लगता है कि मुद्रास्फीति रिजर्व बैंक की परीक्षा ले रही है। सरकार की तरफ से बुधवार को जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक फरवरी में सकल मुद्रास्फीति की दर पिछले पांच महीनों से घटते-घटते अचानक बढ़ गई। जनवरी में इसकी दर 26 महीनों के न्यूनतम स्तर 6.55 फीसदी पर पहुंच गई थी। लेकिन फरवरी में बढ़कर 6.95 फीसदी पर पहुंचा गई। वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने भरोसा जताया है कि चालू मार्च में यह 6.50 फीसदी पर आऔरऔर भी

देश के सबसे पुराने स्टॉक एक्सचेंज, बीएसई ने मंगलवार को बीसीबी फाइनेंस की लिस्टिंग के साथ अपना अलग एसएमई एक्सचेंज प्लेटफॉर्म शुरू कर दिया। इससे लघु व मध्यम स्तर की कंपनियों को पूंजी बाजार से जोड़ा जाएगा। पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी ने बीएसई को इसकी इजाजत पिछले साल सितंबर में ही दे दी थी। लेकिन इसे व्यावहारिक स्वरूप देने में इतना वक्त लगना लाजिमी था। मंगलवार को इस प्लेटफॉर्म पर पहली लिस्टिंग के मौके पर एक्सचेंजऔरऔर भी

फरवरी महीने में शेयर बाजार की गति को दिखानेवाला सूचकांक, निफ्टी 4 फीसदी बढ़ गया। लेकिन इस बढ़त से म्यूचुअल फंडों की आस्तियां (एयूएम) महज 2 फीसदी बढ़ी हैं। नोट करें कि यह म्यूचुअल फंड स्कीमों में आए निवेश का नहीं, बल्कि बाजार के बढ़ने से उनके निवेश में हुई बढ़त या मार्क टू मार्केट उपबल्धि को दर्शाता है। बाजार के बढ़ने की वजह फरवरी में एफआईआई (विदेशी संस्थागत निवेशकों) की तरफ से शेयरों में किया गयाऔरऔर भी

वित्तीय जगत से जुड़े अधिकांश विश्लेषकों को नहीं लगता कि रिजर्व बैंक आम बजट से पहले गुरुवार, 15 मार्च को ब्याज दरों में कोई कमी करेगा। यह बात समाचार एजेंसी रॉयटर्स की एक रायशुमारी से जाहिर हुई है। रॉयटर्स ने 20 विश्लेषकों से पूछा कि क्या रिजर्व बैंक रेपो दर को 8.5 फीसदी से घटा देगा? इसके जवाब में 17 विश्लेषकों ने कहा है कि ऐसा नहीं होने जा रहा। दो महीने पहले जनवरी में इसी तरहऔरऔर भी

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) के 1032 रुपए के मूल्य पर जारी किए गए शेयर शुक्रवार को नए नियम के मुताबिक एक घंटे के नीलामी सत्र के बाद बीएसई में 1387 रुपए और एनएसई में 1408 रुपए पर लिस्ट हुए। इस तरह लिस्टिंग मूल्य इश्यू मूल्य से क्रमशः 34.4 फीसदी और 36.4 फीसदी ज्यादा रहा। इसके बाद इस पर 20 फीसदी का सर्किट ब्रेकर लग गया। इसकी ऊपरी सीमा 1664.40 रुपए और निचली सीमा 1109.60 रुपए बांध दीऔरऔर भी

शेयर बाजार को बाजार बंद होने से पहले यह पता था। मुद्रा बाजार को इस बात का पक्का अंदाजा था। बैंकों को भी मालूम था कि ऐसा होने जा रहा है। इसलिए रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को शेयर बाजार, मुद्रा बाजार और बैंकों में सन्नाटा छाने के बाद सीआरआर (नकद आरक्षित अनुपात) में कमी कर दी तो हर कोई बड़ा सुकून महसूस कर रहा है। तसल्ली थोड़ी और भी इसलिए बढ़ गई क्योंकि जहां अपेक्षा सीआरआर मेंऔरऔर भी

एमसीएक्स की लिस्टिंग शुक्रवार 9 मार्च को रही है। शेयरों का आवंटन, मूल्य दायरे के ऊपरी छोर 1032 रुपए पर किया गया है। खुद एमसीएक्स और उसकी प्रवर्तक कंपनी फाइनेशियल टेक्नोलॉजीज में खुशियां छाई हुई हैं। लिस्टिंग के दौरान सेबी के नए नियम के मुताबिक 9 से 10 बजे तक इसमें एक घंटे का प्री-ओपन सेशन होगा जिसमें बोलियों के माध्यम से इसका मूल्य खोजा जाएगा। इस दौरान कोई सर्किट सीमा नहीं होगी। लेकिन फिर 10 बजेऔरऔर भी

यह सेबी और स्टॉक एक्सचेंजों की नई व्यवस्था की पहली परीक्षा थी और दोनों ही इसमें फेल हो गए। इससे सरकार भी बड़ी किरकिरी हुई क्योंकि गुरुवार देर रात तक साफ नहीं हो पाया कि ओएनजीसी में सरकार के 5 फीसदी शेयर बेचने की पेशकश पूरी हुई है या नहीं। पहले विनिवेश विभाग के अतिरिक्त सचिव सिद्धार्थ प्रधान ने दिल्ली में प्रेस कांफ्रेंस करके बताया कि 42,77,75,504 शेयरों की नीलामी पूरी संपन्न हो गई है। लेकिन सिस्टमऔरऔर भी

सहारा इंडिया परिवार पर वित्तीय क्षेत्र के दो नियामकों, रिजर्व बैंक और सेबी के बाद तीसरे नियामक आईआरडीए (इरडा) की भी भृकुटि टेढ़ी हो गई है। उसने पिछले साल 11 अगस्त को समूह की जीवन बीमा कंपनी, सहारा लाइफ इंश्योरेंस को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। इसके जवाब और 13 दिसंबर को हुई निजी सुनवाई के बाद इरडा ने कंपनी को कुल 23 इल्जांमों में से केवल तीन में दोषी पाया है और इसके लिए कुलऔरऔर भी

सार्वजनिक क्षेत्र की जिन कंपनियों के पास इफरात कैश है, वे अब अपने शेयरों को वापस खरीदने के साथ-साथ दूसरी सरकारी कंपनियों के विनिवेश में भी शिरकत कर सकती हैं। गुरुवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने काफी समय से अटकते चले आ रहे इस फैसले पर मुहर लगा दी। मंत्रिमंडल के इस फैसले की जानकारी देते हुए भारी उद्योग मंत्री प्रफुल्ल पटेल ने संवाददाताओं को बताया कि सरकार ने इजाजत दे दी है। लेकिन क्या करना है, इसकाऔरऔर भी