क दिया है, जबकि शेयर के इश्यू मूल्य का कोई सीधा रिश्ता मुद्रास्फीति से नहीं होता। उसने इस बारे में एक बहस पत्र पेश किया है जिसमें सभी संबंधितऔरऔर भी