कभी किसी से इतना प्यार न करो कि उसके बिना ज़िंदगी सूनी हो जाए। कभी किसी पर इस कदर भरोसा न करो कि उसके टूटने पर किसी और पर भरोसा ही न जमे। जीने के लिए ऐसा निर्लिप्त भाव जरूरी है।और भीऔर भी

जीते तो सभी अपने लिए ही हैं। कुछ का जीना दूसरों का भला करता है। ज्यादातर का जीना दूसरों का नुकसान नहीं करता। लेकिन कुछ हैं जो दूसरों का गला काटकर ही फलते-फूलते हैं। इनका सर्वनाश जरूरी है।और भीऔर भी

जितना हम जानते जाते हैं, सुख का स्तर उतना ही उन्नत होता जाता है और दुख का दायरा उतना ही बढ़ता जाता है। उलझाव बढ़ने से दुख बढ़ता है और उन्हें सुलझाते जाओ तो सुख बढ़ता चला जाता है।और भीऔर भी

हर किसी के लिए सब कुछ जानना संभव नहीं। लेकिन इतना तो पता होना चाहिए कि क्या है जो हम नहीं जान सकते। तभी तो हम उस हद तक सारा कुछ जानने का जेहाद मरते दम तक जारी रख सकते हैं।और भीऔर भी

हम सभी भीतर चुम्बक लिए घूमते हैं। एकतरफा हाथ बढ़ाकर हमें किसी से जुड़ने की नहीं, बल्कि आपस की इस चुम्बकीय शक्ति को समझने की जरूरत है। एक चुम्बक दूसरे चुम्बक को खींचता ही है।और भीऔर भी

करते हम हैं और नाम दूसरों का लगा लेते हैं। इससे हम तो कमजोर के कमजोर रह जाते हैं और दूसरा भगवान और भगवान, सर्व-शक्तिमान बन जाता है। अन्यथा उनकी औकात कंकड़ से ज्यादा नहीं।और भीऔर भी

इंसानों की बस्ती में हम या तो अपने या दूसरों के कर्मों का नतीजा भुगतते हैं। यहां छिपकर कहीं कोई खुदा नहीं बैठा जो हमारी सदिच्छाओं को पूरा करता रहे या बिना किसी बात के हमें दंडित करता रहे।और भीऔर भी

हफ्ते के सातों दिन किसी न किसी देव को समर्पित हैं जो हमारे ही अंतर्निहित तत्वों के नाम हैं। इनमें से सबसे प्रखर देव सूर्य और शनि हैं। लेकिन इन दोनों ही दिनों हम निढाल पड़े जम्हाई ले रहे होते हैं!और भीऔर भी

इंसान की कोई भी रचना तब तक निष्प्राण रहती है जब तक उसे व्यापक समाज स्वीकार नहीं करता। लेकिन स्वीकृत होते ही वह रचनाकार की मंशा से अलग एक स्वतंत्र सत्ता हासिल कर लेती है।और भीऔर भी

गुरुत्वाकर्षण इतना सहज है कि सब धरती से चिपके आराम से चलते रहते हैं। जब उड़ना होता है तभी इस चुम्बक का अहसास होता है। इस ज्ञान के लिए उड़ना नहीं तो कम से कम उड़ने की कोशिश जरूरी है।  और भीऔर भी