पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी ने हाल ही में आईपीओ लानेवाली कंपनी वासवानी इंडस्ट्रीज की लिस्टिंग पर रोक लगा दी है। वासवानी इंडस्ट्रीज का आईपीओ 29 अप्रैल को खुलकर 3 मई को बद हुआ था। इसके तहत कंपनी ने अपने एक करोड़ शेयर 45 से 49 रुपए के मूल्य-दायरे में जारी किए थे। सेबी ने गुरुवार को देर रात जारी की गई सूचना में कहा है कि इश्यू के बंद होने के बाद आईपीओ के सब्सक्रिप्शन मेंऔरऔर भी

शेयर बाजार की महत्ता हम लोग नहीं समझते। लेकिन पिछले आठ सालों में शेयर बाजार में सौदों की मात्रा में जबरदस्त इजाफा हुआ है। 2002-03 में यहां साल भर में हुई कुल ट्रेडिंग देश के सकल घेरलू उत्पाद (जीडीपी) का 57.28% थी। लेकिन 2010-11 में यह आंकड़ा 517.30% का हो गया। यानी, हमारी अर्थव्यवस्था का जो आकार है, उसकी पांच गुना से ज्यादा ट्रेडिंग शेयर बाजार में होने लगी है। वैसे इसमें से 445.91% ट्रेडिंग ऑप्शंस वऔरऔर भी

देश के सबसे पुराने स्टॉक एक्सचेंज बीएसई का मुख्य धंधा शेयरों, डिबेंचरों व अन्य प्रतिभूतियों की ट्रेडिंग कराना है। लेकिन उसकी आमदनी का बड़ा हिस्सा निवेश व डिपॉजिट से आता है। बुधवार को घोषित नतीजों के अनुसार 31 मार्च 2011 को समाप्त वित्त वर्ष में बीएसई की कुल आमदनी 538.03 करोड़ रही है। इसमें से 227.39 करोड़ रुपए यानी 42.26 फीसदी हिस्सा निवेश व डिपॉजिट से आया है। प्रतिभूति सेवाओं से हुई उसकी आय 179.73 करोड़ रुपएऔरऔर भी

क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि भारत के सबसे बड़े बैंक का शुद्ध लाभ मात्र मात्र 20.88 करोड़ रुपए हो सकता है। लेकिन भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के साथ ऐसा ही हुआ है। सोमवार को घोषित नजीतों के अनुसार मार्च 2011 की तिमाही में एसबीआई ने 1922.73 करोड़ रुपए का कर-पूर्व लाभ कमाया है। लेकिन 1901.85 करोड़ रुपए का टैक्स चुकाने के बाद उसका कर-बाद लाभ 20.88 करोड़ रुपए रहा है, जबकि साल भर पहले इसीऔरऔर भी

पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी की इजाजत के बगैर काम कर रही एक प्लांटेशन कंपनी और उसके दो निदेशकों पर दिल्ली की एक अदालत ने जुर्माना लगाया है। हालांकि जुर्माने की रकम महज 2.25 लाख रुपए है। लेकिन सांकेतिक रूप से इसका काफी महत्व है। योजना एग्रो फॉरेस्ट्री नाम की यह कंपनी लंबे-चौड़े रिटर्न का झांसा देकर लोगों से धन इकट्ठा कर रही थी। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (एएसजे) पवन कुमार जैन ने कंपनी के खिलाफ सेबी कीऔरऔर भी

न्यूयॉर्क की महिला होटलकर्मी के साथ यौन उत्पीड़न के मामले में गिरफ्तार अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के प्रमुख डोमिनिक स्ट्रॉस काह्न के खिलाफ एक फ्रांसीसी लेखिका ने भी यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है। यह महिला जल्द ही काह्न के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने वाली है। 31 साल की उपन्यासकार और पत्रकार त्रिस्तान बैनन ने वर्ष 2007 में भी आरोप लगाया था, लेकिन उनकी ओर से इस बारे में औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई थी। इसऔरऔर भी

विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) जैसी अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं पर विकासशील देशों की नीतियों में दखल करने के आरोप तो बराबर लगते रहे हैं। लेकिन आईएमएफ की ऐसी छीछालेदर आज तक नहीं हुई थी। उसके प्रमुख डोमिनिक स्ट्रॉस काह्न को शनिवार को अमेरिकी शहर न्यूयॉर्क में बलात्कार की कोशिश और यौन हमले के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया है। यूरोप से लेकर अमेरिका तक में इस पर हल्ला मचा हुआ है। यूरो मुद्रा तक परऔरऔर भी

सुप्रीम कोर्ट ने 1992 के प्रतिभूमि घोटाले में कस्‍टोडियन की तरफ से जारी उन अधिसूचनाओं को सही ठहराया है जिसमें इस घोटाले में हर्षद मेहता की मां रसिला मेहता और भाभी रीना मेहता को शामिल बताया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने 6 मई 2011 के आदेश में विशेष न्‍यायालय के आदेश के विरुद्ध उनकी अपील को रद्द कर दिया। इससे कंस्‍टोडियन द्वारा जारी जनवरी 2007 की अधिसूचनाओं की पुष्टि हो गई है। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेशऔरऔर भी

सुप्रीम कोर्ट ने पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी को सहारा समूह की दो कंपनियों के ओएफसीडी इश्यू की तहकीकात जारी रखने का आदेश दिया है। कोर्ट का कहना है कि हो सकता है कि निवेशकों को इन उत्पादों (डिबेंचरों) का कोई आगा-पीछा ही न मालूम हो और वे बाद में खुद को हर्षद मेहता जैसी धोखाधड़ी का शिकार हुआ महूसस करें। कोर्ट ने गुरुवार को सहारा इंडिया रीयल एस्टेट कॉरपोरेशन और सहारा हाउसिंग इनवेस्टमेंट कॉरपोरेशन के ओएफसीडीऔरऔर भी

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार 12 मई तक सहारा समूह से उन सभी एजेंटों की सूची मांगी है जिन्होंने उसकी कंपनी सहारा इंडिया रीयल एस्टेट कॉरपोरेशन के ओएफसीडी (ऑप्शनली फुली कनर्विटल डिबेंचर) स्कीम के लिए घन जुटाया है। लेकिन एजेंटों की सूची पर सहारा इंडिया की सफाई देखने लायक होनी चाहिए क्योंकि सहारा समूह की सभी कम्पनियों की अधिकृत एजेंट तो अकेली सहारा इंडिया है। यह फर्म देश भर में अपनी शाखाएं खोल कर एजेंट नियुक्त करती है।औरऔर भी