समय का अपना चक्र होता है। जो इसे पकड़ नहीं पाते, इसके हिसाब से चल नहीं पाते, वे जीवन की बहुत सारी खुशियों से महरूम रह जाते हैं। देर से सोकर उठनेवाले कभी भी सूर्योदय का आनंद नहीं उठा पाते।और भीऔर भी

किसी गुत्थी को सुलझाने की खुशी उलझी हुई लट को सुलझाने से कहीं ज्यादा होती है। पर हम तो गुत्थियों को गांठ बनाकर जीते हैं, समस्याओं को दरी या कालीन के नीचे ढांक-तोप देने के आदी हो गए हैं।और भीऔर भी

जीभ में स्वाद न होता तो क्या हम खाना खाते? सेक्स की सनसनी न होती तो क्या हम बच्चे पैदा करते? हर सृजन, हर बड़े काम के लिए भावना जरूरी है। सीमित सामर्थ्य में ताकत भरने का काम करती है भावना।और भीऔर भी

सवाल पहले आते हैं, जवाब बाद में। सवाल को जब अपना जवाब मिल जाता है तो अनुनाद होता है, राह खुलती है। लेकिन हम तो जवाबों का ही जखीरा लिये बैठे हैं जिससे हर सवाल को टोपी पहनाते रहते हैं।और भीऔर भी

कोई आपकी तारीफ कर देता है तो कैसे फूल के कुप्पा हो जाते हो आप! फिर कैसे आपकी ऊर्जा बल्ले-बल्ले करने लगती है! यही दूसरों के साथ भी होता है। तारीफ के दो बोल उनका दिन संवार देते हैं, रंगत निखार देते हैं।और भीऔर भी

खुद को अंधेरी कालकोठरी में न बंद कर लो तो अकेले कहां होते हो आप? दिन में चलते हो तो सूरज बादलों की ओट से भी निकलकर आपके साथ आ जाता है। रात में चांद सितारे दुनिया के हर कोने में आपके साथ रहते हैं।और भीऔर भी

जब कभी लगता है कि अब तो हद हो गई, अति हो गई, अब कोई सूरत नहीं बची है, तभी अचानक कोई ऐसी राह निकल आती है जिसके बारे में दूर-दूर तक नहीं सोचा होता है। यह किसी धर्म का नहीं, प्रकृति का नियम है।और भीऔर भी

गुरु, किताब या ज्ञान के अन्य स्रोतों की भूमिका इतनी भर है कि वे हमारे मन-मस्तिष्क पर पड़े माया के परदे को हटा देते हैं। इसके बाद वास्तविक सच तक पहुंचने का संघर्ष हमें अकेले अपने दम पर करना पड़ता है।और भीऔर भी

देखती हैं आंखें, दिखाते हैं हम। माइक्रोस्कोप से देखा तो असंख्य  बैक्टीरिया नजर आ जाते हैं। टेलिस्कोप से देखा तो दृष्टि से ओझल सितारा दिख जाता है। असली सच नंगी आंखों से देखे गए सच से बहुत बड़ा होता है।और भीऔर भी

ज्ञान और प्रकाश के माहौल में ही लक्ष्मी बढ़ती हैं, फलती फूलती हैं। अज्ञान और अंधकार के बीच वे नष्ट हो जाती हैं। दीपावली पर जलाए जानेवाले दीप प्रकाश और ज्ञान के ही प्रतीक हैं। राम की वापसी तो बस कहानी है।और भीऔर भी