दो लाख तक टैक्स नहीं, कॉरपोरेट टैक्स 30%, सेस व सरचार्ज नहीं

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने गुरुवार को नए प्रत्यक्ष कर विधेयक को मंजूरी दे दी है। अब इसे सोमवार 30 अगस्त को संसद में पेश किया जाएगा, जहां आम राजनीतिक सहमति को देखते हुए इसके फौरन पास हो जाने की उम्मीद है। वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी के मुताबिक विधेयक में व्यक्तिगत आय की करमुक्त सीमा को 1.6 लाख रुपए से बढ़ाकर दो लाख करने का प्रस्ताव है। साथ ही कॉरपोरेट टैक्स की दर 30 फीसदी रखी गई है और इस पर कोई सरचार्ज या सेस नहीं लिया जाएगा।

मंत्रिमंडल ने देर शाम इस विधेयक को मंजूरी दी। कानून मंत्री वीरप्पा मोइली के मुताबिक इसका मकसद देश के पुराने पड़े प्रत्यक्ष कर कानून को आसान बनाना है। इस विधेयक के पास होने के बाद बनाकर कानून करीब 50 साल पुराने आयकर अधिनियम 1961 की जगह ले लेगा। नए कानून के जरिए ज्यादा से ज्यादा लोगों को कर के दायरे में लाना है ताकि केंद्र सरकार का कर-राजस्व बढ़ सके। इसमें कंपनियों के लिए लाभ-संबंधित छूट को खत्म करके निवेश-संबंधित प्रोत्साहन के उपाय किए गए हैं।

विधेयक कुल 359 पन्नो का है और इसमें 20 अध्याय और 22 अनुच्छेद हैं। इसमें टैक्स के प्रस्तावित प्रावधान और दरें क्या हैं, इसका ठीकठीक पता नहीं चल सका है। सूत्रों के मुताबिक टैक्स की दरों को सोमवार को संसद में विधेयक पेश करने से पहले अंतिम रूप दिया जाएगा। विधेयक में म्यूचुअल फंड की आय को स्रोत पर कटौती (टीडीएस) के दायरे में ले आया गया है और हिंदू अविभाजित परिवारों (एचयूएफ) और व्यक्तियों के लिए टीडीएस की दर 10 फीसदी प्रस्तावित है। दूसरे निवेशकों के लिए टैक्स की दर 20 फीसदी रखी गई है। इसी तरह जीवन बीमा भुगतान पर टीडीएस की दर 10 व 20 फीसदी रखी गई है।

बता दें कि सरकार ने इसी साल 15 जून का प्रत्यक्ष कर संहिता (डायरेक्ट टैक्स कोड, डीटीसी) का संशोधित प्रारूप जारी किया था और उस पर सभी संबंधित पक्षों से 30 जून तक प्रतिक्रिया मांगी थी। सारी प्रतिक्रियाओं के आधार पर प्रत्यक्ष कर विधेयक का प्रारूप तैयार किया गया है। संशोधित प्रारूप में पेंशन व बीमा वगैरह की बचत पर निकासी के समय टैक्स लगाने का शुरुआती प्रस्ताव हटा लिया था और होम लोन पर 1.50 लाख ब्याज को कर योग्य आय से घटाने का प्रस्ताव बहाल कर दिया था।

संशोधित प्रारूप में प्रॉविडेंट फंड, पेंशन फंड और बीमा को ईईटी (एक्जेम्प्ट, एक्जेम्प्ट, टैक्स) से हटाकर ईईई (एक्जेम्प्ट, एक्जेम्प्ट, एक्जेम्प्ट) में लाया गया था। लेकिन स्पष्ट किया गया था कि यह सुविधा नई पेंशन स्कीम, जीपीएफ, पीपीएफ, आरपीएफ और शुद्ध बीमा उत्पादों पर ही मिलेगी। मतलब साफ है कि यूलिप स्कीमों से अंत में मिलनेवाले भुगतान पर टैक्स देना होगा। इसी तरह अब कैपिटल गेन्स में लांग व शॉर्ट टर्म का झंझट खत्म करने का प्रस्ताव है। अभी शेयरों या म्यूचुअल फंडों की इक्विटी स्कीमों में एक साल से ज्यादा के निवेश पर मिले लाभ पर कोई टैक्स नहीं देना पड़ता था। लेकिन महीने या साल जितने भर का निवेश हो, उस पर कैपिटल गेन्स टैक्स देना होगा।

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