सहजता व अनुशासन
वैसे तो सहजता सबसे बड़ा अनुशासन है। लेकिन अनुशासन यूं ही सहज नहीं बनता। शुरू-शुरू में उसे आरोपित करना पड़ता है। बाद में एक दिन वह साइकिल के पैडल चलाने जैसा सहज बन जाता है।और भीऔर भी
सूरज निकलने के साथ नए विचार का एक कंकड़ ताकि हम वैचारिक जड़ता तोड़कर हर दिन नया कुछ सोच सकें और खुद जीवन में सफलता के नए सूत्र निकाल सकें…
वैसे तो सहजता सबसे बड़ा अनुशासन है। लेकिन अनुशासन यूं ही सहज नहीं बनता। शुरू-शुरू में उसे आरोपित करना पड़ता है। बाद में एक दिन वह साइकिल के पैडल चलाने जैसा सहज बन जाता है।और भीऔर भी
हमारे जमाने का दस्तूर ही ऐसा है कि एक के नुकसान में दूसरे का फायदा है। हर मोड़ पर ठग लूटने के लिए तैयार बैठे हैं। हमारा बाजार अभी बहुत कच्चा है। इसलिए ज्यादा सच्चा होना अच्छा नहीं।और भीऔर भी
बंद आंखों के सपने हमें अधूरी चाहतों व वर्जनाओं से मुक्त कराते हैं, जबकि खुली आंखों के सपने दुनिया को जीतने का हौसला देते हैं। इसलिए खुली आंखों से बंद आंखों के सपने देखना अच्छी बात नहीं है।और भीऔर भी
चींटी अगर घड़े पर भी चले तो उसे लगता है कि वह सीधी रेखा में चल रही है। हमारे साथ भी यही होता है। लेकिन इस सृष्टि में सब कुछ वक्र है। विशाल वक्र का छोटा हिस्सा हमें सीधा दिखता है, पर होता नहीं।और भीऔर भी
चोर के लिए पीछे पड़ी भीड़ से बचने का सबसे अच्छा तरीका है कि वह खुद भी चोर-चोर का शोर मचाने लग जाए और भीड़ में खप जाए। इसलिए हमें नेताओं के शोर का मर्म समझना होगा।और भीऔर भी
हाथ पर हाथ धरे बैठना अपने विनाश को न्यौता देना है क्योंकि जब तक आप कुछ करते हो तभी तक जिंदा हो, नहीं तो नकारात्मक शक्तियां आपको खाना शुरू कर देती हैं। भव्य महल भी खंडहर बन जाते हैं।और भीऔर भी
मैं अजर हूं, अमर हूं, अनंत हूं। तुम मुझे क्या बांटोगे? मैंने खुद को दिन-रात और ऋतुओं में बांटा है। तुमने तो महीने और साल बनाकर मेरा अनुकरण भर किया है। मैं बंटता नहीं, मैं बंधता नहीं। मैं समय हूं।और भीऔर भी
ज़िंदगी में पुराने का जाना और नए का आना रिले रेस की तरह नहीं, समुद्र की लहरों की तरह चलता है। लेकिन हम पुरानी लहर के भीतर बन रही नई लहर को नहीं देख पाते और खामखां परेशान हो जाते हैं।और भीऔर भी
जो हुआ, जैसे हुआ, उसे वैसा ही होना था। पछताना क्या? हमारे साथ नहीं होता तो किसी और के साथ होता। बस, नाम बदल जाता। घात-प्रतिघात से ही जीवन बनता है और हमारे कर्मों से संवरता है।और भीऔर भी
© 2010-2025 Arthkaam ... {Disclaimer} ... क्योंकि जानकारी ही पैसा है! ... Spreading Financial Freedom