चुम्बकीय शक्ति
हम सभी भीतर चुम्बक लिए घूमते हैं। एकतरफा हाथ बढ़ाकर हमें किसी से जुड़ने की नहीं, बल्कि आपस की इस चुम्बकीय शक्ति को समझने की जरूरत है। एक चुम्बक दूसरे चुम्बक को खींचता ही है।और भीऔर भी
सूरज निकलने के साथ नए विचार का एक कंकड़ ताकि हम वैचारिक जड़ता तोड़कर हर दिन नया कुछ सोच सकें और खुद जीवन में सफलता के नए सूत्र निकाल सकें…
हम सभी भीतर चुम्बक लिए घूमते हैं। एकतरफा हाथ बढ़ाकर हमें किसी से जुड़ने की नहीं, बल्कि आपस की इस चुम्बकीय शक्ति को समझने की जरूरत है। एक चुम्बक दूसरे चुम्बक को खींचता ही है।और भीऔर भी
इंसानों की बस्ती में हम या तो अपने या दूसरों के कर्मों का नतीजा भुगतते हैं। यहां छिपकर कहीं कोई खुदा नहीं बैठा जो हमारी सदिच्छाओं को पूरा करता रहे या बिना किसी बात के हमें दंडित करता रहे।और भीऔर भी
हफ्ते के सातों दिन किसी न किसी देव को समर्पित हैं जो हमारे ही अंतर्निहित तत्वों के नाम हैं। इनमें से सबसे प्रखर देव सूर्य और शनि हैं। लेकिन इन दोनों ही दिनों हम निढाल पड़े जम्हाई ले रहे होते हैं!और भीऔर भी
इंसान की कोई भी रचना तब तक निष्प्राण रहती है जब तक उसे व्यापक समाज स्वीकार नहीं करता। लेकिन स्वीकृत होते ही वह रचनाकार की मंशा से अलग एक स्वतंत्र सत्ता हासिल कर लेती है।और भीऔर भी
गुरुत्वाकर्षण इतना सहज है कि सब धरती से चिपके आराम से चलते रहते हैं। जब उड़ना होता है तभी इस चुम्बक का अहसास होता है। इस ज्ञान के लिए उड़ना नहीं तो कम से कम उड़ने की कोशिश जरूरी है। और भीऔर भी
भाषण लफ्फाजी में कब बदल जाते हैं, इसका पता बोलनेवालों को नहीं चलता, लेकिन सुननेवाले ताड़ लेते हैं। नेताओं को मालूम हो कि क्रिया से दूर ज्ञान और करनी से दूर कथनी ज्यादा नहीं चलती।और भीऔर भी
अपने घर-परिवार और अपनी नजर में तो हर कोई मूल्यवान होता है। लेकिन असली बात यह है कि समाज की नजर में आपका मूल्य क्या है क्योंकि उसी से आपकी सुख-समृद्धि और चैन का फैसला होता है।और भीऔर भी
नई धारणाएं पुराने शब्दों में नहीं बांधी जा सकतीं। वे जीवन में जिस रूप, जिस भाषा में आएं, उन्हें वैसे ही स्वीकार करना होगा। नया हमारे हिसाब से नहीं ढलेगा। हमें ही उसके हिसाब से ढलना होगा।और भीऔर भी
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