केंद्र की यूपीए सरकार के आला मंत्री किस कदर झूठ बोलते और वादाखिलाफी करते हैं, यह पिछले दिनों अण्णा हज़ारे के अनशन के दौरान कई बार उजागर हुआ। लेकिन कोई अंदाजा नहीं लगा सकता है कि वे देश के साथ कितने बड़े-बड़े झूठ बोलते रहे हैं। इनमें से एक झूठ का खुलासा हाल में ही किया है देश में किसानों को ऋण देने की निगरानी व देखरेख करनेवाले शीर्ष बैंक नाबार्ड (राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक)औरऔर भी

30 जून 2011 तक देश के 6,01,625 गांवों में से 1,69,201 यानी 28 फीसदी से ज्यादा गांवों तक ब्रॉडबैंड पहुंच चुका है। भारत निर्माण कार्यक्रम के अंतर्गत केंद्र सरकार का लक्ष्य देश की सभी ढाई लाख ग्राम पंचायतों को साल 2012 तक ब्रॉडबैंड से जोड़ देने का है। अभी तक इनमें से 1,33,712 पंचायतों तक ब्रॉडबैंड सुविधा पहुंचाई जा चुकी है। साथ ही ग्रामीण वायरलेस ब्रॉडबैंड स्कीम के तहत 2,88,454 ब्रॉडबैंड कनेक्शन दिए गए हैं। सरकारी कंपनीऔरऔर भी

केला हमारे-आपके भले ही हमेशा से फल रहा हो, लेकिन भारत सरकार उसे अभी पिछले महीने तक सब्जी ही मानती रही है। अंग्रेजों के समय से चले आ रहे इस सरकारी नाम से केले के किसानों व व्यापारियों को काफी नुकसान हो रहा था। अब फल मान लेने से प्राकृतिक आपदा की स्थिति में केला किसानों को खटाखट अच्छा मुआवजा मिल जाएगा। वहीं रेलवे से व्यापारियों को माल भेजने के लिए रैक आसानी से मिल जाएगी। रैकऔरऔर भी

कृषि मंत्रालय की तरफ से मिली ताजा जानकारी के अनुसार देश भर में अब तक 209.93 लाख हेक्टयर रकबे में धान की रोपाई हो चुकी है। पिछले साल की इसी तिथि की तुलना में इस साल धान की रोपाई में 10.11 लाख हेक्‍टेयर की वृद्धि हुई है। इस साल मध्‍य प्रदेश, उत्‍तर प्रदेश, तमिलनाडु, बिहार और छत्‍तीसगढ़ में सबसे अधिक धान की खेती की गई है। मोटे अनाजों की बुवाई इस साल 151.88 हेक्‍टेयर में की गयीऔरऔर भी

एक हफ्ते देरी से ही सही, नए ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने शुक्रवार, 29 जुलाई को भूमि अधिग्रहण व पुनर्वास पर नया विधेयक सार्वजनिक बहस के लिए पेश कर दिया। उन्होंने मंत्री बनने के एक दिन बाद 13 जुलाई को एक हफ्ते में ऐसा कर देने की बात कही थी। विधेयक मंत्रालय की वेबसाइट पर रख दिया गया है, जिस पर कोई भी अपनी प्रतिक्रिया 31 अगस्त तक भेज सकता है। अंतिम विधेयक को संसद केऔरऔर भी

कृषि मंत्रालय ने भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के किसी तरह के वित्‍तीय संकट में होने से इनकार किया है। इस तरह की खबरें छपने के बाद कि एफसीआई अनाज की खरीद के लिए राज्‍यों और उनकी एजेंसियों को भुगतान नहीं कर पा रहा है, मंत्रालय ने सफाई पेश की है। उसका कहना है कि एफसीआई को गेहूं और धान की खरीद पर बोनस व अतिरिक्‍त आवंटन वगैरह के कारण बजट में आवंटन रकम से ज्यादा खर्च करनाऔरऔर भी

जब देश में खाद्यान्न उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर हो तो खाद्य मुद्रास्फीति में कमी आना स्वाभाविक है। इसी को दर्शाते हुए खाद्य वस्तुओं के थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति 9 जुलाई को समाप्त सप्ताह में घटकर 7.58 फीसदी पर आ गई है। इससे पिछले सप्ताह यह 8.31 फीसदी और साल भर पहले इसी दरम्यान 19.52 फीसदी के ऊंचे स्तर पर थी। वाणिज्य मंत्रालय द्वारा गुरुवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, दालों के दाम आलोच्य सप्ताह केऔरऔर भी

कृषि मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2010-11 में देश में खाद्यान्नों का कुल उत्पादन 24.156 करोड़ टन रहा है। यह पिछले साल के उत्पादन 21.811 करोड़ टन से 10.75% अधिक है। खाद्यान्न उत्पादन का पिछला रिकॉर्ड 2008-09 में 23.447 करोड टन का था। इस बार 8.592 करोड़ टन गेहूं और 1.809 करोड़ टन दालों का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है। इसी तरह मोटे अनाज, मक्का, उड़द, मूंग, चना, तिलहन व सोयाबीन में इस बार सर्वाधिक उत्पादन हुआऔरऔर भी

केन्‍द्र सरकार ने भंडारण क्षमता बढ़ाने और खाद्यान्‍नों की आवाजाही पर वि‍चार-वि‍मर्श के लि‍ए अनाज की खरीद करने वाले प्रमुख राज्‍यों के मंत्रि‍यों की एक बैठक बुधवार, 20 जुलाई को बुलाई है। उपभोक्‍ता मामलात, खाद्य व सार्वजनि‍क वि‍तरण राज्‍य मंत्री के वी थॉमस नई दि‍ल्‍ली में होनेवाली इस बैठक की अध्‍यक्षता करेंगे। इसमें कई केन्‍द्रीय मंत्रालयों के वरि‍ष्‍ठ अधि‍कारी, योजना आयेाग के प्रति‍नि‍धि‍ और वि‍शि‍ष्‍ट पहचान प्राधि‍करण के अध्‍यक्ष नंदन निलेकणी भी भाग लेंगे। दि‍न भर चलनेऔरऔर भी

भंडारण सुविधाओं की तंगी से तंग आकर सरकार ने चार साल पहले गेहूं निर्यात पर लगाया गया प्रतिबंध उठा लिया है। यह फैसला करीब हफ्ते भर पहले 11 जुलाई को मंत्रियों के अधिकार प्राप्त समूह की बैठक में लिया जा चुका है। लेकिन कृषि मंत्री शरद पवार ने दिल्ली में यह जानकारी शनिवार को दी। जब उनसे मीडिया ने पूछा कि क्या गेहूं निर्यात पर बैन हटाया जा चुका है तो उनका जवाब था, “हां, अब कोईऔरऔर भी