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ऋद्धि-सिद्धि (Page 24)

सूरज निकलने के साथ नए विचार का एक कंकड़ ताकि हम वैचारिक जड़ता तोड़कर हर दिन नया कुछ सोच सकें और खुद जीवन में सफलता के नए सूत्र निकाल सकें…

decisive

कौन कमाण्डर, कौन निर्णायक

2025-12-01
By: अनिल रघुराज
On: December 1, 2025
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

contradiction

घातक अंतर्विरोध

2025-11-30
By: अनिल रघुराज
On: November 30, 2025
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

not uniform

हम अभिन्न नहीं, भिन्न हैं

2025-11-29
By: अनिल रघुराज
On: November 29, 2025
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

shining sun

अच्छा या बुरा, गलत या सही नहीं

2025-11-28
By: अनिल रघुराज
On: November 28, 2025
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

correct path

गलत आस्था को सही करना

2025-11-27
By: अनिल रघुराज
On: November 27, 2025
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

faith sovereign

आस्था न अच्छी, न बुरी

2025-11-26
By: अनिल रघुराज
On: November 26, 2025
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

no politics on faith

आस्था पर चोट नहीं

2025-11-25
By: अनिल रघुराज
On: November 25, 2025
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

data power

हम बने डेटा, वो मालिक

2025-11-24
By: अनिल रघुराज
On: November 24, 2025
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

no borders

न पहले सीमा न देश, न बाद में

2025-11-23
By: अनिल रघुराज
On: November 23, 2025
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

power of hormones

न गुरु न भगवान, शक्ति देते हॉर्मोन

2025-11-22
By: अनिल रघुराज
On: November 22, 2025
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

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निवेश – तथास्तु

  • छोटे हो चले हैं अब लम्बे निवेश के साल!
    18 Oct 2026

    हालात लगातार बदलते हैं। धारणाएं उनका पीछा करती हैं। अगर हम सच्चाई के हिसाब से धारणाएं न बदलें तो समय हमें रौंदकर आगे बढ़ जाता है। इसलिए समय के साथ या उससे आगे चलने के लिए हमें धारणाओं को लगातार अपडेट करते रहना पड़ता है। जैसे, अभी तक माना जाता है कि शेयर बाज़ार में संभावनामय कंपनी चुनकर निवेश करो और 10-15 साल भूल जाओ। इसे ही दीर्घकालिक निवेश माना जाता है। लेकिन पिछले कुछ सालों से […]

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क्या आप जानते हैं?

  • हमारी आंखें बैक्टीरिया के जीन की देन!

    इंसान से लेकर हाथी, घोड़ा, गाय-बैल, सांप, छिपकली, मेढक, मगरमच्छ व चिड़ियों तक धरती पर जितने भी 69,963 किस्म के रीढ़वाले या कशेरुकी (vertebrates) जीव-जन्तु हैं, उन्होंने देखने की क्षमता वाली अपनी आंखें एक बैक्टीरिया के जीन से हासिल की है। यह सच अप्रैल 2023 में पीएनएएस (प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज) की …

अपनों से अपनी बात

  • साल में 41-112%, मिले है सिर्फ यहां!

    भारतीय अर्थव्यवस्था बढ़ रही है और आगे भी बढ़ेगी। लेकिन कहा जा रहा है कि इसका लाभ आम आदमी को पूरा नहीं मिलता। अमीर-गरीब की खाईं बढ़ रही है। बाज़ार को आंख मूंदकर गालियां दी जा रही हैं। लेकिन बाज़ार सचेत लोगों के लिए आय और दौलत के सृजन ही नहीं, वितरण का काम भी करता है। हमने तथास्तु सेवा इसीलिए शुरू की है ताकि अर्थव्यवस्था, खासकर कंपनियों के बढ़ने का लाभ निपट गरीबी से ऊपर रहनेवाले लोगों तक पहुंचाया जा सके। वे जिन्हें बैंक बहुत हुआ तो 9 प्रतिशत देता है, जबकि वास्तविक महंगाई की दर 10 प्रतिशत से ऊपर रहती है। वे भागकर जाते हैं सोने और रीयल एस्टेट में चले जाते हैं तो उनकी बचत लॉक हो जाती है। देश के काम नहीं आती। खुद उनके कितने काम आएगी, यह भी पक्का नहीं। जो पिछले साढ़े चार सालों से अर्थकाम से जुड़े हैं, वे हमारी ईमानदारी और सत्यनिष्ठा से भलीभांति वाकिफ हैं। शुरू में हम भी कच्चे थे तो बाज़ार के उस्तादों के जाल में फंस गए। गलतियां कीं। लेकिन जैसे ही समझ में आया, खटाक से उनसे किनारा कस लिया। करीब सवा साल पहले से नए सिरे से शुरू किया तो मजबूत आधार और गहन रिसर्च के साथ। उसी का नतीजा है कि हमारी सलाहें शानदार-जानदार रिटर्न दे रही हैं। पिछली बार हमने अगस्त 2013 से अगस्त 2014 तक का लेखाजोखा रखा था। अब सितंबर 2013 से सितंबर 2014 की बानगी पेश है। सितंबर 2013 में पांच रविवार थे तो पांच कंपनियां। आप नीचे की सारिणी से देख सकते हैं कि पांच में चार ने अपना (तीन से पांच साल का) लक्ष्य साल भर में ही पूरा कर लिया है, जबकि एक कंपनी 84.57 प्रतिशत रिटर्न के साथ लक्ष्य से ज़रा-सा पीछे है। तारीख कंपनी तब का भाव समय लक्ष्य 30/09/14 का भाव रिटर्न (%) 01/09/13 डॉ. रेड्डीज़ लैब 2292.90 3 साल 2815 3229.60 40.85 08/09/13 एचडीएफसी बैंक 616.20 3 साल 850 872.65 41.62 15/09/13 अतुल ऑटो 173.65 5 साल 260 367.90 111.86 22/09/13 कमिन्स इंडिया 409.25 3 साल 474 671.05 63.97 29/09/13 नवनीत एजुकेशन 53.15 3 साल 110 98.10 84.57   यहां यह भी गौर करने की बात है कि हम आमतौर पर हर महीने लार्जकैप, मिडकैप और स्मॉल कैप का संतुलन बनाकर चलते हैं। यह भी बताते हैं कि कहां पर एंट्री करें और आपके पास कुल एक लाख रुपए हों तो उस हफ्ते की कंपनी में कितना लगाना चाहिए, उसके कितने शेयर खरीदने चाहिए। मसलन, सितंबर 2013 में हमने तीन लार्जकैप, एक मिडकैप और एक स्मॉल कैप कंपनी आपके निवेश के लिए पेश की थी। इसमें से लार्ज कैप कंपनियों में डॉ. रेड्डीज़ लैब का शेयर लक्ष्य हासिल कर चुका है और यही नहीं, 24 सितंबर 2014 को 3356.60 रुपए पर 52 हफ्ते का शिखर पकड़ चुका है। एचडीएफसी बैंक भी लक्ष्य हासिल करने के साथ ही 30 सितंबर 2014 को 879.80 रुपए का शिखर हासिल कर चुका है। कमिन्स इंडिया भी लक्ष्य हासिल कर लेने के साथ 4 सितंबर 2014 को 720 रुपए पर 52 हफ्ते का शीर्ष छू चुका है। स्मॉल कैप की श्रेणी वाला स्टॉक अतुल ऑटो साल भर में 111.86 प्रतिशत का रिटर्न देकर लक्ष्य के काफी आगे निकल चुका है। यही नहीं, 12 सितंबर 2014 को वो 446.90 रुपए का शिखर भी चूम चुका है। बाकी बची मिडकैप कंपनी नवनीत एजुकेशन में तीन साल का लक्ष्य 110 रुपए था। उसका शेयर 10 सितंबर 2014 को 104.90 रुपए तक जाने के बाद 30 सितंबर को 2014 को 98.10 रुपए पर था, जो साल का 84.97 रिटर्न दिखाता है। आप ऊपर की सारिणी से देख सकते हैं कि 1 सितंबर 2013 से 30 सितंबर 2014 तक की अवधि में तथास्तु में बताई पांच कंपनियों ने न्यूनतम 40.85 प्रतिशत और अधिकतम 111.86 प्रतिशत रिटर्न दिया है। इसी दौरान एनएसई निफ्टी ने 5550.75 से 7964.80 तक जाकर 43.49 प्रतिशत और बीएसई सेंसेक्स ने 18,886.13 से 26,567.99 तक पहुंचकर 40.67 प्रतिशत का रिटर्न दिया है। दोस्तों! पुरानी बात फिर दोहरा रहा हूं कि मात्र 200 रुपए में अगर कोई सवा आपको बाज़ार से ज्यादा रिटर्न दिला रही है, वो भी आपको आपकी भाषा में अच्छी तरह कंपनी की जानकारी देकर तो क्या इस सेवा को आपका और आपको इस सेवा का लाभ नहीं मिलना चाहिए। बढ़ रही अर्थव्यवस्था का लाभ उठाइए। यकीन मानिए कि मोदी की सरकार बस एक निमित्त मात्र है। वो रहे या कोई और आए, अगले दस साल भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए जबरदस्त प्रगति के साल होने जा रहे हैं। इस दौरान एक साल में दोगुना ही नहीं, दस साल में अपनी बचत से दस गुना दौलत बनाने के मौके बहुत सारे आएंगे। दूसरे आपको बस उल्लू बनाएंगे। केवल हम ही हैं जो पूरी ईमानदारी और सत्यनिष्ठा से आपके लिए निवेश के हर रविवार को शानदार मौके लेकर आते रहेंगे। तुलसीदास की चौपाई याद कीजिए – सकल पदारथ है जन मांही, कर्महीन नर पावत नाहीं। आपके हिस्से का कुछ कर्म हम कर दे रहे हैं। बाकी तो आपको ही करना पड़ेगा। इसलिए…. सोचिए। समझिए। फैसला कीजिए। तथास्तु!!!

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ट्रेडिंग – बुद्ध

  • सरकार 99% ऋण भी लेती है अवाम से! 
    21 Oct 2026

    भारत सरकार को सारे का सारा टैक्स हम करीब 146 करोड़ देशवासी देते हैं। इनकम टैक्स से लेकर जीएसटी और एक्साइज व कस्टम ड्यूटी तक के रूप में। यहां तक कि जो सरकारी योजनाओं के करोड़ों लाभार्थी हैं वे भी सरकार को टैक्स देते हैं। टैक्स में प्रत्यक्ष और परोक्ष का भेद करना सरकार की चाल है। साथ ही कमाल की बात है कि सरकार अपना तकरीबन सारा ऋण सीधे या घुमा-फिराकर भी हम से ही लेती है। मसलन, चालू वित्त वर्ष 2026-27 में भारत सरकार ₹16,95,768 करोड़ का ऋण ले रही है। इसमें से वो ₹15,385 करोड़ (0.91%) विदेशी ऋण से लेगी। बाकी बचे रह गए ₹16,80,383 करोड़ में से ₹3,86,772 करोड़ वो डाकघर, पीपीएफ, किसान विकास पत्र, सीनियर सिटीजन सेविंग्स, एनएससी व सुकन्या समृद्धि योजना जैसी लघु बचत स्कीमों से ले रही है। इसके ऊपर से ₹3500 करोड़ वो राज्य भविष्य निधि से लेगी। इधर-उधर की कुछ अन्य रकम को छोड़कर सरकार सबसे ज्यादा ₹13,03,210 करोड़ सीधे-सीधे बाज़ार से उधार लेकर जुटा रही है। इसमें से ₹1,30,000 करोड़ का साल भर से कम अवधि का ऋण है जिन्हें ट्रेजरी बिलों से जुटाया जा रहा है। बाकी ₹11,73,210 करोड़ की शुद्ध बाज़ार उधारी और ₹5,46,790 करोड़ पुराने ऋण उतारने के लिए हैं। कुल मिलाकर सरकार इस साल ₹17,20,000 करोड़ बॉन्ड बेचकर हासिल कर रही है। यह सारे का सारा लेगी हमारी ही बचत से। अब बुधवार की बुद्धि…

जानिए

  • ज़ीरो-सम गेम नहीं है यह
  • ईटीएफ: चलो बाजार खरीद लें
  • मायने आईपीओ ग्रेडिंग के
  • जवाब कमोडिटी बाजार के

बूझिए

  • ओपन ऑफर, बायबैक, डीलिस्टिंग
  • इश्यू मूल्य और बुक बिल्डिंग
  • गुत्थी ऋण बाजार की
  • यह कासा बला क्या है?

आज़माइए

  • मोटामोटी दस बातें शेयरों की
  • गोल्ड ईटीएफ एक, दाम अनेक
  • न करें कम एनएवी का लालच
  • फायदे म्यूचुअल फंड निवेश के

क्या आप जानते हैं?

हमारी आंखें बैक्टीरिया के जीन की देन!

इंसान से लेकर हाथी, घोड़ा, गाय-बैल, सांप, छिपकली, मेढक, मगरमच्छ व चिड़ियों तक धरती पर

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