फालतू सूत्र
जो लोग देखने से ही मना कर देते हैं, उनके फैसले कैसे सही हो सकते हैं? तथ्यों से सत्य और सत्य से सूत्र निकलते हैं। पहला चरण है तथ्यों की तहकीकात। जो इससे भागते हैं, उनके सूत्र सरासर बकवास हैं।और भीऔर भी
अशक्त अर्जुन
कौन है जो आंखों के होते हुए भी देख नहीं पाता? वो कौन है जो कानों के रहते हुए भी सुन नहीं पाता? वो कौन है जो जुबान रहते हुए भी बोल नहीं पाता? अंदर के कृष्ण से पूछो कि अर्जुन ऐसा अशक्त क्यों है?और भीऔर भी
निर्धन से धनवान
धन आपके पास तभी तक नहीं है, जब तक या तो आप दूसरों के काम के नहीं बन पाए हैं या दूसरों को आपकी उपयोगिता का पता नहीं है। पहले उपयोगिता, फिर उसकी मार्केटिंग। यही सूत्र है धन बनाने का।और भीऔर भी
जीना शिद्दत से
भगत सिंह 23 साल ही जीकर अमर हो गए। 39 साल के जीवन में विवेकानंद दुनिया पर अमिट छाप छोड़ गए। ऐसा इसलिए क्योंकि वे अपने लिए नहीं, उन अपनों के लिए जिए जो परिवार तक सीमित नहीं थे।और भीऔर भी
रोना हालात का
बाहरी हालात तो सबसे लिए वही होते हैं। जो अंदर से मजबूत होते हैं, वे उनसे टकराकर पहले से और ज्यादा तेजस्वी होकर उभरते हैं। लेकिन जिनके अंदर के हालात कमजोर होते हैं, वे दबकर मिट जाते हैं।और भीऔर भी
नया-पुराना
नए विचारों का आना कोई समस्या नहीं। समस्या है तो पुराने विचारों का न जाना, कुंडली मारकर बैठे रहना। उनकी जकड़बंदी टूटे तभी तो नए की जगह बनेगी। अन्यथा नए विचार यूं ही आकर जाते रहेंगे।और भीऔर भी
तर्क का पटरा
तर्क की हद तक वहीं खत्म हो जाती है, जहां तक चीजें रैखिक होती हैं। धरती को जब तक चिपटा माना जाता रहा, तब तक तर्क ही सर्वोपरि थे। लेकिन धरती के गोल होते ही तर्क का सारा पटरा हो गया।और भीऔर भी
